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Agra News: आलू के बीज में धांधली से उपजा भ्रष्टाचार का उद्यान

Mon, 10 Nov 2025 02:29 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 10 Nov 2025 02:29 AM IST
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A garden of corruption grew out of the potato seed scam
आगरा। आलू बीज के वितरण में जमकर घपला हुआ। किसानों से अवैध वसूली की गई। एक करोड़ रुपये से अधिक जमा कराए लेकिन उन्हें बीज नहीं मिला। पांच अधिकारी निलंबित हो चुके हैं। ऐसे में अब आलू किसानों को बीज के लिए जमा रकम डूबने का डर सता रहा है।
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एक तरफ लखनऊ से आए सरकारी बीज वितरण में भ्रष्टाचार पर उप निदेशक उद्यान धर्मपाल यादव, जिला उद्यान अधिकारी बैजनाथ सिंह, सहायक निरीक्षक संजीव यादव और कनिष्ठ सहायक सुनील कुमार को शासन ने निलंबित किया है। दूसरी तरफ सींगना फार्म पर अनियमितताओं के आरोप में उप निदेशक नीरज कुमार कौशल को निलंबित किया गया है।
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इधर, जिले में 4300 क्विंटल आलू बीज आवंटन के लिए मिला था। 1300 से अधिक किसानों ने करीब एक करोड़ रुपये बीज खरीद के लिए जमा कराए थे। 800 से अधिक किसान ऐसे हैं जिन्हें रकम जमा कराने के बाद भी बीज नहीं मिला। रुनकता निवासी नेत्रपाल ने बताया कि उनके पास नौ बीघा खेत है। 2715 रुपये क्विंटल का बीज उन्हें 3000 रुपये क्विंटल मिला। पहले 25 क्विंटल की रकम जमा कराई। फिर 15 क्विंटल बीज देने का वायदा किया, लेकिन मिला सिर्फ 6 क्विंटल। प्रति क्विंटल उनसे 285 रुपये अवैध वसूली की गई।
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जिला किसान सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य वीरेंद्र सिंह परिहार का कहना है कि आलू बीज वितरण में हुए भ्रष्टाचार में उद्यान विभाग के लखनऊ से आगरा तक कई अधिकारी शामिल हैं। इनके विरुद्ध मुख्यमंत्री को एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। जिससे कि भविष्य में किसानों के साथ कोई छल नहीं कर सके।
किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने कहा कि आलू बीज वितरण में हुए भ्रष्टाचार में निलंबन पर्याप्त नहीं है। वह उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से मिलकर सभी आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। खंदौली के किसान महाराज सिंह ने बताया कि 5 क्विंटल बीज का उनसे 24,775 रुपये लिया गया, बीज भी नहीं मिला। रकम वापसी के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं।


सुनारी गांव के किसान निरंजन ने बताया कि उन्होंने 10 क्विंटल बीज खरीद के लिए 2710 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 27,100 रुपये जमा कराए थे। बीज नहीं मिला। रकम वापस भी नहीं हो सकी। मेहनत की गाढ़ी कमाई डूबने का डर सता रहा है।
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