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चार बच्चों की मौत से बीनेपुर गांव में छाया मातम
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01एमएनपी-56-गांव बीनेपुर में बच्चों के शव पहुंचने के बाद उमड़ी भीड़
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी/बरनाहल। पानी में डूबने से चार बच्चों की मौत के बाद बीनेपुर गांव में
सोमवार को मातम छाया रहा। कभी परिजनों की चित्कार सुनाई देती, तो कभी सिसकियां।
अपने कलेजे के टुकड़ों को खोकर परिजन बेसुध हैं। सोमवार शाम पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव गांव पहुंचे। गमगीन माहौल में सभी का अंतिम संस्कार हुआ। दिनभर अधिकांश घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
बरनाहल क्षेत्र के गांव बीनेपुर निवासी गजराज कठेरिया का दस वर्षीय पुत्र सनी कुमार, वीरेंद्र जाटव का नौ वर्षीय पुत्र सूरज कुमार गांव के ही अनुज जाटव (9) पुत्र हरपाल जाटव व धर्मवीर जाटव (9) पुत्र मुकेश जाटव की रविवार शाम गड्ढे में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी। देर रात सैफई मेडिकल कॉलेज में मौत की पुष्टि के बाद चारों बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए इटावा भेजे गए थे। हादसे के बाद से ही गांव में मातम छाया हुआ था। सोमवार को अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले। शाम को पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव गांव पहुंचे। शव पहुंचते ही गांव परिजनों की चित्कार से गूंज उठा। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम थी। ग्रामीणों ने परिजनों को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद अपने आंसू नहीं रोक सके। गमगीन माहौल में बच्चों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
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सोमवार को मातम छाया रहा। कभी परिजनों की चित्कार सुनाई देती, तो कभी सिसकियां।
अपने कलेजे के टुकड़ों को खोकर परिजन बेसुध हैं। सोमवार शाम पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव गांव पहुंचे। गमगीन माहौल में सभी का अंतिम संस्कार हुआ। दिनभर अधिकांश घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
बरनाहल क्षेत्र के गांव बीनेपुर निवासी गजराज कठेरिया का दस वर्षीय पुत्र सनी कुमार, वीरेंद्र जाटव का नौ वर्षीय पुत्र सूरज कुमार गांव के ही अनुज जाटव (9) पुत्र हरपाल जाटव व धर्मवीर जाटव (9) पुत्र मुकेश जाटव की रविवार शाम गड्ढे में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी। देर रात सैफई मेडिकल कॉलेज में मौत की पुष्टि के बाद चारों बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए इटावा भेजे गए थे। हादसे के बाद से ही गांव में मातम छाया हुआ था। सोमवार को अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले। शाम को पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव गांव पहुंचे। शव पहुंचते ही गांव परिजनों की चित्कार से गूंज उठा। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम थी। ग्रामीणों ने परिजनों को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद अपने आंसू नहीं रोक सके। गमगीन माहौल में बच्चों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
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