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एक तरफ चंद्रोदय, दूसरी तरफ जन्मेंगे श्रीकृष्ण
Updated Sat, 01 Sep 2018 08:25 PM IST
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- फोटो : डेमो
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मथुरा। द्वापर में चंद्रवंशी श्रीकृष्ण के जन्म के समय हुई खगोलीय घटना इस वर्ष भी तीन सितंबर को पुन: घटित होगी। जहां एक ओर आकाश में चंद्रमा का उदय होगा वहीं दूसरी ओर ब्रज में कान्हा का प्राकट्य मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण के जन्म के साथ जुड़ी इस घटना का उल्लेख श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध में भी देखने को मिलता है।
श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति के संस्थापक पंडित अमित भारद्वाज बताते हैं कि प्रतिवर्ष दोनों ही घटनाएं एक साथ घटित होती हैं। इस वर्ष तीन सितंबर को भी अर्धरात्रि में चंद्रमा का उदय होगा। इस दिन चंद्रोदय का समय स्थानीय समयानुसार रात्रि 12 बजकर 5 मिनट रहेगा।
द्वापर में बुधवार को जन्मे थे कान्हा
द्वापर में जब कान्हा का जन्म हुआ, वह दिन बुधवार का रहा। हालांकि इस वर्ष कान्हा सोमवार को जन्म लेंगे। बुध को चंद्रमा का पुत्र माना जाता है। इसी कारण बुधवार को नारायण ने चंद्रमा के वंशज के रूप में बुधवार को ही जन्म लिया।
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द्वापर में रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने का कारण
रोहिणी को चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी व सबसे प्रिय नक्षत्र की संज्ञा दी गई है। इसी के दृष्टिगत कान्हा ने भी रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया। स्पष्ट है कि एक पूर्व नियोजित व व्यवस्थित वातावरण में श्रीहरि विष्णु बालकृष्ण के रूप में अवतरित हुए।
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श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति के संस्थापक पंडित अमित भारद्वाज बताते हैं कि प्रतिवर्ष दोनों ही घटनाएं एक साथ घटित होती हैं। इस वर्ष तीन सितंबर को भी अर्धरात्रि में चंद्रमा का उदय होगा। इस दिन चंद्रोदय का समय स्थानीय समयानुसार रात्रि 12 बजकर 5 मिनट रहेगा।
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द्वापर में बुधवार को जन्मे थे कान्हा
द्वापर में जब कान्हा का जन्म हुआ, वह दिन बुधवार का रहा। हालांकि इस वर्ष कान्हा सोमवार को जन्म लेंगे। बुध को चंद्रमा का पुत्र माना जाता है। इसी कारण बुधवार को नारायण ने चंद्रमा के वंशज के रूप में बुधवार को ही जन्म लिया।
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द्वापर में रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने का कारण
रोहिणी को चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी व सबसे प्रिय नक्षत्र की संज्ञा दी गई है। इसी के दृष्टिगत कान्हा ने भी रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया। स्पष्ट है कि एक पूर्व नियोजित व व्यवस्थित वातावरण में श्रीहरि विष्णु बालकृष्ण के रूप में अवतरित हुए।