{"_id":"3-87395","slug":"Agra-87395-3","type":"story","status":"publish","title_hn":"32 साल की रंजिश तीन जिंदगियां खत्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
32 साल की रंजिश तीन जिंदगियां खत्म
Agra
Updated Sun, 28 Sep 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा। पैतृक संपत्ति के लिए भाइयों के बीच चल रही रंजिश ने एक परिवार की तीन जिंदगियां खत्म कर दी। दिनेशचंद्र सोनी का अपने बड़े भाई सुरेशचंद्र सोनी से 32 साल से विवाद चल रहा था। रंजिश की शुरुआत सन् 1982 में दिनेश के खिलाफ कराए बलवे, मारपीट के मुकदमे से हुई। इसके बाद तो दोनों ओर से मुकदमे कराने की होड़ सी मच गई। मुकदमेबाजी में भाइयों के साथ उनके बेटे भी शामिल हो गए।
जगदीशपुरा भीम नगर में रहने वाले जगदीशचंद्र के पांच बेटों में दिनेशचंद्र सोनी चौथे नंबर के थे। भाइयों में रमेशचंद्र, महेश, सुरेशचंद्र, दिनेश, चंद्रप्रकाश और सबसे छोटे सत्यप्रकाश हैं। सत्यप्रकाश कानपुर में रहते हैं। वहीं सुरेशचंद्र समेत चारों भाई दिनेशंचद्र के खिलाफ थे। विवाद की जड़ 600 वर्ग गज का प्लाट और डेढ़ सौ गज का मकान है। सुरेश पक्ष के लोग दिनेश को हिस्सा नहीं देना चाहते थे। इसी से विवाद शुरू हुआ। रंजिश इस कदर बढ़ गई थी कि दोनों पक्ष मुकदमे दर्ज कराने के बहाने तलाश करते थे। सुरेशचंद्र सोनी अधिवक्ता होने के कारण भारी पड़ रहा था। दिनेश और उसके परिवार के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमले, मारपीट, धोखाधड़ी आदि के 30 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि सुरेशचंद्र सोनी पर 29 मुकदमे दर्ज हैं। परिवार के रमेशचंद्र पर डकैती समेत 23 मुकदमे, दिनेश पर 11, महेश पर 25, सुरेशचंद्र के बेटे शैलेंद्र पर तीन, चंद्रप्रकाश पर पांच मुकदमे हैं।
29 मुकदमे, फिर भी सुरेशचंद्र को एक बार भी जेल नहीं
पीड़ित परिवार ने बताया कि पिछले साल आरोपी सुरेशचंद्र ने अपनी वकालत का फायदा उठाते हुए अपने एक क्लाइंट की पत्नी से दिनेशचंद्र के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद नाई की मंडी की एक महिला ने सुरेशचंद्र सोनी के खिलाफ भी बलात्कार का मुकदमा लिखाया। इतने मुकदमे होने के बाद भी सुरेशचंद्र सोनी किसी मामले में जेल नहीं गया, जबकि दिनेश के परिवार के लोगों को जेल जाना पड़ा। दो भाइयों के बीच की रंजिश में आखिरकार दिनेशचंद्र और उसके दोनों बेटों की जान चली गई।
विज्ञापन
जेल जाने की बारी आई तो कराया समझौता
दिनेशचंद्र का तीसरा बेटा गजेंद्र ने बताया कि पिछले साल घर में घुसकर हमला करने के मामले में सुरेशचंद्र सोनी समेत चार लोगों के खिलाफ वारंट जारी हो गए थे। सुरेशचंद्र ने पुलिस अधिकारियों पर दबाव डालकर दिनेशचंद्र से समझौता कर लिया। इस तरह वह गिरफ्तारी से बच निकला।
माफी मांगने के बहाने किया विश्वासघात
