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Agra News: एडीजीसी राजस्व को हिरासत में लेकर जिला जज ने जेल भेजा
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मैनपुरी। एडीजीसी राजस्व भुवनेश शाक्य को जिला जज अनिल कुमार ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। उनके जमानत प्रार्थनापत्र पर नियमित सुनवाई के लिए 6 दिसंबर की तारीख तय कर दी है। एडीजीसी पर बलवा करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, आगजनी करने सहित सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ करने का आरोप है। इसका मुकदमा एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में चल रहा है।
कस्बा भोगांव में मई 2006 में एक बालिका के साथ दुष्कर्म किया गया था। लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने उसको थाने से छोड़ दिया, जिससे लोग आक्रोशित हो गए। आक्रोशित लोगों ने भोगांव में जाम लगाकर हंगामा किया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सरकारी बस में आग लगाने के साथ ही तोड़फोड़ की। राहगीरों को आने-जाने से रोका। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक बीके तिवारी ने थाना भोगांव में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में भोगांव के मोहल्ला मोहम्मद सईद निवासी एडीजीसी राजस्व भुवनेश शाक्य को भी नामित किया गया।
पुलिस द्वारा भेजी गई चार्जशीट के बाद मुकदमा एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में चल रहा है। भुवनेश शाक्य के कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर उनके खिलाफ आदेश जारी किया गया। उनके वारंट जारी करके थाना भोगांव भेजे गए। भुवनेश शाक्य ने अपने अधिवक्ता रामबरन शाक्य के माध्यम से जिला जज के न्यायालय में जमानत पाने के लिए आवेदन किया। जिला जज ने एडीजीसी भुवनेश शाक्य को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। उनके जमानत प्रार्थनापत्र पर नियमित सुनवाई के लिए 6 दिसंबर की तारीख तय कर दी है।
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सरकार ने लिया था केस वापस
वर्ष 2007 में बसपा सरकार ने इस मुकदमे को वापस लिया था। न्यायालय से केस डायरी वापस लेने के लिए अभियोजन अधिकारी ने सात फरवरी 2008 को प्रार्थनापत्र भी दिया। कोई आदेश नहीं होने से यह प्रार्थनापत्र आज भी लंबित चल रहा है।
22 आरोपी हो चुके बरी
इस मुकदमे में 22 आरोपियों का मुकदमा अलग से एसीजेएम कोर्ट में चला। एसीजेएम कोर्ट में हुई सुनवाई में सरकारी पक्ष की कहानी साबित नहीं हुई। आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में गवाह घटना को साबित नहीं कर सके। इसके चलते इसी मुकदमे के 22 आरोपी बरी किए जा चुके हैं।
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कस्बा भोगांव में मई 2006 में एक बालिका के साथ दुष्कर्म किया गया था। लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने उसको थाने से छोड़ दिया, जिससे लोग आक्रोशित हो गए। आक्रोशित लोगों ने भोगांव में जाम लगाकर हंगामा किया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सरकारी बस में आग लगाने के साथ ही तोड़फोड़ की। राहगीरों को आने-जाने से रोका। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक बीके तिवारी ने थाना भोगांव में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में भोगांव के मोहल्ला मोहम्मद सईद निवासी एडीजीसी राजस्व भुवनेश शाक्य को भी नामित किया गया।
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पुलिस द्वारा भेजी गई चार्जशीट के बाद मुकदमा एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में चल रहा है। भुवनेश शाक्य के कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर उनके खिलाफ आदेश जारी किया गया। उनके वारंट जारी करके थाना भोगांव भेजे गए। भुवनेश शाक्य ने अपने अधिवक्ता रामबरन शाक्य के माध्यम से जिला जज के न्यायालय में जमानत पाने के लिए आवेदन किया। जिला जज ने एडीजीसी भुवनेश शाक्य को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। उनके जमानत प्रार्थनापत्र पर नियमित सुनवाई के लिए 6 दिसंबर की तारीख तय कर दी है।
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सरकार ने लिया था केस वापस
वर्ष 2007 में बसपा सरकार ने इस मुकदमे को वापस लिया था। न्यायालय से केस डायरी वापस लेने के लिए अभियोजन अधिकारी ने सात फरवरी 2008 को प्रार्थनापत्र भी दिया। कोई आदेश नहीं होने से यह प्रार्थनापत्र आज भी लंबित चल रहा है।
22 आरोपी हो चुके बरी
इस मुकदमे में 22 आरोपियों का मुकदमा अलग से एसीजेएम कोर्ट में चला। एसीजेएम कोर्ट में हुई सुनवाई में सरकारी पक्ष की कहानी साबित नहीं हुई। आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में गवाह घटना को साबित नहीं कर सके। इसके चलते इसी मुकदमे के 22 आरोपी बरी किए जा चुके हैं।