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Agra: एसएन मेडिकल में होगा एडवांस्ड शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी, आगरा और आसपास के मरीजों को मिलेगा लाभ
Wed, 15 Oct 2025 09:41 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 15 Oct 2025 09:41 AM IST
सार
ऑर्थोपैडिक सर्जन डॉ. रजत कपूर एवं उनकी टीम ने एडवांस्ड शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।
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एसएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में सफलता अर्जित की है। विभाग के ऑर्थोपैडिक सर्जन डॉ. रजत कपूर एवं उनकी टीम ने एडवांस्ड शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि कॉलेज के आर्थोपैडिक्स विभाग में अब अत्याधुनिक कीहोल शोल्डर सर्जरी तकनीक उपलब्ध हैं, जिनसे आगरा एवं आसपास के मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगी। डॉ. रजत कपूर ने बताया कि कंधे को स्थिर रखने वाली चार मांसपेशियों के टेंडन के फटने को रोटेटर कफ टियर कहा जाता है।
इसके लक्षणों में कंधे में दर्द, कमजोरी, मूवमेंट में कठिनाई और कभी कट-कट की आवाज है। डॉ. कपूर ने बताया कि शुरुआती अवस्था में दवा, फिजियोथेरेपी या इंजेक्शन से उपचार संभव है, लेकिन गंभीर मामलों में आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी ही स्थायी समाधान है।
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प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि कॉलेज के आर्थोपैडिक्स विभाग में अब अत्याधुनिक कीहोल शोल्डर सर्जरी तकनीक उपलब्ध हैं, जिनसे आगरा एवं आसपास के मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगी। डॉ. रजत कपूर ने बताया कि कंधे को स्थिर रखने वाली चार मांसपेशियों के टेंडन के फटने को रोटेटर कफ टियर कहा जाता है।
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इसके लक्षणों में कंधे में दर्द, कमजोरी, मूवमेंट में कठिनाई और कभी कट-कट की आवाज है। डॉ. कपूर ने बताया कि शुरुआती अवस्था में दवा, फिजियोथेरेपी या इंजेक्शन से उपचार संभव है, लेकिन गंभीर मामलों में आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी ही स्थायी समाधान है।
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