{"_id":"58bdb52d4f1c1bab18dc4080","slug":"aato","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो हजार से ज्यादा डग्गामार वाहन भरते हैं फर्राटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो हजार से ज्यादा डग्गामार वाहन भरते हैं फर्राटा
दो हजार से ज्यादा डग्गामार वाहन भरते हैं फर्राटा
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:44 AM IST
विज्ञापन
दो हजार से ज्यादा डग्गामार वाहन भरते हैं फर्राटा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में दो हजार से ज्यादा डग्गामार वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से तमाम के पास छोटे रूटों के परमिट हैं मगर संचालित लंबे रूटों पर हो रहे हैं। संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों की मेहरबानी और सत्ताधारी नेताओं की शह पर दौैड़ने वाले वाहनों से रोडवेज को रोजाना लाखों के राजस्व का घाटा उठाना पड़ता है। ज्यादा सख्ती होने पर कुछ दिन को इनका संचालन बंद कर दिया जाता है। इसके बाद फिर से पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है।
हाईवे पर आईएसबीटी के सामने, भगवान टाकीज ओवर ब्रिज के नीचे और अबू उलाह दरगाह के कट पर प्राइवेट बसें सवारियां ढोती हैं। इसके अलावा वाटर वर्क्स चौराहा, रामबाग चौराहे पर तो समानांतर बस अड्डा संचालित किया जा रहा है। टेढ़ी बगिया चौराहा पर तकरीबन 200 छोटी, बड़ी गाड़ियां खंदौली, एत्मादपुर, हाथरस, सादाबाद, बरहन, छलेसर और टूंडला तक चलती हैं। इनमें से ज्यादातर के पास परमिट तक नहीं है। ठेकेदार वसूली करते हैं।
एनएच-2 ही नहीं आगरा ग्वालियर हाईवे के चौराहों पर भी ऐसा ही हाल है। अर्जुन नगर, रोहता, पथौली, सेवला चौैराहा, मधु नगर, शाहगंज, बिजलीघर चौराहा, शमसाबाद रोड पर बस, मिनी बस, मारुति वैन, टेंपो और आटो का संचालन किया जा रहा है। इनकी चेकिंग को दिखावे के अभियान चलाए जाते हैं। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि डग्गामार वाहनों के कारण रोडवेज को रोजाना तकरीबन सात से आठ लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ता है। कई दफा कार्रवाई के लिए पत्र लिखे जा चुके हैं मगर इन पर कोई अंकुश नहीं लगा है।
विज्ञापन
आरटीओ ने चलाया गोपनीय अभियान
आगरा। आरटीओ (प्रवर्तन) की मानें तो सोमवार को डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। यह बात अलग है कि अभियान की जिम्मेदारी आरटीओ नहीं बल्कि पीटीओ ने संभाली। लेकिन सड़कों पर किसी तरह की चेकिंग नहीं दिखाई दी।
विज्ञापन
हाईवे पर आईएसबीटी के सामने, भगवान टाकीज ओवर ब्रिज के नीचे और अबू उलाह दरगाह के कट पर प्राइवेट बसें सवारियां ढोती हैं। इसके अलावा वाटर वर्क्स चौराहा, रामबाग चौराहे पर तो समानांतर बस अड्डा संचालित किया जा रहा है। टेढ़ी बगिया चौराहा पर तकरीबन 200 छोटी, बड़ी गाड़ियां खंदौली, एत्मादपुर, हाथरस, सादाबाद, बरहन, छलेसर और टूंडला तक चलती हैं। इनमें से ज्यादातर के पास परमिट तक नहीं है। ठेकेदार वसूली करते हैं।
विज्ञापन
एनएच-2 ही नहीं आगरा ग्वालियर हाईवे के चौराहों पर भी ऐसा ही हाल है। अर्जुन नगर, रोहता, पथौली, सेवला चौैराहा, मधु नगर, शाहगंज, बिजलीघर चौराहा, शमसाबाद रोड पर बस, मिनी बस, मारुति वैन, टेंपो और आटो का संचालन किया जा रहा है। इनकी चेकिंग को दिखावे के अभियान चलाए जाते हैं। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि डग्गामार वाहनों के कारण रोडवेज को रोजाना तकरीबन सात से आठ लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ता है। कई दफा कार्रवाई के लिए पत्र लिखे जा चुके हैं मगर इन पर कोई अंकुश नहीं लगा है।
विज्ञापन
आरटीओ ने चलाया गोपनीय अभियान
आगरा। आरटीओ (प्रवर्तन) की मानें तो सोमवार को डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। यह बात अलग है कि अभियान की जिम्मेदारी आरटीओ नहीं बल्कि पीटीओ ने संभाली। लेकिन सड़कों पर किसी तरह की चेकिंग नहीं दिखाई दी।