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विवि: बीएससी द्वितीय वर्ष के परिणाम में बदल गए विषय
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:09 PM IST
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एटा। विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ रही है। बीएससी द्वितीय वर्ष के परिणाम में दर्जनों परीक्षार्थियों के विषय बदलने से विद्यार्थियों में रोष है। परेशान छात्र-छात्राएं संशोधन के लिए महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
चरन सिंह महाविद्यालय हरचंदपुर के छात्र राहुल कुमार की शिकायत है कि उसने गणित, भौतिक विज्ञान एवं रसायन विज्ञान विषयों से बीएससी प्रथम वर्ष की परीक्षा पास की। द्वितीय वर्ष की परीक्षा भी अच्छी रही, लेकिन अंकपत्र में विषय बदले हुए हैं। गणित व रसायन विज्ञान के स्थान पर जूलॉजी व बॉटनी विषय दर्शाए गए हैं। इसके चलते उसका रिजल्ट अधूरा ही नहीं त्रुटिपूर्ण भी है।
इस संबंध में महाविद्यालय ने विश्वविद्यालय की कमी बताकर वहां संपर्क करने को कहा है, जबकि विवि प्रशासन इसे कालेज की गलती बताकर शिकायत सुनने को तैयार ही नहीं है। ऐसे में परेशान छात्र कालेज व विवि के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित छात्र ने बताया कि कई चक्कर काटने के बाद भी शिकायत नहीं सुनी जा रही। बता दें कि जिले के महाविद्यालयों के ऐसे सैकड़ों मामले हैं।
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दर्जनों परीक्षार्थियों के रिजल्ट अधूरे एवं त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसी शिकायतों को विश्वविद्यालय प्रेषित किया जा रहा है। इतना ही नहीं उच्च अधिकारियों को मेल व लिखित सूचनाओं से भी अवगत कराया जा रहा है।
-डॉ अनिल कुमार सक्सेना, प्राचार्य जेएलएन पीजी कालेज, एटा
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चरन सिंह महाविद्यालय हरचंदपुर के छात्र राहुल कुमार की शिकायत है कि उसने गणित, भौतिक विज्ञान एवं रसायन विज्ञान विषयों से बीएससी प्रथम वर्ष की परीक्षा पास की। द्वितीय वर्ष की परीक्षा भी अच्छी रही, लेकिन अंकपत्र में विषय बदले हुए हैं। गणित व रसायन विज्ञान के स्थान पर जूलॉजी व बॉटनी विषय दर्शाए गए हैं। इसके चलते उसका रिजल्ट अधूरा ही नहीं त्रुटिपूर्ण भी है।
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इस संबंध में महाविद्यालय ने विश्वविद्यालय की कमी बताकर वहां संपर्क करने को कहा है, जबकि विवि प्रशासन इसे कालेज की गलती बताकर शिकायत सुनने को तैयार ही नहीं है। ऐसे में परेशान छात्र कालेज व विवि के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित छात्र ने बताया कि कई चक्कर काटने के बाद भी शिकायत नहीं सुनी जा रही। बता दें कि जिले के महाविद्यालयों के ऐसे सैकड़ों मामले हैं।
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दर्जनों परीक्षार्थियों के रिजल्ट अधूरे एवं त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसी शिकायतों को विश्वविद्यालय प्रेषित किया जा रहा है। इतना ही नहीं उच्च अधिकारियों को मेल व लिखित सूचनाओं से भी अवगत कराया जा रहा है।
-डॉ अनिल कुमार सक्सेना, प्राचार्य जेएलएन पीजी कालेज, एटा