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जेल में कैदियों के लिए मशीन बना रही है रोज 20 हजार रोटियां
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। जेल में बंदियों और कैदियों को मशीन की बनी रोटियां खाने को मिल रही हैं। यह मशीन प्रतिदिन 20 हजार रोटियां तैयार कर रही है। 15 लाख रुपये में सब्जी काटने, आटा गूंथने की मशीन के अलावा चिमनी लगाकर जेल की रसोई को आधुनिक बनाया है।
जिला जेल में 550 की सापेक्ष तीन गुना बंदी है, जिनकी संख्या करीब 1700 है। बंदी रक्षकों को मिलाकर रोज 20 हजार रोटियों की आवश्यकता होती थी। इन रोटियों को तैयार करने के लिए पांच से छह घंटे लगा करते थे। परंतु जब से जेल की रसोई में रोटी बनाने की मशीन लगाई गई है, तब से जेल की रसोई में खाना बना रहे बंदियों को भी राहत मिली है। दोनों टाइम में समय से तैयार खाना बंदियों को परोसा जाता है।
मशीन से राहत में हैं बंदी, बच रहा समय
छह माह पूर्व जेल की रसोई में बंदियों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी। सब्जी काटना और आटा गूंथने के बाद रोटी बनाने में काफी समय लगता था। पर अब मशीन आटा गूंथकर लोई बनाकर रोटी बना रही है, वहीं सब्जी भी मशीन से कट रही है। गेहूं मशीन से साफ किया जा रहा है। जेल की रसोई की दीवारें काली न हो, इसके लिए धुआं निकालने को इलेक्ट्रानिक चिमनी भी लगाई गई है।
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बच्चों को मिल सकेगा गर्म दूध
महिला बैरक में बच्चों के लिए दूध का इंतजाम भी जेल प्रशासन ने किया है। महिला बैरक के पास से ही चूल्हे की व्यवस्था की गई है। इसकी जिम्मेदारी महिला वार्डन को सौंपी गई है। देररात में बच्चों को गर्म दूध की व्यवस्था से महिला बैरक की बंदियों ने काफी राहत महसूस की है।
मशीन से रोज 20 हजार रोटियां बनाई जा रही हैं। इसके अलावा सब्जी काटने और आटा गूंथने को मशीनें लगाई हैं। रसोई की दीवारें धुएं से काली न हो, इसके लिए इलेक्ट्रानिक चिमनी भी लगाई गई है।
- शैलेंद्र कुमार मैत्रये, जेल अधीक्षक
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जिला जेल में 550 की सापेक्ष तीन गुना बंदी है, जिनकी संख्या करीब 1700 है। बंदी रक्षकों को मिलाकर रोज 20 हजार रोटियों की आवश्यकता होती थी। इन रोटियों को तैयार करने के लिए पांच से छह घंटे लगा करते थे। परंतु जब से जेल की रसोई में रोटी बनाने की मशीन लगाई गई है, तब से जेल की रसोई में खाना बना रहे बंदियों को भी राहत मिली है। दोनों टाइम में समय से तैयार खाना बंदियों को परोसा जाता है।
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मशीन से राहत में हैं बंदी, बच रहा समय
छह माह पूर्व जेल की रसोई में बंदियों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी। सब्जी काटना और आटा गूंथने के बाद रोटी बनाने में काफी समय लगता था। पर अब मशीन आटा गूंथकर लोई बनाकर रोटी बना रही है, वहीं सब्जी भी मशीन से कट रही है। गेहूं मशीन से साफ किया जा रहा है। जेल की रसोई की दीवारें काली न हो, इसके लिए धुआं निकालने को इलेक्ट्रानिक चिमनी भी लगाई गई है।
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बच्चों को मिल सकेगा गर्म दूध
महिला बैरक में बच्चों के लिए दूध का इंतजाम भी जेल प्रशासन ने किया है। महिला बैरक के पास से ही चूल्हे की व्यवस्था की गई है। इसकी जिम्मेदारी महिला वार्डन को सौंपी गई है। देररात में बच्चों को गर्म दूध की व्यवस्था से महिला बैरक की बंदियों ने काफी राहत महसूस की है।
मशीन से रोज 20 हजार रोटियां बनाई जा रही हैं। इसके अलावा सब्जी काटने और आटा गूंथने को मशीनें लगाई हैं। रसोई की दीवारें धुएं से काली न हो, इसके लिए इलेक्ट्रानिक चिमनी भी लगाई गई है।
- शैलेंद्र कुमार मैत्रये, जेल अधीक्षक