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चार चिताओं पर छह शव एक साथ जले, रो उठा चंदरई गांव
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:10 PM IST
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cremation
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद/सिरसागंज। एक हजार से अधिक आबादी वाले गांव चंदरई में सोमवार को सिर्फ चीत्कारें सुनाई दीं। महिलाओं के साथ पुरुषों का रुदन और बच्चों की सिसकियां हादसे का गम बयां कर रही थीं। एक परिवार के छह शवों को चार चिताओं पर मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। हर कोई यही बोला ऐसा तो गांव में कभी नहीं देखा। जो आज देखना पड़ रहा है। चोब सिंह एवं उनकी पत्नी का शव एक चिता पर रामनिवास उर्फ पप्पू के साथ उनकी पत्नी का शव दूसरी चिता पर रखे गए। सतेंद्र तथा रामप्रकाश के शवों की अलग चिताएं लगीं।
सिरसागंज के सोथरा चौराहे पर रविवार की शाम दस चक्का ट्रक के वैगनआर व आटो के ऊपर पलटने से दो महिलाओं, दो बच्चों सहित सात पुरुषों की मौत हुई थी। इनमें छह सिरसागंज के चंदरई गांव और मैनपुरी बरनाहल के चार लोग थे। अधिकारियों ने रात करीब 1.30 बजे तक सभी शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव एंबुलेंस से गांव भेजेे। एसडीएम सिरसागंज चंद्रभानु सिंह और एसएचओ सोमपाल सैनी शवों के साथ पहुंचे तो गांव में महिलाओं का रुदन सुनाई देने लगा।
तड़के करीब तीन बजे से आसपास के ग्रामीणों का आना शुरू हो गया। एक साथ छह शवों को देखकर हर कोई द्रवित था। हादसे का शिकार हुए सतेंद्र की पत्नी तो बिलखते बिलखते सुध-बुध खो बैठी। परिवार की महिलाओं के साथ रिश्तेदारों का जमावड़ा था। गांव में सिर्फ चीत्कारें सुनाई दे रही थीं। रामनिवास उर्फ पप्पू के बेटों रंजीत एवं सुरजीत की हालत खराब थी। उसके मां और पिता दोनों की हादसे में मौत हो गई। रंजीत बेसुध हो गया तो उसे संभालने में ग्रामीण जुटे थे।
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शाम को करीब 4.30 बजे एक साथ सभी छह शवों को उठाया। बेटों के गांव के करीब आने की सूचना मिलते ही शवों को खेत पर ले गए। गांव में चार चिताओं को सजाया। चोब सिंह एवं उनकी पत्नी का शव एक चिता पर रामनिवास उर्फ पप्पू के शव दूसरी चिता पर सतेंद्र तथा रामप्रकाश के शवों की अलग चिताएं लगीं। चार चिताओं पर छह शवों को पंचतत्व में विलीन किया गया तो हर किसी की आंखें नम हो गईं।
हादसे के बाद गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे सोमवार को नहीं जले। हर कोई इस हादसे को सुनकर स्तब्ध था। पड़ोसी गांव के लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने का कार्य कर रहे थे। किसी के गले एक निवाला तक नहीं उतर रहा था।
चंदरई के प्राथमिक स्कूल में शिक्षकों के आने के साथ ही कुछ बच्चे पहुंचे थे। स्कूल प्रांगण में सभी बच्चों को दो मिनट का मौन धारण एवं मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करने के बाद छुट्टी कर दी।
रिटायर्ड फौजी चोब सिंह के दो बेटे सुरजीत और संदीप भी सेना में हैं। सुरजीत बारामूला में है जबकि संदीप की तैनाती लेह लद्दाख में है। भाई, मां एवं पिता सहित छह लोगों की मौत की सूचना मिलते ही दोनों श्रीनगर से दिल्ली तक प्लेन के माध्यम से पहुंचे। वहां से गांव के लिए रवाना हुए।
