{"_id":"5bbe3d29867a55281e3ffad7","slug":"81539194153-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर शौचालय की यही कहानी, न सिर पर छत न टंकी में पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर शौचालय की यही कहानी, न सिर पर छत न टंकी में पानी
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। शासन ने बाकायदा आदर्श शौचालय का एक मॉडल जारी किया था। जिसमें एक पक्की कोठरी, दो पक्के गड्ढे और पानी की टंकी की व्यवस्था की थी। लेकिन जिले के अधिकारियों ने तो इस मॉडल को ताक पर रख दिया। यहां तो शौचालयों में न सिर पर छत है और न ही टंकी में पानी है। ऐसे में आखिर इन शौचालयों का क्या फायदा है।
विकास खंड सुल्तानगंज के गांव तेजपुरा में प्रत्येक शौचालय का यही हाल है। शासन ने जब अधिकारियों पर जिले को खुले में शौच से मुक्त करने का दबाव बनाया तो सभी गांवों में शौचालय का निर्माण शुरू हो गया। तेजपुरा में भी 60 लोगों के खातों में धनराशि भेजकर शौचालय निर्माण शुरू करा दिया गया। पहली किश्त के रूप में छह हजार रुपये की धनराशि भेजी गई। जिससे किसी तरह लोगों को शौचालय की कोठरी तैयारी कर ली। लेकिन रुपयों की कमी के चलते न तो इसमें दरवाजा लग सका है और न ही लिंटर डाला जा सका। इतना ही नहीं अब तक इन शौचालयों में गड्ढों का निर्माण भी नहीं हुआ है। पूरे डेढ़ माह से ये शौचालय अधूरे खड़े हुए हैं, लेकिन किसी को इसकी चिंता नहीं है। जब भी गांव के लोग ग्राम प्रधान से जानकारी करने जाते हैं तो वह कुछ दिनों में किश्त आने की बात कहकर टाल देते हैं। अब तो गांव के लोगों ने भी शौचालय निर्माण पूरा होने की उम्मीद छोड़ दी है।
लोगों की बात
हमें तो लगता था कि केवल हमारे गांव में ही शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। लेकिन अखबार से पता चला कि पूरे जिले का हाल ही कुछ ऐसा है।
किताबश्री।
सरकार को ऐसे शौचालय बनाने का क्या फायदा। जब तक शौचालय निर्माण पूरा नहीं होगा तब तक उनका उपयोग नहीं किया जा सकेगा और ओडीएफ नहीं हो पाएगा।
परवेंद्र सिंह।
अगर दूसरी किश्त आ जाए तो हम लोग एक सप्ताह में अपने शौचालय पूरे कर लें। लेकिन किश्त न आने के चलते जो निर्माण कराया है वह भी खराब हो रहा है।
बद्रीनारायण
अधिकारी केवल उन्हीं गांवों में जाते हैं जहां शौचालय पूरे बने हुए हैं। कभी कोई बड़ा अधिकारी हमारे गांव में तो शौचालय के बारे में जानने के लिए नहीं आया।
विज्ञापन
ब्रह्मानंद।
विज्ञापन
विकास खंड सुल्तानगंज के गांव तेजपुरा में प्रत्येक शौचालय का यही हाल है। शासन ने जब अधिकारियों पर जिले को खुले में शौच से मुक्त करने का दबाव बनाया तो सभी गांवों में शौचालय का निर्माण शुरू हो गया। तेजपुरा में भी 60 लोगों के खातों में धनराशि भेजकर शौचालय निर्माण शुरू करा दिया गया। पहली किश्त के रूप में छह हजार रुपये की धनराशि भेजी गई। जिससे किसी तरह लोगों को शौचालय की कोठरी तैयारी कर ली। लेकिन रुपयों की कमी के चलते न तो इसमें दरवाजा लग सका है और न ही लिंटर डाला जा सका। इतना ही नहीं अब तक इन शौचालयों में गड्ढों का निर्माण भी नहीं हुआ है। पूरे डेढ़ माह से ये शौचालय अधूरे खड़े हुए हैं, लेकिन किसी को इसकी चिंता नहीं है। जब भी गांव के लोग ग्राम प्रधान से जानकारी करने जाते हैं तो वह कुछ दिनों में किश्त आने की बात कहकर टाल देते हैं। अब तो गांव के लोगों ने भी शौचालय निर्माण पूरा होने की उम्मीद छोड़ दी है।
विज्ञापन
लोगों की बात
हमें तो लगता था कि केवल हमारे गांव में ही शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। लेकिन अखबार से पता चला कि पूरे जिले का हाल ही कुछ ऐसा है।
किताबश्री।
सरकार को ऐसे शौचालय बनाने का क्या फायदा। जब तक शौचालय निर्माण पूरा नहीं होगा तब तक उनका उपयोग नहीं किया जा सकेगा और ओडीएफ नहीं हो पाएगा।
परवेंद्र सिंह।
अगर दूसरी किश्त आ जाए तो हम लोग एक सप्ताह में अपने शौचालय पूरे कर लें। लेकिन किश्त न आने के चलते जो निर्माण कराया है वह भी खराब हो रहा है।
बद्रीनारायण
अधिकारी केवल उन्हीं गांवों में जाते हैं जहां शौचालय पूरे बने हुए हैं। कभी कोई बड़ा अधिकारी हमारे गांव में तो शौचालय के बारे में जानने के लिए नहीं आया।
विज्ञापन
ब्रह्मानंद।