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अब तक नहीं हुई आलू क्रय केंद्र की बोहनी
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:52 PM IST
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एटा। प्रदेश सरकार की आलू खरीद के लिए शुरू की गई बाजार हस्तक्षेप योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। मंडी में बने आलू क्रय केंद्र की अब तक बोहनी नहीं हुई है। आलम यह है कि किसान आलू को केंद्र पर बेचने की जगह आढ़तियों के पास बेच रहे हैं। साथ ही कोल्ड स्टोर में भी आलू नहीं पहुंच रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों के मीडियम साइज का आलू खरीदने के लिए 549 रुपया निर्धारण किया है। वहीं किसानों के आलू को व्यापारियों के अच्छे दामों में खरीदने से क्रय केंद्र पर सन्नाटा बना हुआ है। व्यापारी 700 रुपये से लेकर 815 रुपये में आलू खरीद रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य कम होने से किसान सरकारी क्रय केंद्र से दूर भाग रहे हैं।
वहीं किसानों को अभी तक फसल से जो नुकसान हुआ है। वह इस बार आलू बिक्री होने से राहत दे रहा है। आलू के रेट बढ़ने से किसान कोल्ड स्टोरेज की तरफ न जाकर मंडी में आलू बेच रहे है। आलम यह है कि जिले में अभी कोल्ड स्टोर 50 फीसदी खाली पड़े हैं। दरअसल, मंडी में आलू बेचने से किसान को नकद रुपया मिल जाता है। ऐसे में किसान मंडी में व्यापारियों के पास दौड़ रहे हैं। सरकार ने जो रेट तय किया है। उससे किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है।
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व्यापारी कर रहे प्रतिस्पर्धा
प्रदेश सरकार के आलू निर्धारण के बाद से लगातार आलू के दाम बढ़ते जा रहे है। जब तक सरकार ने खरीद शुरू नहीं की थी, तो व्यापारी अपनी मनमर्जी से आलू की खरीद करते थे। मगर अब सरकार और व्यापारियों में प्रतिस्पर्धा के चलते मंडी में ऊंचे दाम पर आलू खरीद की जा रही है।
कहते हैं आंकड़े
19 कोल्ड स्टोर हैं जिले में
166495.15 मीट्रिक टन की है भंडारन क्षमता
8000 हेक्टेयर भूमि में हुई है आलू की बुवाई
549 रुपये है सरकार का समर्थन मूल्य
20 हजार आलू किसान हैं जिले में
2.19 लाख मीट्रिक टन हुआ आलू उत्पादन
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उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों के मीडियम साइज का आलू खरीदने के लिए 549 रुपया निर्धारण किया है। वहीं किसानों के आलू को व्यापारियों के अच्छे दामों में खरीदने से क्रय केंद्र पर सन्नाटा बना हुआ है। व्यापारी 700 रुपये से लेकर 815 रुपये में आलू खरीद रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य कम होने से किसान सरकारी क्रय केंद्र से दूर भाग रहे हैं।
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वहीं किसानों को अभी तक फसल से जो नुकसान हुआ है। वह इस बार आलू बिक्री होने से राहत दे रहा है। आलू के रेट बढ़ने से किसान कोल्ड स्टोरेज की तरफ न जाकर मंडी में आलू बेच रहे है। आलम यह है कि जिले में अभी कोल्ड स्टोर 50 फीसदी खाली पड़े हैं। दरअसल, मंडी में आलू बेचने से किसान को नकद रुपया मिल जाता है। ऐसे में किसान मंडी में व्यापारियों के पास दौड़ रहे हैं। सरकार ने जो रेट तय किया है। उससे किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है।
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व्यापारी कर रहे प्रतिस्पर्धा
प्रदेश सरकार के आलू निर्धारण के बाद से लगातार आलू के दाम बढ़ते जा रहे है। जब तक सरकार ने खरीद शुरू नहीं की थी, तो व्यापारी अपनी मनमर्जी से आलू की खरीद करते थे। मगर अब सरकार और व्यापारियों में प्रतिस्पर्धा के चलते मंडी में ऊंचे दाम पर आलू खरीद की जा रही है।
कहते हैं आंकड़े
19 कोल्ड स्टोर हैं जिले में
166495.15 मीट्रिक टन की है भंडारन क्षमता
8000 हेक्टेयर भूमि में हुई है आलू की बुवाई
549 रुपये है सरकार का समर्थन मूल्य
20 हजार आलू किसान हैं जिले में
2.19 लाख मीट्रिक टन हुआ आलू उत्पादन