आस-पास के गांव के ग्रामीण, महिलाएं कोई निजी वाहनों से तो कोई किराए के वाहनों से गांव में पहुंचना शुरू हो गया था। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पास के गांव बलीपुर, नायन, वीरई, नगला तुला, परिहार मऊ, नगला जुला, उरावर, बंजारा गांव के साथ सिरसागंज से भी काफी संख्या में लोग पहुंचे। राधा किशन राजपूत ने घटना पर गहरा दुख जताया।
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सिरसागंज के सोथरा चौराहे पर रविवार की शाम दस चक्का ट्रक के वैगनआर व आटो के ऊपर पलटने से दो महिलाओं, दो बच्चों सहित सात पुरुषों की मौत हुई थी। इनमें छह सिरसागंज के चंदरई गांव और मैनपुरी बरनाहल के चार लोग थे। अधिकारियों ने रात करीब 1.30 बजे तक सभी शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव एंबुलेंस से गांव भेजेे। एसडीएम सिरसागंज चंद्रभानु सिंह और एसएचओ सोमपाल सैनी शवों के साथ पहुंचे तो गांव में महिलाओं का रुदन सुनाई देने लगा।
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तड़के करीब तीन बजे से आसपास के ग्रामीणों का आना शुरू हो गया। एक साथ छह शवों को देखकर हर कोई द्रवित था। हादसे का शिकार हुए सतेंद्र की पत्नी तो बिलखते बिलखते सुध-बुध खो बैठी। परिवार की महिलाओं के साथ रिश्तेदारों का जमावड़ा था। गांव में सिर्फ चीत्कारें सुनाई दे रही थीं। रामनिवास उर्फ पप्पू के बेटों रंजीत एवं सुरजीत की हालत खराब थी। उसके मां और पिता दोनों की हादसे में मौत हो गई। रंजीत बेसुध हो गया तो उसे संभालने में ग्रामीण जुटे थे।
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शाम को करीब 4.30 बजे एक साथ सभी छह शवों को उठाया। बेटों के गांव के करीब आने की सूचना मिलते ही शवों को खेत पर ले गए। गांव में चार चिताओं को सजाया। चोब सिंह एवं उनकी पत्नी का शव एक चिता पर रामनिवास उर्फ पप्पू के शव दूसरी चिता पर सतेंद्र तथा रामप्रकाश के शवों की अलग चिताएं लगीं। चार चिताओं पर छह शवों को पंचतत्व में विलीन किया गया तो हर किसी की आंखें नम हो गईं।
हादसे के बाद गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे सोमवार को नहीं जले। हर कोई इस हादसे को सुनकर स्तब्ध था। पड़ोसी गांव के लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने का कार्य कर रहे थे। किसी के गले एक निवाला तक नहीं उतर रहा था।
चंदरई के प्राथमिक स्कूल में शिक्षकों के आने के साथ ही कुछ बच्चे पहुंचे थे। स्कूल प्रांगण में सभी बच्चों को दो मिनट का मौन धारण एवं मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करने के बाद छुट्टी कर दी।
रिटायर्ड फौजी चोब सिंह के दो बेटे सुरजीत और संदीप भी सेना में हैं। सुरजीत बारामूला में है जबकि संदीप की तैनाती लेह लद्दाख में है। भाई, मां एवं पिता सहित छह लोगों की मौत की सूचना मिलते ही दोनों श्रीनगर से दिल्ली तक प्लेन के माध्यम से पहुंचे। वहां से गांव के लिए रवाना हुए।
आस-पास के गांव के ग्रामीण, महिलाएं कोई निजी वाहनों से तो कोई किराए के वाहनों से गांव में पहुंचना शुरू हो गया था। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पास के गांव बलीपुर, नायन, वीरई, नगला तुला, परिहार मऊ, नगला जुला, उरावर, बंजारा गांव के साथ सिरसागंज से भी काफी संख्या में लोग पहुंचे। राधा किशन राजपूत ने घटना पर गहरा दुख जताया।