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विभाग के पास नहीं हैं पर्याप्त संसाधन
Updated Fri, 13 Apr 2018 11:22 PM IST
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बीटी गंज में दुकानों में लगी आग को बुझाते दमकल।
- फोटो : amarujala
कासगंज।
जनपद में आग से सुरक्षा को संवेदनशीलता नहीं हैं। लोग आग से बचाव के लिए अपने स्तर से इंतजाम करने को प्राथमिकता नहीं देते। लापरवाही के चलते प्रतिवर्ष ही आग की बड़ी घटनाएं होती हैं। जिससे लाखों रुपये की संपत्ति भी जल जाती है।
जनपद आग के मामले में काफी संवेदनशील है। रवी की फसल के सीजन में इन घटनाओं में तेजी से इजाफा होता है। सबसे अधिक आग लगने की घटनाएं अप्रेल व मई के माह में होती हैं। बढ़ती घटनाओं के बाद भी लोग सबक नहीं लेते। ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी पीकर फैक देना, चूल्हे की आग को घूरे पर डाल देना आम बात है। लोगों की थोड़ी लापरवाही आग की बड़ी घटना में बदल जाती है।
शासन भी आग से सुरक्षा को गंभीर नजर नहीं आता। पर्याप्त संसाधन तक उपलब्ध नहीं कराए जाते। जबकि आम लोग भी अपने घरों, प्रतिष्ठानों आदि में आग से बचाव के उपकरण नहीं रखते। जिससे समय रहते आग को बुझाया नहीं जा पाता। जब तक दमकल पहुंचती है काफी बिलंब हो जाता है और आग बढ़ी तबाही के रूप मे ंसामने आ जाती है।
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वर्ष 2015 में 135 घटनाओं में आग से 66.76 लाख की संपत्ति जलकर राख हुई। इनमें 3 लोगों की मौत हो गई। 14 पशु आग में जलकर मर गए। 13 पशु आग से झुलस गए। जबकि वर्ष 2016 में 148 घटनाओं में 90.83 लाख की संपत्ति जल गई। आग की चपेट में आकर 1 व्यक्ति झुलस गया। 13 पशुओं की मौत हो गई। 20 पशु झुलस गए। वर्ष 2017 में भी लगभग 130 घटनाएं हुई, जिनमें 80 लाख रुपये तक की क्षति हुई। वर्ष 2018 में भी आग की कई घटनाएं हो चुकी है। इन घटनाओं में लाखों रुपये का सामान जल चुका है। आधा दर्जन से अधिक लोग आग से झुलस चुके है। आग की घटनाओं में हर साल ही तमाम लोगों के सामने रहने खाने तक का संकट खड़ा हो जाता है।
आग बुझाने को समय से नहीं मिल पाता पानी
कासगंज(ब्यूरो)। आग की घटनाएं होने पर सबसे बड़ी समस्या पानी की रहती है। नगरीय क्षेत्रों में बने हाइडेंट सड़कों के नीचे दफन हो चुके हैं। निकायों ने सड़कों के निर्माण के समय इन हाइडेंटों को पूरी तरह से ढक दिया। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब सूख पड़े रहते हैं।
जर्जर तार भी बनते हैं आग का कारण
कासगंज(ब्यूरो)। आग की घटनाओं में जर्जर तार भी अहम भूमिका निभाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों के ऊपर से जा रही बिजली की लाइनों से लोड पडने पर चिंगारी उठती है। जब यह चिंगारी खड़ी फसल या कटी फसल के ढेर पर गिरती है तो बढ़ी आग का कारण बन जाती है।
सहावर तहसील में पटियाली व कासगंज से होती हैं व्यवस्थाएं
कासगंज(ब्यूरो)। सहावर तहसील में अभी कोई फायर स्टेशन नहीं है। यहां के क्षेत्र में आग की घटना होते पर पटियाली या कासगंज के फायर स्टेशन से ही व्यवस्था की जाती हैं। जब तक दमकल पहुंचती हैं तब तक काफी नुकसान हो जाता है।
आग की घटनाओ से होने वाली क्षति को बचाने के लिए विभाग हमेशा तत्पर रहता है। सूचना मिलने पर गाडिय़ों को भेज कर आग बुझाई जाती है। विभाग ने पिछले साल भी आग से काफी संपत्ति को जलने से बचा लिया। 14 से 20 अप्रेल से अग्रिशमन सप्ताह के अंतर्गत लोगों को आग से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। -आनंद रजनीश, सीएफओ, कासगंज।
