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डेढ़ बजते ही आगरा चल देते हैं मथुरा के डॉक्टर
Updated Tue, 27 Mar 2018 08:16 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। कमिश्नर, डीएम और एडीएम सहित अनेक प्रशासनिक अफसरों के निरंतर निरीक्षण के बाद भी जिला मुख्यालय के तीन बड़े जिला अस्पताल में चिकित्सकों की मौजूदगी पूरे समय तक नहीं हो पा रही है। दोपहर डेढ़ बजते ही चिकित्सक अपना बैग उठाने लगते हैं। दो बजे से पहले ही उनकी गाड़ियां आगरा की राह पकड़ लेती हैं।
निर्धारित व्यवस्था के तहत जिला अस्पताल में दोपहर दो बजे तक चिकित्सकों को ओपीडी का कार्यक्रम तय है। 1:30 बजे तक रजिस्ट्रेशन का काउंटर खुलता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद होते ही चिकित्सक भी अपनी ओपीडी को बंद कर देते हैं। चंद मिनट में काम काज बंद हो जाता है।
इस दौरान 1:30 बजे तक रजिस्ट्रेशन कराने वाला मरीज थोड़ा देरी से चिकित्सक के पास पहुंचेगा तो उसे वापस ही लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल और वृंदावन के अधिकांश चिकित्सक बाहरी जनपदों से आते हैं।
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ग्रामीण अंचल का और भी बुरा हाल
जिला मुख्यालय से ज्यादा स्थिति ग्रामीण अंचल के सामुदायिक एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की खराब है। यहां चिकित्सक ही नहीं, स्टाफ भी बहुत कम पहुंचता है। यहां देरी से पहुंचना और जल्दी चिकित्सालय छोड़ देना आम बात है। यहां सबसे बड़ा काम सरलता से मरीजों को रेफर करने का होता है।
लगातार अनुपस्थित चल रहीं पैथोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक प्रभारी डा. ऋतु रंजन अवकाश पर हैं। पैथोलॉजिस्ट डा. तृषला चार्ज लेने के बाद वापस नहीं लौटी हैं। उन्होंने 20 दिन पहले एटा से यहां आकर चार्ज लिया था। अवकाश की सूचना भी उन्होंने सीएमएस को नहीं दी है। यहां काउंसलर भी एक सप्ताह से अवकाश पर हैं। सीएमएस डा. विमल कुमार गुप्ता का कहना है कि पैथोलॉजिस्ट बगैर सूचना के लापता हैं। निरंतर अनुपस्थित दर्ज की जा रही है। 31 मार्च के बाद रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
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निर्धारित व्यवस्था के तहत जिला अस्पताल में दोपहर दो बजे तक चिकित्सकों को ओपीडी का कार्यक्रम तय है। 1:30 बजे तक रजिस्ट्रेशन का काउंटर खुलता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद होते ही चिकित्सक भी अपनी ओपीडी को बंद कर देते हैं। चंद मिनट में काम काज बंद हो जाता है।
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इस दौरान 1:30 बजे तक रजिस्ट्रेशन कराने वाला मरीज थोड़ा देरी से चिकित्सक के पास पहुंचेगा तो उसे वापस ही लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल और वृंदावन के अधिकांश चिकित्सक बाहरी जनपदों से आते हैं।
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ग्रामीण अंचल का और भी बुरा हाल
जिला मुख्यालय से ज्यादा स्थिति ग्रामीण अंचल के सामुदायिक एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की खराब है। यहां चिकित्सक ही नहीं, स्टाफ भी बहुत कम पहुंचता है। यहां देरी से पहुंचना और जल्दी चिकित्सालय छोड़ देना आम बात है। यहां सबसे बड़ा काम सरलता से मरीजों को रेफर करने का होता है।
लगातार अनुपस्थित चल रहीं पैथोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक प्रभारी डा. ऋतु रंजन अवकाश पर हैं। पैथोलॉजिस्ट डा. तृषला चार्ज लेने के बाद वापस नहीं लौटी हैं। उन्होंने 20 दिन पहले एटा से यहां आकर चार्ज लिया था। अवकाश की सूचना भी उन्होंने सीएमएस को नहीं दी है। यहां काउंसलर भी एक सप्ताह से अवकाश पर हैं। सीएमएस डा. विमल कुमार गुप्ता का कहना है कि पैथोलॉजिस्ट बगैर सूचना के लापता हैं। निरंतर अनुपस्थित दर्ज की जा रही है। 31 मार्च के बाद रिपोर्ट भेज दी जाएगी।