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एक साल में भी पूरी नहीं हो सकी मजिस्ट्रेटी जांच
Updated Sun, 31 Dec 2017 11:44 PM IST
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जांच
- फोटो : demo pic
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एटा। उनके चिराग बुझ गए, किसी के जीने की आस खत्म हो गई, लेकिन न्याय आज तक नहीं मिल सका। पिछले साल 19 जनवरी को अलीगंज सड़क हादसे में स्कूली बस-टैंकर की टक्कर में 12 मासूमों समेत 13 लोगों की मौत हुई थी। एक साल होने को आया, मगर आज तक न तो जांच का पता लगा और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का।
घटना को लेकर प्रदेश के मुखिया से लेकर प्रधानमंत्री तक ने शोक जताया था। तत्कालीन डीएम शंभूनाथ ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल में भी जांच पूरी नहीं हो सकी। वहीं मामले को लेकर जन सूचना अधिकार के तहत आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने जेएस विद्या निकेतन की मान्यता, आवेदन और कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी।
जिसे बेसिक शिक्षा विभाग ने दरकिनार कर दिया। इसके साथ ही विभाग ने घटना के बाद निलंबित किए न्याय पंचायत समन्वयक अशोक शाक्य और सह समन्वयक सत्यप्रताप राठौर को भी जांच के बाद बहाल कर दिया। आरटीआई में जब मजिस्ट्रेटी जांच की स्थिति की जानकारी मांगी गई, तो प्रशासन ने इससे भी पल्ला झाड़ लिया।
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अब मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे एडीएम प्रशासन का तबादला हो गया। ऐसे में जांच फिर से लटक गई है। साल तो बीत गया और मासूमों के परिवारों को आसूं दे गया, मगर न्याय की आस एक बार फिर अधूरी रह गई।
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घटना को लेकर प्रदेश के मुखिया से लेकर प्रधानमंत्री तक ने शोक जताया था। तत्कालीन डीएम शंभूनाथ ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल में भी जांच पूरी नहीं हो सकी। वहीं मामले को लेकर जन सूचना अधिकार के तहत आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने जेएस विद्या निकेतन की मान्यता, आवेदन और कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी।
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जिसे बेसिक शिक्षा विभाग ने दरकिनार कर दिया। इसके साथ ही विभाग ने घटना के बाद निलंबित किए न्याय पंचायत समन्वयक अशोक शाक्य और सह समन्वयक सत्यप्रताप राठौर को भी जांच के बाद बहाल कर दिया। आरटीआई में जब मजिस्ट्रेटी जांच की स्थिति की जानकारी मांगी गई, तो प्रशासन ने इससे भी पल्ला झाड़ लिया।
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अब मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे एडीएम प्रशासन का तबादला हो गया। ऐसे में जांच फिर से लटक गई है। साल तो बीत गया और मासूमों के परिवारों को आसूं दे गया, मगर न्याय की आस एक बार फिर अधूरी रह गई।