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छह घंटे में काबू हुई गोदाम की आग
छह घंटे में काबू हुई गोदाम की आग
Updated Mon, 17 Apr 2017 12:41 AM IST
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छह घंटे में काबू हुई गोदाम की आग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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थाना जगदीशपुरा के आवास विकास कालोनी स्थित सेक्टर सात में बांस बल्ली के गोदाम में शनिवार रात तकरीबन डेढ़ बजे लगी आग छह घंटे तक धधकती रही। पुलिस और दमकल कर्मियों को आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। रविवार सुबह सात बजे आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया। लाखों का नुकसान हुआ है।
गोदाम लोहामंडी निवासी विनय कुमार जैन का है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि गोदाम में चपरासी रहता है। वह चूल्हे पर भोजन पकाता है। रात में उसने चूल्हा जलाया होगा। इससे ही आग बल्लियों तक पहुंच गई। आग लगने पर चपरासी गोदाम का गेट बंद कर भाग गया। इस दौरान गोदाम में रखे ज्वलनशील केमिकल से भरे ड्रम फटने से दो धमाके हुए। इससे लोग दहशत में आ गए। रविवार सुबह तकरीबन सात बजे आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया। गोदाम के पीछे चंद्रपाल का मकान है। लपटों से उनका मकान पूरी तरह से घिरा था। इस पर परिवारीजनों ने आग पर कंट्रोल करने के लिए छत से पाइप लगाकर पानी डाला। इस दौरान चंद्रपाल के रिश्तेदार युवक हर्ष, विशाल और बाबी छत से पानी डालते समय झुलस गए। हर्ष और उसके भाई विशाल के हाथ झुलसे, जबकि बाबी के चेहरे पर लपटें आईं।
पांच घरों की दीवारें चटकीं
गोदाम के बगल में ही इंडियन आयल कार्पोरेशन के रिटायर्ड कर्मी सोहनपाल सिंह का मकान है। आग की लपटें इनके मकान में ही आ रही थीं। उनके पहली मंजिल पर बने दो कमरों के दरवाजे, पानी की टंकी और सामान जल गया। कई कमरों की दीवारें चटक गईं। उन्होंने 20 लाख रुपये के नुकसान की बात कही है। उनके बगल में राजवीर सिंह सेंगर का मकान है। उनकी पानी की दो टंकी जल गईं। चंद्रपाल सिंह के घर की दीवारें चटकी और टंकी जल गई। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी दीपक उपाध्याय और राम लखन शर्मा के घरों की दीवारें चटक गईं। वहीं छत पर रखा सामान जल गया।
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सड़क पर गुजरी रात
चंद्रपाल की बेटी हिना ने बताया कि कालोनी में शोर सुनकर उन्हें आग लगने की जानकारी हो सकी। वह सभी बाहर आ गए। घर की दीवारें गरम हो गईं। धुआं भी भर गया। उनके यहां दो सिलेंडर थे। उन्हें बाहर फेंक दिया। हिना की बहन सोनम ने बताया कि उन्होंने पहले सौ नंबर मिलाया। मगर, पुलिस ने उन्हें 101 नंबर मिलाने के लिए बोल दिया। तब उन्होंने दोबारा से फोन किया। तकरीबन आधा घंटे बाद दमकल पहुंची। एक विस्फोट भी हुआ था, जिससे लोगों ने समझा कि गैस सिलेंडर फट गया है।
अमित ने दिखाया साहस
रामलखन का बेटा अमित आईएस की कोचिंग कर रहा है। वह रात को पढ़ाई कर रहा था। तभी उसने धुआं देखा। तब उसे जानकारी हुई। सबसे पहले उसने ही छत पर चढ़कर पानी डाला।
पुलिस को देंगे तहरीर
दीपक का कहना था कि आवासीय परिसर में गोदाम बनाया गया है। आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं थे। वह गोदाम मालिक के खिलाफ थाने में तहरीर देेंगे।
केन्याई छात्रों ने निभाया इंसानियत का रिश्ता
आगरा। वो भारत के नागरिक नहीं हैं। यहां की भाषा भी कम ही समझ पाते हैं। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा कर दिखाया, जिसे हर किसी ने सलाम किया। केन्या से आकर भारत में शिक्षा ग्रहण कर रहे तीन छात्रों ने सेक्टर सात में लगी आग के बाद लपटों से घिरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकालकर एक मिसाल पेश की।
बांस बल्ली के गोदाम के बगल में आईओसी के रिटायर्ड कर्मी सोहनपाल रहते हैं। उनको सर्वाइकल की समस्या है। घर में उनकी पत्नी लीलावती, बेटी लता और नीतू के अलावा 11 साल का धेवता सुमित, डेढ़ महीने की धेवती प्रज्ञा सहित सात लोग थे। आग की लपटों ने उनके घर को घेर लिया था। पहली मंजिल पर भी कमरे के दरवाजे जलने लगे थे। सोहनपाल ने बताया कि उनका मैन गेट बन रहा है। इस कारण शाम को मिस्त्री गेट को रस्सी और तार से बंद करके गया था। आग लगने के बाद वह दरवाजा नहीं खोल पा रहे थे। उनके घर के सामने ही अपार्टमेंट में केन्याई छात्र न्यूटॉन, निकोडेमस और डुगलस रहते हैं। वह फुटबाल मैच देख रहे थे। उन्होंने चीखपुकार सुनी तो दौड़ लगा दी। न्यूटन ने बताया कि गेट के नहीं खुलने पर उनका एक साथी दीवार फांदकर अंदर कूदा। महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद गेट को भी किसी तरह खोल दिया। तब सोहनपाल भी बाहर आ सके। केन्याई छात्रों के इस कदम को सभी ने सराहा। न्यूटॉन ने बताया कि वह सिकंदरा स्थित एक कालेज से बीसीए की पढ़ाई कर रहे हैं।
