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मैनपुरी में पार्सल बम में विस्फोट के बाद भी न जागा विभाग, बड़ा खतरा
Agra
Updated Tue, 04 Feb 2014 02:16 PM IST
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आगरा। डाक विभाग की पार्सल सेवा तस्करों का माध्यम तो बनी ही थी अब बम विस्फोट के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा है। मैनपुरी के आजाद नगर निवासी धर्मवीर सिंह के घर में इमरजेंसी लाइट के रूप में भेजा गया पार्सल बम का धमाका इसका उदाहरण है। इसके बावजूद न तो विभाग इस ओर सतर्क है और न ही खुुफिया एजेंसी। आज भी बिना जांच के कोई भी सामान पार्सल के जरिए देश के किसी भी कोने में भेजा जा रहा है।
डाक विभाग अपनी पार्सल सेवा को आधुनिक बनाने में तो जुटा है, लेकिन सुरक्षा की ओर कभी सोचा तक नहीं गया। इसी कारण डाक विभाग और कोरियर सेवा को तस्कर इस्तेमाल करते आ रहे हैं। प्रतिबंधित जानवरों की खाल से लेकर लैबों के लिए मरे हुए सांप और अन्य वन्य जीव तक पार्सल से भेजते रहे हैं। वर्ष 2003 में आगरा में कोरियर से भेज गए सांपों की तस्करी के मामले का खुलासा हुआ था। वन्य विभाग की टीम ने कार्रवाई भी की थी। जिन लोगों के पास यह पार्सल पहुंचना था वहां छापामारी की गई और उनको गिरफ्तार भी किया गया। इस सबके बावजूद कोरियर कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बिना स्कैन किए पार्सल बुक करने पर सवाल भी उठे, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। आज भी देश के किसी भी कोने में जाने वाले पार्सल की जांच नहीं की जाती। डाक विभाग ने पार्सल बुकिंग केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे जरूर लगा लिए हैं। यह भी केवल प्रमुख डाकघरों में हैं।
मैनपुरी के आजाद नगर में जो पार्सल बम फटा वह संजय प्लेस स्थित डाक घर से भेजा गया था। यह वह डाकघर है जहां से देश ही नहीं विदेश के लिए भी पार्सल भेजे जाते हैं।
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क्या होना चाहिए
- पार्सल बुकिंग से पहले उसकी स्कैनिंग जरूरी।
- पार्सल बुकिंग केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगें।
- शक हो तो उसे बुकिंगकर्ता के सामने खुलवाया कर चेक किया जाए।
वर्सन
डाक विभाग में पार्सल के स्कैनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। सीसीटीवी कैमरे भी केवल आगरा में चंद डाकघरों में लगे हैं। पार्सल की जांच होनी जरूरी है। शक पर ही जांच का प्रावधान है।
- वीके गुप्ता, वरिष्ठ अधीक्षक डाक, आगरा
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डाक विभाग अपनी पार्सल सेवा को आधुनिक बनाने में तो जुटा है, लेकिन सुरक्षा की ओर कभी सोचा तक नहीं गया। इसी कारण डाक विभाग और कोरियर सेवा को तस्कर इस्तेमाल करते आ रहे हैं। प्रतिबंधित जानवरों की खाल से लेकर लैबों के लिए मरे हुए सांप और अन्य वन्य जीव तक पार्सल से भेजते रहे हैं। वर्ष 2003 में आगरा में कोरियर से भेज गए सांपों की तस्करी के मामले का खुलासा हुआ था। वन्य विभाग की टीम ने कार्रवाई भी की थी। जिन लोगों के पास यह पार्सल पहुंचना था वहां छापामारी की गई और उनको गिरफ्तार भी किया गया। इस सबके बावजूद कोरियर कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बिना स्कैन किए पार्सल बुक करने पर सवाल भी उठे, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। आज भी देश के किसी भी कोने में जाने वाले पार्सल की जांच नहीं की जाती। डाक विभाग ने पार्सल बुकिंग केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे जरूर लगा लिए हैं। यह भी केवल प्रमुख डाकघरों में हैं।
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मैनपुरी के आजाद नगर में जो पार्सल बम फटा वह संजय प्लेस स्थित डाक घर से भेजा गया था। यह वह डाकघर है जहां से देश ही नहीं विदेश के लिए भी पार्सल भेजे जाते हैं।
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क्या होना चाहिए
- पार्सल बुकिंग से पहले उसकी स्कैनिंग जरूरी।
- पार्सल बुकिंग केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगें।
- शक हो तो उसे बुकिंगकर्ता के सामने खुलवाया कर चेक किया जाए।
वर्सन
डाक विभाग में पार्सल के स्कैनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। सीसीटीवी कैमरे भी केवल आगरा में चंद डाकघरों में लगे हैं। पार्सल की जांच होनी जरूरी है। शक पर ही जांच का प्रावधान है।
- वीके गुप्ता, वरिष्ठ अधीक्षक डाक, आगरा