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अस्पताल को खुद इलाज की दरकार
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:47 PM IST
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अस्पताल का अल्ट्रासांउउ कक्ष
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में हर रोज सैकड़ों मरीज उपचार कराने जाते हैं लेकिन यहां असुविधाओं का ढेर लगा है। जिला अस्पताल में मात्र एक ही सर्जन की तैनाती है जबकि दो होने चाहिए। ऐसे में सामान्य रोगियों को भी सर्जरी के लिए बाहर रेफर किया जाता है। पैथोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मेडिकोलीगल के मामलों में पीड़ित और पुलिस को फीरोजाबाद जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन, टीएमटी मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन है लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के चलते इनकी सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। वहीं जिला महिला अस्पताल की बात करें तो महिला अस्पताल के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से 100 पलंग की महिला विंग भी बनवाई गई है। जिसमें व्यवस्था पुराने अस्पताल लायक भी नहीं है। अस्पताल में सिर्फ एक महिला चिकित्सक की ही स्थायी तैनाती है।
वहीं सीएमएस डॉ. हरिदत्त नेमी बेहोशी के डाक्टर हैं। यह सीएमएस के कार्य के अलावा वह रोगियों को भी देखते हैं। वहीं संविदा पर तैनात डॉ. नीतू, डॉ. सपना चौहान, डॉ. शैलजा से रोगियों को इलाज दिलाया जा रहा है। वहीं हफ्ते में एक दिन इन डाक्टरों में से ही एक को सीएचसी या पीएचसी पर बैठना पड़ता है। वहीं महिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते एक डाक्टर एक दिन में 200 से लेकर 300 मरीज देखता है। इससे डाक्टर और रोगी दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। सर्जन न होने के चलते अधिकांश प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को सीजेरियन आपरेशन के लिए बाहर रेफर किया जाता है।
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एक वर्ष से खराब पड़ी हैं कई मशीन
जिला अस्पताल में ब्लड शुगर, ब्लड यूरिया, सीरम क्रेटिनन, कोलिस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, सीरम ब्लूबिरिन, एसजीओटी, एसजीपीटी, सीरम कैलिश्यम आदि जांचों के लिए रोगियों को भटकना पड़ रहा है। कारण, एक वर्ष से पैथोलॉजी में एनेलॉइजर का खराब होना है।
सीएमओ डॉ. एसके वर्मा का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों और शासन को कई बार लिखा लिखा गया है। शासन से आश्वासन भी मिला है। शीघ्र ही चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन, टीएमटी मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन है लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के चलते इनकी सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। वहीं जिला महिला अस्पताल की बात करें तो महिला अस्पताल के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से 100 पलंग की महिला विंग भी बनवाई गई है। जिसमें व्यवस्था पुराने अस्पताल लायक भी नहीं है। अस्पताल में सिर्फ एक महिला चिकित्सक की ही स्थायी तैनाती है।
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वहीं सीएमएस डॉ. हरिदत्त नेमी बेहोशी के डाक्टर हैं। यह सीएमएस के कार्य के अलावा वह रोगियों को भी देखते हैं। वहीं संविदा पर तैनात डॉ. नीतू, डॉ. सपना चौहान, डॉ. शैलजा से रोगियों को इलाज दिलाया जा रहा है। वहीं हफ्ते में एक दिन इन डाक्टरों में से ही एक को सीएचसी या पीएचसी पर बैठना पड़ता है। वहीं महिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते एक डाक्टर एक दिन में 200 से लेकर 300 मरीज देखता है। इससे डाक्टर और रोगी दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। सर्जन न होने के चलते अधिकांश प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को सीजेरियन आपरेशन के लिए बाहर रेफर किया जाता है।
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एक वर्ष से खराब पड़ी हैं कई मशीन
जिला अस्पताल में ब्लड शुगर, ब्लड यूरिया, सीरम क्रेटिनन, कोलिस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, सीरम ब्लूबिरिन, एसजीओटी, एसजीपीटी, सीरम कैलिश्यम आदि जांचों के लिए रोगियों को भटकना पड़ रहा है। कारण, एक वर्ष से पैथोलॉजी में एनेलॉइजर का खराब होना है।
सीएमओ डॉ. एसके वर्मा का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों और शासन को कई बार लिखा लिखा गया है। शासन से आश्वासन भी मिला है। शीघ्र ही चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।