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हमले के दोषी पिता को सात साल की कैद
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:14 PM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। थाना बेवर के अहंकारीपुर में नौ साल पहले पिता को गोली मारकर जख्मी करने वाले बेटे को एफटीसी द्वितीय के जज ने सात साल की कैद दी है। पांच हजार रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा।
थाना बेवर के अहंकारीपुर निवासी साघौ सिंह का अपने पुत्र हरवीर से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। हरवीर और उसके ससुराल के लोग साधौ सिंह पर जमीन बेचकर हरवीर को रुपया देने का दबाब बना रहे थे।
सात जनवरी 2009 की सुबह आठ बजे साधौ सिंह घर पर थे। तभी हरवीर अपने ससुराल वालों के साथ आ गया। इनके बीच कहासुनी होने लगी। तभी हरवीर न पिता को गोली मार दी। साधौ सिंह ने बेटे हरवीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच के बाद हरवीर के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।
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मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज तैयब अहमद की अदालत में हुई। पुलिस को घटना के सर्मथन में गवाही देने वाले गवाह सुनवाई के दौरान अदालत में गवाही देने से मुकर गए। बाद में साधौ सिंह ने भी अपने पुत्र के खिलाफ गवाही नहीं दी।
पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर एफटीसी द्वितीय के जज ने हरवीर को दोषी पाकर सात साल की सजा सुनाई है। उसको पांच हजार रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा।
हरवीर ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अदालत में आत्म सर्मपण कर दिया। उसने जमानत पाने के लिए आवेदन किया मगर उसकी जमानत मंजूर नहीं हुई। उसको जेल में रहकर ही पूरा मुकदमा लड़ना पड़ा। सजा सुनाए जाने के लिए अदालत में निर्धारित की गई तारीख पर उसको जेल से ही अदालत लाया गया।
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थाना बेवर के अहंकारीपुर निवासी साघौ सिंह का अपने पुत्र हरवीर से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। हरवीर और उसके ससुराल के लोग साधौ सिंह पर जमीन बेचकर हरवीर को रुपया देने का दबाब बना रहे थे।
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सात जनवरी 2009 की सुबह आठ बजे साधौ सिंह घर पर थे। तभी हरवीर अपने ससुराल वालों के साथ आ गया। इनके बीच कहासुनी होने लगी। तभी हरवीर न पिता को गोली मार दी। साधौ सिंह ने बेटे हरवीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच के बाद हरवीर के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।
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मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज तैयब अहमद की अदालत में हुई। पुलिस को घटना के सर्मथन में गवाही देने वाले गवाह सुनवाई के दौरान अदालत में गवाही देने से मुकर गए। बाद में साधौ सिंह ने भी अपने पुत्र के खिलाफ गवाही नहीं दी।
पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर एफटीसी द्वितीय के जज ने हरवीर को दोषी पाकर सात साल की सजा सुनाई है। उसको पांच हजार रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा।
हरवीर ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अदालत में आत्म सर्मपण कर दिया। उसने जमानत पाने के लिए आवेदन किया मगर उसकी जमानत मंजूर नहीं हुई। उसको जेल में रहकर ही पूरा मुकदमा लड़ना पड़ा। सजा सुनाए जाने के लिए अदालत में निर्धारित की गई तारीख पर उसको जेल से ही अदालत लाया गया।