दीवानी में दिनेशचंद्र और उनके दोनों बेटों की जहर खिलाकर हत्या करने के मामले में दिनेशचंद्र की पत्नी बेबी ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें कहा है कि मेरे जेठ सुरेशचंद्र सोनी की पति दिनेश से काफी समय से रंजिश चल रही है। उन्होंने कई झूठे मुकदमे लगवा दिए हैं। शुक्रवार को पति और दोनों बेटे दीवानी में पेशी पर आए थे। कोर्ट में पेशी के बाद सुरेशचंद्र, विजेंद्र व नरेंद्रपाल ने पति दिनेश से माफी मांगी। कहा कि जल्द ही उन्हें जेल से बाहर निकाल लेंगे। समझौते की बात करने आए हैं। अब रंजिश बढ़ाना ठीक नहीं है। इसके बाद डिब्बों से निकालकर पति और बेटों को खाना खिलाया। जेल जाते वक्त हालत बिगड़ने पर जब एसएन अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पति ने बताया कि उनके भाई और भतीजों ने खाने में जहर देकर विश्वासघात किया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर भी नहीं मिली सुरक्षा
गजेंद्र अपने पिता और दो भाइयों की मौत से बेहाल है। उसने बताया कि ताऊ सुरेशचंद्र सोनी ने जिंदगी हराम कर रखी थी। वह हमारे खिलाफ अपने क्लाइंटों से भी मुकदमे लिखाते थे। पिता और भाइयों को रोजाना कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते थे। अपने क्लाइंट नाई की मंडी के हारुन से जानलेवा हमले का मुकदमा लिखाया था। हाईकोर्ट ने उनके परिवार की सुरक्षा के आदेश दिए थे, लेकिन पुलिस ने कभी सुनवाई नहीं की। आखिर वही हुआ जिसका डर था। उसने पूरे परिवार को मार डाला।
मां से छुपाई मौत की खबर
दिनेशचंद्र सोनी अपने दोनों बेटों विशाल और योगेंद्र के साथ मोबाइल शोरूम चलाते थे। योगेंद्र की दो साल पहले ही किरन से शादी हुई थी। किरन गर्भवती है। जब उसे पति की मौत की खबर मिली तो वह बेसुध हो गई। उधर, सुबह दूसरे बेटे विशाल की मौत हुई तो घरवालों ने मां बेबी को उसकी मौत की खबर नहीं दी। शव को चुपके से पोस्टमार्टम गृह में रखवा दिया।
विज्ञापन
जगदीशपुरा भीम नगर में रहने वाले जगदीशचंद्र के पांच बेटों में दिनेशचंद्र सोनी चौथे नंबर के थे। भाइयों में रमेशचंद्र, महेश, सुरेशचंद्र, दिनेश, चंद्रप्रकाश और सबसे छोटे सत्यप्रकाश हैं। सत्यप्रकाश कानपुर में रहते हैं। वहीं सुरेशचंद्र समेत चारों भाई दिनेशंचद्र के खिलाफ थे। विवाद की जड़ 600 वर्ग गज का प्लाट और डेढ़ सौ गज का मकान है। सुरेश पक्ष के लोग दिनेश को हिस्सा नहीं देना चाहते थे। इसी से विवाद शुरू हुआ। रंजिश इस कदर बढ़ गई थी कि दोनों पक्ष मुकदमे दर्ज कराने के बहाने तलाश करते थे। सुरेशचंद्र सोनी अधिवक्ता होने के कारण भारी पड़ रहा था। दिनेश और उसके परिवार के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमले, मारपीट, धोखाधड़ी आदि के 30 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि सुरेशचंद्र सोनी पर 29 मुकदमे दर्ज हैं। परिवार के रमेशचंद्र पर डकैती समेत 23 मुकदमे, दिनेश पर 11, महेश पर 25, सुरेशचंद्र के बेटे शैलेंद्र पर तीन, चंद्रप्रकाश पर पांच मुकदमे हैं।
विज्ञापन
