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हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा 83 कॉलेजों का चिट्ठा

Fri, 15 Apr 2016 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Updated Fri, 15 Apr 2016 02:41 AM IST
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83 college's matter will be placed in front of High Court
हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा 83 कॉलेजों का चिट्ठा - फोटो : Amar Ujala
डा. बीआरए यूनिवर्सिटी के चर्चित फर्जी मार्कशीट प्रकरण में फंसे 83 कालेजों में से अभी तक 56 कालेजों के संचालकों ने एसआईटी को अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। सभी ने सुर से सुर मिलाया है। मैनेजमेंट कोटे से अधिक सीटों पर दाखिला देने के मामले में सभी ने अपनी गर्दन बचाने के लिए तत्कालीन वीसी के एक  आदेश का सहारा लिया है, लेकिन एसआईटी इससे संतुष्ट नहीं है। इस पर कानूनी सलाह ली जा रही है। 
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कालेज संचालकों को यह भी बता दिया गया है कि सीटें बढ़ाने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई ) से कोई अनुमति नहीं ली गई    थी। एसआईटी फिलहाल बीएड में 2004-05 के सत्र में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही है। 25 हजार फर्जी मार्कशीट का यह प्रकरण 2004 से 2009 तक का है। पिछले साल एसआईटी के लखनऊ में दर्ज एफआईआर के तहत 83 कॉलेज संचालकों के बयान दर्ज किए जाने हैं। अभी तक 56 ने दर्ज कराए हैं। शेष ने परीक्षा का हवाला देकर समय मांगा है।
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केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उनसे दो सवाल किए जा रहे हैं। पहला, मैनेजमेंट कोटा मनमानी ढंग से कैसे बढ़ाया गया? कालेजों ने 15 से लेकर 45 फीसदी तक सीटें बढ़ाकर दाखिले किए। दूसरा, 75 फीसदी हाजिरी के बगैर छात्र-छात्राओं की परीक्षा कैसे कराई गई? इस पर सभी कालेज संचालकों ने सिर्फ तत्कालीन वीसी अवतार सिंह कुकला का एक आदेश दिखाया है। इसमें कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर सीटें बढ़ाई जा सकती हैं। बता दें, कुकला का निधन हो चुका है।
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इसके चलते एसआईटी ने तय किया है कि कालेज संचालकों के बयान सहित कालेजों का पूरा चिट्ठा हाईकोर्ट के सामने रखा जाए। इसमें यह भी बताया जाएगा कि एनसीटीई की अनुमति के बगैर छात्र संख्या बढ़ाई गई। बता दें, एसआईटी की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही है।


बंगलूरू लैब भेजे जाएंगे सैंपल
फर्जी मार्कशीट के मामले में गोपनीय चार्ट पर मिले हस्ताक्षरों को यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और लिपिकों के हस्ताक्षर के साथ मिलान कराने के लिए बंगलूरू फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला की परीक्षण की रफ्तार बहुत धीमी है।
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