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योजना पर लगा ताला, कैसे साक्षर हों निरक्षर
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मैनपुरी। साक्षर भारत मिशन योजना बंद होने के साथ ही जिले में साक्षरता दर बढ़ाने के सपने पर भी ताला लग गया। लोक शिक्षा केंद्र जहां बंद पड़े हुए हैं तो वहीं अन्य कोई भी पहल नहीं की गई। शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में अब भी डेढ़ लाख से अधिक बुजुुर्ग निरक्षर हैं।
साक्षरता दर बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2010 में साक्षर भारत मिशन योजना की शुरुआत की थी। जिले में यह योजना तीन साल देरी से जुलाई 2013 में शुरू हो सकी। पांच साल तक चली साक्षरता योजना 31 मार्च 2018 को बंद कर दी गई। बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में डेढ़ लाख लोग आज भी निरक्षर ही हैं। इन्हें साक्षरता अभियान के सर्वे के दौरान चिह्नित किया गया था। इनको साक्षर बनाने की तैयारी शुरू होती इससे पहले ही जिले में साक्षरता योजना को बंद कर दिया गया।
498 लोक शिक्षा केंद्र पर 3.36 लाख हुए साक्षर
जिले की 498 ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों पर 934 प्रेरकों की तैनाती की गई थी। पांच साल तक चली योजना में जिले के 3.36 लाख लोगों को साक्षर किया गया। परीक्षा कराकर नव साक्षरों को प्रमाणपत्र भी जारी किए गए।
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प्रेरकों को नहीं मिल सका 14 महीने का मानदेय
जिले के 934 प्रेरक आज भी योजना को शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। जनवरी 2019 में योजना को फिर से शुरू करने की पहल चली थी, लेकिन बाद में फिर से योजना लटक गई। प्रेरकों को हर महीने दो हजार रुपये मानदेय मिलता था। 14 महीने का उनका मानदेय आज तक नहीं मिल सका है।
साक्षर भारत मिशन योजना बंद चल रही है। फिलहाल योजना को शुरू करने के लिए कोई आदेश नहीं हैं। आगे जो आदेश प्राप्त होंगे उनका पालन किया जाएगा। - विजय प्रताप सिंह बीएसए
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साक्षरता दर बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2010 में साक्षर भारत मिशन योजना की शुरुआत की थी। जिले में यह योजना तीन साल देरी से जुलाई 2013 में शुरू हो सकी। पांच साल तक चली साक्षरता योजना 31 मार्च 2018 को बंद कर दी गई। बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में डेढ़ लाख लोग आज भी निरक्षर ही हैं। इन्हें साक्षरता अभियान के सर्वे के दौरान चिह्नित किया गया था। इनको साक्षर बनाने की तैयारी शुरू होती इससे पहले ही जिले में साक्षरता योजना को बंद कर दिया गया।
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498 लोक शिक्षा केंद्र पर 3.36 लाख हुए साक्षर
जिले की 498 ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों पर 934 प्रेरकों की तैनाती की गई थी। पांच साल तक चली योजना में जिले के 3.36 लाख लोगों को साक्षर किया गया। परीक्षा कराकर नव साक्षरों को प्रमाणपत्र भी जारी किए गए।
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प्रेरकों को नहीं मिल सका 14 महीने का मानदेय
जिले के 934 प्रेरक आज भी योजना को शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। जनवरी 2019 में योजना को फिर से शुरू करने की पहल चली थी, लेकिन बाद में फिर से योजना लटक गई। प्रेरकों को हर महीने दो हजार रुपये मानदेय मिलता था। 14 महीने का उनका मानदेय आज तक नहीं मिल सका है।
साक्षर भारत मिशन योजना बंद चल रही है। फिलहाल योजना को शुरू करने के लिए कोई आदेश नहीं हैं। आगे जो आदेश प्राप्त होंगे उनका पालन किया जाएगा। - विजय प्रताप सिंह बीएसए