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सब्जियों का ‘राजा’ बना गया किसानों को रंक
Updated Wed, 10 Jan 2018 11:48 PM IST
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आलू
- फोटो : self
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मैनपुरी। गुजरा हुआ वर्ष किसानों के लिए खास अच्छा साबित नहीं हुआ। सब्जियों के राजा ने किसानों को रंक बना दिया। आलू का सही मूल्य नहीं मिलने से किसानों को उसे सड़कों पर फेंकना पड़ा था, लेकिन इसके बाद भी जिले के किसानों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वहीं शासन की ओर से बनाए गए मंत्री समूह से जिले के किसानों को नई फसल में मुनाफा होने की उम्मीद जगी है।
पिछले वर्ष किसानों को आलू का सही मूल्य नहीं मिला था। इस कारण किसानों ने शीतगृहों से आलू निकालना बंद कर दिया। इसके बाद शीतगृह स्वामियों ने आलू को सड़कों पर फेंकवा दिया था। हर रोज दर्जनों की संख्या में ट्रैक्टर सड़क के किनारे आलू फेंकते नजर आते थे।
एक हजार हेक्टेयर घटा रकबा
-जिले में इस वर्ष किसानों ने 20 हजार हेक्टेयर जमीन में आलू की फसल को रोपा है। पिछले साल यह रकबा 21 हजार हेक्टेयर था। इस वर्ष एक हजार हेक्टेयर का रकबा गिर गया है।
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487 रुपये था समर्थन मूल्य
-सरकार की ओर से बीते वर्ष आलू का समर्थन मूल्य 487 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया था, लेकिन इस वर्ष अभी तक सरकार की ओर से समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं किया गया है। किसानों को उम्मीद है कि पिछले वर्ष हुए नुकसान को देखते हुए सरकार इस वर्ष समर्थन मूल्य ज्यादा तय करेगी।
मुख्यमंत्री की पहल से जगी उम्मीद
आलू फसल में चोट खाए किसान को मंत्री समूह से काफी उम्मीदें हैं। किसानों का कहना है कि सरकार के द्वारा बनाए गए मंत्री समूह से होने वाले फायदों के बारे में तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन किसानों के पास सब्र रखने के अलावा है भी क्या। मंत्री समूह के तहत जिले में भी चार सदस्यीय एक समिति बनाई जाएगी। जो 15 दिन में किसानों को होने वाले नुकसान आदि के बारे में शासन को रिपोर्ट करेगी।
शासन स्तर पर मंत्री समूह का गठन हुआ है, अभी जिले में समिति गठित नहीं की गई है। इसके लिए लखनऊ से एक टीम आएगी। इसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
सुरेंद्र राजपूत, प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी
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पिछले वर्ष किसानों को आलू का सही मूल्य नहीं मिला था। इस कारण किसानों ने शीतगृहों से आलू निकालना बंद कर दिया। इसके बाद शीतगृह स्वामियों ने आलू को सड़कों पर फेंकवा दिया था। हर रोज दर्जनों की संख्या में ट्रैक्टर सड़क के किनारे आलू फेंकते नजर आते थे।
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एक हजार हेक्टेयर घटा रकबा
-जिले में इस वर्ष किसानों ने 20 हजार हेक्टेयर जमीन में आलू की फसल को रोपा है। पिछले साल यह रकबा 21 हजार हेक्टेयर था। इस वर्ष एक हजार हेक्टेयर का रकबा गिर गया है।
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487 रुपये था समर्थन मूल्य
-सरकार की ओर से बीते वर्ष आलू का समर्थन मूल्य 487 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया था, लेकिन इस वर्ष अभी तक सरकार की ओर से समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं किया गया है। किसानों को उम्मीद है कि पिछले वर्ष हुए नुकसान को देखते हुए सरकार इस वर्ष समर्थन मूल्य ज्यादा तय करेगी।
मुख्यमंत्री की पहल से जगी उम्मीद
आलू फसल में चोट खाए किसान को मंत्री समूह से काफी उम्मीदें हैं। किसानों का कहना है कि सरकार के द्वारा बनाए गए मंत्री समूह से होने वाले फायदों के बारे में तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन किसानों के पास सब्र रखने के अलावा है भी क्या। मंत्री समूह के तहत जिले में भी चार सदस्यीय एक समिति बनाई जाएगी। जो 15 दिन में किसानों को होने वाले नुकसान आदि के बारे में शासन को रिपोर्ट करेगी।
शासन स्तर पर मंत्री समूह का गठन हुआ है, अभी जिले में समिति गठित नहीं की गई है। इसके लिए लखनऊ से एक टीम आएगी। इसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
सुरेंद्र राजपूत, प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी