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Agra News: 33 साल बाद न्याय के लिए हाईकोर्ट की ली शरण

Thu, 08 Jan 2026 02:26 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 02:26 AM IST
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After 33 years, he took refuge in the High Court for justice.
आगरा। इंदौर की जलत्रासदी से पहले आगरा वर्ष 1993 में खटीकपाड़ा में 21 लोगों की मौत देख चुका है। इन 33 सालों में आगरा में गंदे पानी की आपूर्ति रुके, ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। तब भी त्रासदी की वजह पता चल सकी थी। मृतकों के परिजन इन 33 सालों में न्याय नहीं पा सके। अब तक त्रासदी की वजह पता चली, न परिजन को नौकरी का वादा पूरा हुआ। क्षेत्र के तजेंद्र राजौरा ने न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है, जिसमें मार्च में सुनवाई होनी है।
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20 मई 1993 को गंदे पानी की आपूर्ति के कारण खटीकपाड़ा, मंडी सईद खां, नाला बुढ़ान सैयद में 21 लोगों की मौत हो गई थी। तब प्रदेश के राज्यपाल मोतीलाल बोरा मौके पर आए और मृतकों के परिजन को नौकरी और मुआवजा देने का वादा किया। तत्कालीन राष्ट्रपति से मिलने के लिए भाजपा के तब नेता प्रतिपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी अपने सांसदों के साथ गए थे और आगरा की इस त्रासदी की सीबीआई जांच की मांग की थी। त्रासदी के 33 साल बाद पीड़ित परिवार की इंद्रा देवी ने अपने सात साल के बच्चे योगेंद्र को मुसीबत झेलते हुए पाला, वहीं मृतक ओमप्रकाश की पत्नी ममता ने प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर और रद्दी से उपयोगी चीजें बनाकर अपने परिवार को पाला।
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