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गोदाम लोहामंडी निवासी विनय कुमार जैन का है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि गोदाम में चपरासी रहता है। वह चूल्हे पर भोजन पकाता है। रात में उसने चूल्हा जलाया होगा। इससे ही आग बल्लियों तक पहुंच गई। आग लगने पर चपरासी गोदाम का गेट बंद कर भाग गया। इस दौरान गोदाम में रखे ज्वलनशील केमिकल से भरे ड्रम फटने से दो धमाके हुए। इससे लोग दहशत में आ गए। रविवार सुबह तकरीबन सात बजे आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया। गोदाम के पीछे चंद्रपाल का मकान है। लपटों से उनका मकान पूरी तरह से घिरा था। इस पर परिवारीजनों ने आग पर कंट्रोल करने के लिए छत से पाइप लगाकर पानी डाला। इस दौरान चंद्रपाल के रिश्तेदार युवक हर्ष, विशाल और बाबी छत से पानी डालते समय झुलस गए। हर्ष और उसके भाई विशाल के हाथ झुलसे, जबकि बाबी के चेहरे पर लपटें आईं।
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पांच घरों की दीवारें चटकीं
गोदाम के बगल में ही इंडियन आयल कार्पोरेशन के रिटायर्ड कर्मी सोहनपाल सिंह का मकान है। आग की लपटें इनके मकान में ही आ रही थीं। उनके पहली मंजिल पर बने दो कमरों के दरवाजे, पानी की टंकी और सामान जल गया। कई कमरों की दीवारें चटक गईं। उन्होंने 20 लाख रुपये के नुकसान की बात कही है। उनके बगल में राजवीर सिंह सेंगर का मकान है। उनकी पानी की दो टंकी जल गईं। चंद्रपाल सिंह के घर की दीवारें चटकी और टंकी जल गई। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी दीपक उपाध्याय और राम लखन शर्मा के घरों की दीवारें चटक गईं। वहीं छत पर रखा सामान जल गया।
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सड़क पर गुजरी रात
चंद्रपाल की बेटी हिना ने बताया कि कालोनी में शोर सुनकर उन्हें आग लगने की जानकारी हो सकी। वह सभी बाहर आ गए। घर की दीवारें गरम हो गईं। धुआं भी भर गया। उनके यहां दो सिलेंडर थे। उन्हें बाहर फेंक दिया। हिना की बहन सोनम ने बताया कि उन्होंने पहले सौ नंबर मिलाया। मगर, पुलिस ने उन्हें 101 नंबर मिलाने के लिए बोल दिया। तब उन्होंने दोबारा से फोन किया। तकरीबन आधा घंटे बाद दमकल पहुंची। एक विस्फोट भी हुआ था, जिससे लोगों ने समझा कि गैस सिलेंडर फट गया है।
अमित ने दिखाया साहस
रामलखन का बेटा अमित आईएस की कोचिंग कर रहा है। वह रात को पढ़ाई कर रहा था। तभी उसने धुआं देखा। तब उसे जानकारी हुई। सबसे पहले उसने ही छत पर चढ़कर पानी डाला।
पुलिस को देंगे तहरीर
दीपक का कहना था कि आवासीय परिसर में गोदाम बनाया गया है। आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं थे। वह गोदाम मालिक के खिलाफ थाने में तहरीर देेंगे।
केन्याई छात्रों ने निभाया इंसानियत का रिश्ता
आगरा। वो भारत के नागरिक नहीं हैं। यहां की भाषा भी कम ही समझ पाते हैं। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा कर दिखाया, जिसे हर किसी ने सलाम किया। केन्या से आकर भारत में शिक्षा ग्रहण कर रहे तीन छात्रों ने सेक्टर सात में लगी आग के बाद लपटों से घिरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकालकर एक मिसाल पेश की।
बांस बल्ली के गोदाम के बगल में आईओसी के रिटायर्ड कर्मी सोहनपाल रहते हैं। उनको सर्वाइकल की समस्या है। घर में उनकी पत्नी लीलावती, बेटी लता और नीतू के अलावा 11 साल का धेवता सुमित, डेढ़ महीने की धेवती प्रज्ञा सहित सात लोग थे। आग की लपटों ने उनके घर को घेर लिया था। पहली मंजिल पर भी कमरे के दरवाजे जलने लगे थे। सोहनपाल ने बताया कि उनका मैन गेट बन रहा है। इस कारण शाम को मिस्त्री गेट को रस्सी और तार से बंद करके गया था। आग लगने के बाद वह दरवाजा नहीं खोल पा रहे थे। उनके घर के सामने ही अपार्टमेंट में केन्याई छात्र न्यूटॉन, निकोडेमस और डुगलस रहते हैं। वह फुटबाल मैच देख रहे थे। उन्होंने चीखपुकार सुनी तो दौड़ लगा दी। न्यूटन ने बताया कि गेट के नहीं खुलने पर उनका एक साथी दीवार फांदकर अंदर कूदा। महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद गेट को भी किसी तरह खोल दिया। तब सोहनपाल भी बाहर आ सके। केन्याई छात्रों के इस कदम को सभी ने सराहा। न्यूटॉन ने बताया कि वह सिकंदरा स्थित एक कालेज से बीसीए की पढ़ाई कर रहे हैं।