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आपातकाल की याद कर सिहर उठते हैं लोग
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:21 AM IST
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मथुरा। देश के इतिहास में काले पन्ने के रूप में दर्ज आपातकाल की यादें आज भी लोगों के शरीर में सिहरन पैदा कर देती हैं। इस दौर से गुजरे लोग बताते हैं कि आपातकाल का विरोध करने वालों को पुलिस ने ब्रिटिश हुकूमत के दौरान किए गए अत्याचारों की याद दिला दी थी। इसे 25 जून 1975 को लगाया गया था।
आपातकाल के सरकारी रिकार्ड पर नजर डाले तो जनपद में 200 से ज्यादा लोग आपातकाल का विरोध करने पर जेल गए थे। इनमें से 150 लोग आज भी जीवित हैं। इन्हें राज्य सरकार लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा देकर पेंशन दे रही है। इसमें कन्हैया लाल गुप्ता, बांकेबिहारी माहेश्वरी, किशोरी श्याम, डा.एमपी शर्मा, रामबाबू भाटिया, हरिगुरु, मदन मोहन सराफ, विनोद टेंटीवाल, डा.रमनदास पंड्या, राधाकृष्ण खडेलवाल एड, अरुण प्रकाश मिश्रा, सुरेशकृष्ण चंद्र भार्गव आदि शामिल रहे।
इन्हीं में से एक पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि उस वक्त भय का वातावरण था। लोग सरकार के इस कदम की आलोचना करने से कतराते थे। ऐसा वातावरण था, जैसे ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ करता था। वह बताते हैं कि सादाबाद से विधायक हुए विजेंद्र सिंह को लड़की की शादी के चलते तीन दिन की पैरोल मिली थी।
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पूर्व राज्यमंत्री रविकांत गर्ग ने बताया कि आपातकाल लगने के बाद इसके विरोध की गतिविधियों को भूमिगत होकर अंजाम दिया गया था। लोगों तक सूचनाएं पहुंचाना कठिन हो गया था। पुलिस कार्रवाई का भय बना रहता था।
हिंदूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि इस दौरान जेल गए लोगों को उम्मीद नहीं थी, कि उन्हें कब रिहाई मिलेगी। न वकील की सुनवाई थी, न कोई दलील सुनी जा रही थी।
विजय बहादुर सिंह बताते हैं कि वह कक्षा 11 के छात्र थे। घर से कहकर गए थे कि परीक्षा देने जा रहे हैं, लेकिन कोतवाली रोड पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का हिस्सा बन गए और जेल भेज दिया।
चौधरी योगेंद्र सिंह बताते हैं कि आपातकाल के 42 वर्ष बीत जाने के बाद भी उस मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। जेल जाने से पूर्व पुलिस ने उनके साथियों के साथ लाठी-डंडों से खूब पिटाई की थी। जिसके चलते उनका स्वास्थ्य भी खराब हो गया था। जेल की यादों को जाता करते हुए उन्होंने कहा कि तब जेल में किसी से मिलने भी नहीं दिया जाता था। बताया कि वे सात अगस्त 1975 को जेल गए थे। दो माह 23 दिन जेल में गुजार चुके लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी योगेंद्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा सम्मान पत्र पा चुके हैं।
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आपातकाल के सरकारी रिकार्ड पर नजर डाले तो जनपद में 200 से ज्यादा लोग आपातकाल का विरोध करने पर जेल गए थे। इनमें से 150 लोग आज भी जीवित हैं। इन्हें राज्य सरकार लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा देकर पेंशन दे रही है। इसमें कन्हैया लाल गुप्ता, बांकेबिहारी माहेश्वरी, किशोरी श्याम, डा.एमपी शर्मा, रामबाबू भाटिया, हरिगुरु, मदन मोहन सराफ, विनोद टेंटीवाल, डा.रमनदास पंड्या, राधाकृष्ण खडेलवाल एड, अरुण प्रकाश मिश्रा, सुरेशकृष्ण चंद्र भार्गव आदि शामिल रहे।
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इन्हीं में से एक पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि उस वक्त भय का वातावरण था। लोग सरकार के इस कदम की आलोचना करने से कतराते थे। ऐसा वातावरण था, जैसे ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ करता था। वह बताते हैं कि सादाबाद से विधायक हुए विजेंद्र सिंह को लड़की की शादी के चलते तीन दिन की पैरोल मिली थी।
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पूर्व राज्यमंत्री रविकांत गर्ग ने बताया कि आपातकाल लगने के बाद इसके विरोध की गतिविधियों को भूमिगत होकर अंजाम दिया गया था। लोगों तक सूचनाएं पहुंचाना कठिन हो गया था। पुलिस कार्रवाई का भय बना रहता था।
हिंदूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि इस दौरान जेल गए लोगों को उम्मीद नहीं थी, कि उन्हें कब रिहाई मिलेगी। न वकील की सुनवाई थी, न कोई दलील सुनी जा रही थी।
विजय बहादुर सिंह बताते हैं कि वह कक्षा 11 के छात्र थे। घर से कहकर गए थे कि परीक्षा देने जा रहे हैं, लेकिन कोतवाली रोड पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का हिस्सा बन गए और जेल भेज दिया।
चौधरी योगेंद्र सिंह बताते हैं कि आपातकाल के 42 वर्ष बीत जाने के बाद भी उस मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। जेल जाने से पूर्व पुलिस ने उनके साथियों के साथ लाठी-डंडों से खूब पिटाई की थी। जिसके चलते उनका स्वास्थ्य भी खराब हो गया था। जेल की यादों को जाता करते हुए उन्होंने कहा कि तब जेल में किसी से मिलने भी नहीं दिया जाता था। बताया कि वे सात अगस्त 1975 को जेल गए थे। दो माह 23 दिन जेल में गुजार चुके लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी योगेंद्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा सम्मान पत्र पा चुके हैं।