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मथुरा: नंदबाबा मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने का आरोपी फैजल खान जेल से रिहा
Fri, 25 Dec 2020 12:21 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 25 Dec 2020 12:21 AM IST
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फैजल खान
- फोटो : अमर उजाला
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नंदगांव के नंदबाबा मंदिर परिसर में नमाज अदा करने के आरोपी फैसल खान को जिला कारागार से गुरुवार की सुबह रिहा कर दिया गया। हाईकोर्ट ने पिछले दिनों उसे जमानत दे दी थी। जेल से रिहा होने के बाद फैसल ने कहा कि मोहब्बत का कोई धर्म नहीं होता।
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नंदगांव के नंदबाबा मंदिर परिसर में 29 अक्तूबर को फैसल खान और उसके साथी चांद मोहम्मद ने नमाज अदा की थी। एक नवंबर को इस मामले में बरसाना थाने में दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। दोनों पर बिना पुजारी की सहमति के नमाज पढ़ने और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल करने का आरोप लगा था।
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आरोप था कि ऐसा हिन्दुओं की आस्था को अपमानित करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से किया गया। दिल्ली निवासी फैसल और बिहार निवासी चांद मोहम्मद खुदाई खिदमतगार संस्था के सदस्य हैं।
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गुरुवार को जिला कारागार से रिहा होने के बाद फैसल खान ने कहा कि आज बहुत अच्छा दिन है। कल क्रिसमस है, ईसा मसीह का जन्मदिन। इससे साफ है कि इंसानियत और मोहब्बत के लिए खुद को कुर्बान कर देना है। यही जेल में रहकर सीखा है।
जेल में हर शाम एक तरफ आरती और दूसरी तरफ नमाज होती है। हम जिनको अपराधी कहते हैं, उनसे हमें ये बात सीखनी चाहिए कि मोहब्बत का कोई धर्म नहीं होता। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार की सुबह सात बजकर 55 मिनट पर फैसल खान को रिहा कर दिया गया है।
21 दिसंबर को हुई जमानत मंजूर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 दिसंबर को फैैसल खान की सशर्त जमानत मंजूर कर ली थी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने दिया। अधिवक्ता का कहना था कि याची सामाजिक कार्यकर्ता है। खुदाई खिदमतगार संस्था से जुड़ा है। 25 वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में जुटा है। वह मंदिर के भीतर ही नहीं गया। उसने पुजारी की सहमति से मंदिर के बाहर नमाज पढ़ी। कोर्ट ने याची को साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों पर प्रलोभन या अन्य तरीके से दबाव नहीं डालने, विचारण में सहयोग करने, सोशल मीडिया में फोटोग्राफ वायरल नहीं करने की शर्त रखी है।
जेल में हर शाम एक तरफ आरती और दूसरी तरफ नमाज होती है। हम जिनको अपराधी कहते हैं, उनसे हमें ये बात सीखनी चाहिए कि मोहब्बत का कोई धर्म नहीं होता। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार की सुबह सात बजकर 55 मिनट पर फैसल खान को रिहा कर दिया गया है।
21 दिसंबर को हुई जमानत मंजूर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 दिसंबर को फैैसल खान की सशर्त जमानत मंजूर कर ली थी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने दिया। अधिवक्ता का कहना था कि याची सामाजिक कार्यकर्ता है। खुदाई खिदमतगार संस्था से जुड़ा है। 25 वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में जुटा है। वह मंदिर के भीतर ही नहीं गया। उसने पुजारी की सहमति से मंदिर के बाहर नमाज पढ़ी। कोर्ट ने याची को साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों पर प्रलोभन या अन्य तरीके से दबाव नहीं डालने, विचारण में सहयोग करने, सोशल मीडिया में फोटोग्राफ वायरल नहीं करने की शर्त रखी है।