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और अब ‘थर-थर लहर’

Sun, 14 Dec 2014 01:44 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sun, 14 Dec 2014 01:44 AM IST
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After rain extremely cold weather in agra
अब तक दबी रही सर्दी शनिवार को बारिश की बूंदों के साथ बरसी। सुबह 9 बजे से छाए बादल 10 बजे के बाद जो बरसने शुरू हुए तो शाम चार बजे के बाद ही थमे। रुक-रुक कर कई बार शहर से लेकर देहात तक रिमझिम तो कभी झमाझम बारिश होती रही। 16.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। तापमान भी लुढ़क गया। अधिकतम तापमान सामान्य से 6 डिग्री नीचे 17.7 डिग्री रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 11.5 डिग्री रहा। 26 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पाकर शीतलहर थराथरा देने वाली लहर में तब्दील हो गई।
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शनिवार की सुबह बारिश ने मानसून की तरह मौसम का मिजाज बना दिया। जैकेट और स्वेटर में घरों से निकले लोगों को बूंदों ने भिगो दिया। कोट के ऊपर रेनकोट पहनकर भी लोग निकलने वाले जरूर बच गए। ताजमहल सहित स्मारकों में पर्यटक छातों के साथ पहुंचे।
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पूर्वानुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक रविवार शाम तक बादलों के छाए रहने और बूंदाबांदी के आसार बने रहेंगे। रविवार को भी तापमान में बदलाव के संकेत नहीं हैं। सोमवार से न्यूनतम तापमान में कमी का सिलसिला शुरू हो जाएगा। 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक न्यूनतम तापमान में कमी आ सकती है।
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नहीं टूटे दिसंबर की सर्दी के रिकार्ड
- सबसे ठंडा दिन 1989 और 1992 में दर्ज किया गया, जब पारा 11.4 डिग्री तक पहुंच गया।
- सबसे ठंडी रात 27 दिसंबर 1961 और 25 दिसंबर 1973 रही, जब पारा 0 डिग्री दर्ज हुआ।
- सबसे ज्यादा बारिश का रिकार्ड 1980 के नाम पर है, जब दिन भर में 19.3 मिमी बारिश हुई।
- दिसंबर के महीने में सबसे ज्यादा बारिश 1997 में हुई, जब 37 मिमी बारिश दर्ज की गई।

‘कन्फ्यूज हो गए, कोट पहनें या रेनकोट’
दिसंबर में पहले पखवाड़े गर्मी के बाद अचानक बदले मौसम के मिजाज में शीतलहर के बाद जो बारिश हुई, उसने शनिवार को सोशल मीडिया पर भी संदेशों की बारिश शुरू कर दी। सुबह सोशल मीडिया व्हाटस एप्प, फेसबुक पर मौसम के मिजाज को लेकर मजाकिया मैसेज का दौर शुरू हो गया। कुछ संदेश इस तरह के थे...,
 ‘लगता है कि भगवान ने आज दबंग मूवी देख ली। ऐसा मौसम बनाया कि लोग कन्फ्यूज हो गए कि कोट पहनें या रेनकोट।’
‘आज ही छाता बेचकर नया स्वेटर खरीदा, आज ही जोरदार पानी गिरा डाला।’
‘कुछ तकनीकी खामी की वजह से इस बार गर्मी के बाद सर्दी का मौसम उपलब्ध नहीं है। कृपया बारिश का मजा लें।’

आलू और गेहूं के लिए बरसा सोना
आगरा। गेहूं, आलू और सरसों की बुवाई के बाद किसानों को पहली सिंचाई की जरूरत थी। बिजली न आने से किसान प्रदर्शन भी कर रहे थे, लेकिन शनिवार की बारिश ने किसानों की मुश्किलें दूर कर दीं। आसमान से पानी के रूप में उनके लिए तो सोना ही बरसा।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी यतेंद्र सिंह ने बताया कि आलू में बारिश के बाद रोगों से बचाव जरूरी है। अगैती-पिछैती झुलसा रोकने के लिए बायो पेस्टिसाइड में ट्राइकोडर्मा या केमिकल में मैंकोजेब दो लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। सरसों में चेंपा रोग के लिए यह मौसम मुफीद है। उससे बचाव के लिए डाईमेथओएट या मिथाइल ओ डोमेटोऑन का छिड़काव करें। बायो पेस्टिसाइड के रूप में नीम का तेल 2 लीटर प्रति हेक्टेयर में छिड़का जा सकता है।
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