29 मुकदमे, फिर भी सुरेशचंद्र को एक बार भी जेल नहीं
पीड़ित परिवार ने बताया कि पिछले साल आरोपी सुरेशचंद्र ने अपनी वकालत का फायदा उठाते हुए अपने एक क्लाइंट की पत्नी से दिनेशचंद्र के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद नाई की मंडी की एक महिला ने सुरेशचंद्र सोनी के खिलाफ भी बलात्कार का मुकदमा लिखाया। इतने मुकदमे होने के बाद भी सुरेशचंद्र सोनी किसी मामले में जेल नहीं गया, जबकि दिनेश के परिवार के लोगों को जेल जाना पड़ा। दो भाइयों के बीच की रंजिश में आखिरकार दिनेशचंद्र और उसके दोनों बेटों की जान चली गई।
विज्ञापन
जेल जाने की बारी आई तो कराया समझौता
दिनेशचंद्र का तीसरा बेटा गजेंद्र ने बताया कि पिछले साल घर में घुसकर हमला करने के मामले में सुरेशचंद्र सोनी समेत चार लोगों के खिलाफ वारंट जारी हो गए थे। सुरेशचंद्र ने पुलिस अधिकारियों पर दबाव डालकर दिनेशचंद्र से समझौता कर लिया। इस तरह वह गिरफ्तारी से बच निकला।
माफी मांगने के बहाने किया विश्वासघात
दीवानी में दिनेशचंद्र और उनके दोनों बेटों की जहर खिलाकर हत्या करने के मामले में दिनेशचंद्र की पत्नी बेबी ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें कहा है कि मेरे जेठ सुरेशचंद्र सोनी की पति दिनेश से काफी समय से रंजिश चल रही है। उन्होंने कई झूठे मुकदमे लगवा दिए हैं। शुक्रवार को पति और दोनों बेटे दीवानी में पेशी पर आए थे। कोर्ट में पेशी के बाद सुरेशचंद्र, विजेंद्र व नरेंद्रपाल ने पति दिनेश से माफी मांगी। कहा कि जल्द ही उन्हें जेल से बाहर निकाल लेंगे। समझौते की बात करने आए हैं। अब रंजिश बढ़ाना ठीक नहीं है। इसके बाद डिब्बों से निकालकर पति और बेटों को खाना खिलाया। जेल जाते वक्त हालत बिगड़ने पर जब एसएन अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पति ने बताया कि उनके भाई और भतीजों ने खाने में जहर देकर विश्वासघात किया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर भी नहीं मिली सुरक्षा
गजेंद्र अपने पिता और दो भाइयों की मौत से बेहाल है। उसने बताया कि ताऊ सुरेशचंद्र सोनी ने जिंदगी हराम कर रखी थी। वह हमारे खिलाफ अपने क्लाइंटों से भी मुकदमे लिखाते थे। पिता और भाइयों को रोजाना कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते थे। अपने क्लाइंट नाई की मंडी के हारुन से जानलेवा हमले का मुकदमा लिखाया था। हाईकोर्ट ने उनके परिवार की सुरक्षा के आदेश दिए थे, लेकिन पुलिस ने कभी सुनवाई नहीं की। आखिर वही हुआ जिसका डर था। उसने पूरे परिवार को मार डाला।
मां से छुपाई मौत की खबर
दिनेशचंद्र सोनी अपने दोनों बेटों विशाल और योगेंद्र के साथ मोबाइल शोरूम चलाते थे। योगेंद्र की दो साल पहले ही किरन से शादी हुई थी। किरन गर्भवती है। जब उसे पति की मौत की खबर मिली तो वह बेसुध हो गई। उधर, सुबह दूसरे बेटे विशाल की मौत हुई तो घरवालों ने मां बेबी को उसकी मौत की खबर नहीं दी। शव को चुपके से पोस्टमार्टम गृह में रखवा दिया।