{"_id":"5974ec344f1c1bf6618b46a0","slug":"81500834868-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आजादी के दिन ही सजा था बांकेबिहारी का हिंडोला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आजादी के दिन ही सजा था बांकेबिहारी का हिंडोला
Updated Mon, 24 Jul 2017 12:29 AM IST
विज्ञापन
सोने का पालना
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृंदावन (मथुरा)। जिस दिन देश आजाद हुआ उसी दिन पहली बार ठा. बंाकेबिहारी महाराज ने स्वर्ण रजत हिंडोले में दर्शन दिए। 15 अगस्त 1947 को हरियाली तीज का भी पावन पर्व था।
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत ब्रजकिशोर गोस्वामी ने बताया कि सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय भक्त लाला हरगुलाल ने इसका निर्माण शुरू कराया था।
बनारस के कारीगर छोटेलाल और ललन भाई के निर्देशन में 20 कारीगरों ने 5 वर्ष में इसे तैयार किया। एक लाख तोले चांदी एवं 22 सौ तोले सोना के अलावा शीशम की लकड़ी से यह बना है। यह फोल्डिंग है। इसकी उस समय लागत करीब 25 लाख रुपये थी।
विज्ञापन
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत ब्रजकिशोर गोस्वामी ने बताया कि सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय भक्त लाला हरगुलाल ने इसका निर्माण शुरू कराया था।
बनारस के कारीगर छोटेलाल और ललन भाई के निर्देशन में 20 कारीगरों ने 5 वर्ष में इसे तैयार किया। एक लाख तोले चांदी एवं 22 सौ तोले सोना के अलावा शीशम की लकड़ी से यह बना है। यह फोल्डिंग है। इसकी उस समय लागत करीब 25 लाख रुपये थी।
विज्ञापन