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जीएसटी की मार, कपड़ा बाजार बेजार
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:39 PM IST
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जीएसटी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
एटा। जीएसटी की मार से कपड़ा बाजार बेजार हो गया है। आलम यह है कि कपड़े के दामों में हुई बढ़ोतरी से लोग खरीदारी से तौबा कर रहे हैं। वहीं पांच से 18 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। वहीं व्यापारी दीवाली को लेकर तैयार तो हैं, लेकिन बाजार के हाल पर मायूस भी हैं।
दीवाली के त्योहारी सीजन को भुनाने के लिए व्यापारियों ने तैयारियां की हैं। दुकानें माल से भरी पड़ी हैं, लेकिन खरीदने वाले नदारद हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार कपड़ों की बिक्री में 50 फीसदी तक गिरावट आई है।
कपड़ा विक्रेता साबिर मियां का कहना है कि इस बार त्योहारी सीजन पर बिक्री में 15 प्रतिशत गिरावट आई है। कपड़ा व्यापार पहले टैक्स से मुक्त था। जीएसटी के बाद टैक्स के दायरे आने से व्यापार प्रभावित हो गया। बाजार में इस बार त्योहार जैसा माहौल नजर नहीं है।
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रेडीमेड व्यवसायी विनीत भारद्वाज कहते हैं ग्राहक को बिक्री के बाद बार बार रसीद देने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टैक्स की वजह से कपड़ा महंगा हुआ है। रेडीमेड कपड़े पर पांच से 15 प्रतिशत तक टैक्स लगाया गया है। देहात की बिक्री पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कपड़ा व्यापार के लिए सरकार की नीतियां पूरी तरह घातक हैं।
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दीवाली के त्योहारी सीजन को भुनाने के लिए व्यापारियों ने तैयारियां की हैं। दुकानें माल से भरी पड़ी हैं, लेकिन खरीदने वाले नदारद हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार कपड़ों की बिक्री में 50 फीसदी तक गिरावट आई है।
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कपड़ा विक्रेता साबिर मियां का कहना है कि इस बार त्योहारी सीजन पर बिक्री में 15 प्रतिशत गिरावट आई है। कपड़ा व्यापार पहले टैक्स से मुक्त था। जीएसटी के बाद टैक्स के दायरे आने से व्यापार प्रभावित हो गया। बाजार में इस बार त्योहार जैसा माहौल नजर नहीं है।
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रेडीमेड व्यवसायी विनीत भारद्वाज कहते हैं ग्राहक को बिक्री के बाद बार बार रसीद देने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टैक्स की वजह से कपड़ा महंगा हुआ है। रेडीमेड कपड़े पर पांच से 15 प्रतिशत तक टैक्स लगाया गया है। देहात की बिक्री पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कपड़ा व्यापार के लिए सरकार की नीतियां पूरी तरह घातक हैं।