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जनपद में आग से सुरक्षा को संवेदनशीलता नहीं हैं। लोग आग से बचाव के लिए अपने स्तर से इंतजाम करने को प्राथमिकता नहीं देते। लापरवाही के चलते प्रतिवर्ष ही आग की बड़ी घटनाएं होती हैं। जिससे लाखों रुपये की संपत्ति भी जल जाती है।
जनपद आग के मामले में काफी संवेदनशील है। रवी की फसल के सीजन में इन घटनाओं में तेजी से इजाफा होता है। सबसे अधिक आग लगने की घटनाएं अप्रेल व मई के माह में होती हैं। बढ़ती घटनाओं के बाद भी लोग सबक नहीं लेते। ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी पीकर फैक देना, चूल्हे की आग को घूरे पर डाल देना आम बात है। लोगों की थोड़ी लापरवाही आग की बड़ी घटना में बदल जाती है।
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शासन भी आग से सुरक्षा को गंभीर नजर नहीं आता। पर्याप्त संसाधन तक उपलब्ध नहीं कराए जाते। जबकि आम लोग भी अपने घरों, प्रतिष्ठानों आदि में आग से बचाव के उपकरण नहीं रखते। जिससे समय रहते आग को बुझाया नहीं जा पाता। जब तक दमकल पहुंचती है काफी बिलंब हो जाता है और आग बढ़ी तबाही के रूप मे ंसामने आ जाती है।
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वर्ष 2015 में 135 घटनाओं में आग से 66.76 लाख की संपत्ति जलकर राख हुई। इनमें 3 लोगों की मौत हो गई। 14 पशु आग में जलकर मर गए। 13 पशु आग से झुलस गए। जबकि वर्ष 2016 में 148 घटनाओं में 90.83 लाख की संपत्ति जल गई। आग की चपेट में आकर 1 व्यक्ति झुलस गया। 13 पशुओं की मौत हो गई। 20 पशु झुलस गए। वर्ष 2017 में भी लगभग 130 घटनाएं हुई, जिनमें 80 लाख रुपये तक की क्षति हुई। वर्ष 2018 में भी आग की कई घटनाएं हो चुकी है। इन घटनाओं में लाखों रुपये का सामान जल चुका है। आधा दर्जन से अधिक लोग आग से झुलस चुके है। आग की घटनाओं में हर साल ही तमाम लोगों के सामने रहने खाने तक का संकट खड़ा हो जाता है।
आग बुझाने को समय से नहीं मिल पाता पानी
कासगंज(ब्यूरो)। आग की घटनाएं होने पर सबसे बड़ी समस्या पानी की रहती है। नगरीय क्षेत्रों में बने हाइडेंट सड़कों के नीचे दफन हो चुके हैं। निकायों ने सड़कों के निर्माण के समय इन हाइडेंटों को पूरी तरह से ढक दिया। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब सूख पड़े रहते हैं।
जर्जर तार भी बनते हैं आग का कारण
कासगंज(ब्यूरो)। आग की घटनाओं में जर्जर तार भी अहम भूमिका निभाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों के ऊपर से जा रही बिजली की लाइनों से लोड पडने पर चिंगारी उठती है। जब यह चिंगारी खड़ी फसल या कटी फसल के ढेर पर गिरती है तो बढ़ी आग का कारण बन जाती है।
सहावर तहसील में पटियाली व कासगंज से होती हैं व्यवस्थाएं
कासगंज(ब्यूरो)। सहावर तहसील में अभी कोई फायर स्टेशन नहीं है। यहां के क्षेत्र में आग की घटना होते पर पटियाली या कासगंज के फायर स्टेशन से ही व्यवस्था की जाती हैं। जब तक दमकल पहुंचती हैं तब तक काफी नुकसान हो जाता है।
आग की घटनाओ से होने वाली क्षति को बचाने के लिए विभाग हमेशा तत्पर रहता है। सूचना मिलने पर गाडिय़ों को भेज कर आग बुझाई जाती है। विभाग ने पिछले साल भी आग से काफी संपत्ति को जलने से बचा लिया। 14 से 20 अप्रेल से अग्रिशमन सप्ताह के अंतर्गत लोगों को आग से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। -आनंद रजनीश, सीएफओ, कासगंज।