{"_id":"5970e4994f1c1b897e8b4656","slug":"81500570777-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीस लाख आबादी में कोई नहीं है ‘बापू’ से प्रेरित!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीस लाख आबादी में कोई नहीं है ‘बापू’ से प्रेरित!
Updated Thu, 20 Jul 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
पेंसिल का चित्र
- फोटो : telegraphindia
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। बीस लाख आबादी वाले जिले में पिछले 21 दिनों में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला जो राष्ट्रपिता के नाम ढाई आखर लिख कर बता सके कि वो बापू से क्यों प्रेरित हैं। इसे विभागीय लापरवाही कहें या लोगों की बेरुखी लेकिन यह सत्य है। यह हम नहीं बल्कि डाक विभाग के आंकड़े गवाही दे रहे हैं। डाक विभाग द्वारा अखिल भारतीय प्रतियोगिता ‘ढाई आखर’ के प्रचार में रुचि नहीं दिखाने से 21 दिन बाद भी स्पर्धा का पत्र डाकघरों और शिक्षा विभाग तक नहीं पहुंच पाया है।
जी हां देश को आजादी दिलाने के साथ विश्व को शांति और अहिंसा का संदेश देने वाले बापू से प्रेम करने वाला कोई नहीं। यह हम नहीं डाक विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में बापू से कोई प्रेरित नहीं है।
बता दे कि डाक विभाग ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (बापू) की याद में एक जुलाई को अखिल भारतीय पत्र लेखन प्रतियोगिता ढाई आखर का शुभारंभ किया था। यह प्रतियोगिता 31 अगस्त तक चलाई जाएगी। हैरानी की बात यह है कि पिछले 21 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन बीस लाख की आबादी वाले जिले में एक शख्स ने भी बापू के नाम एक पत्र नहीं भेजा है।
विज्ञापन
प्रचार-प्रचार तक नहीं किया
डाक विभाग की लापरवाही से प्रतियोगिता का प्रचार तो दूर आदेश का पत्र जिले के सभी डाकघरों तक नहीं पहुंचाया गया। विभागीय अधिकारियों ने स्कूलों और कॉलेजों में प्रतियोगिता का प्रसार नहीं किया है। जबकि पत्र में ‘ढाई आखर’ का प्रचार स्कूलों और कॉलेजों में के आदेश दिए गए थे। पत्र नहीं मिलने के कारण शिक्षा विभाग के अफसरों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है। एसपीओ एसआर दुबे ने कहा प्रतियोगिता के लिए 31 अगस्त तक कोई भी शख्स पत्र भेज सकता है।
बाबू के नाम चिट्ठी लिख लेटर बॉक्स में डालें
राष्ट्रपिता के नाम हिंदी या अंग्रेजी किसी भाषा में पत्र लिख कर लेटर बॉक्स में कोई शख्स डाल सकता है। पत्र 500 से 1000 शब्दों के बीच लिखना है। पत्र में सिर्फ यह बताना है कि बापू उन्हें क्यों प्रेरित करते हैं।
ढाई आखर प्रतियोगिता का उद्देश्य
डाक विभाग द्वारा प्रतियोगिता आयोजन का मुख्य उद्देश्य बापू की सत्य, अहिंसा, शांति की नीति को विरासत के रुप में मौजूदा पीढ़ी के माध्यम से अगली तक पहुंचाना है। इसके चलते देशभर के सभी डाकघरों से पत्र मंगवाए गए हैं।
विज्ञापन
जी हां देश को आजादी दिलाने के साथ विश्व को शांति और अहिंसा का संदेश देने वाले बापू से प्रेम करने वाला कोई नहीं। यह हम नहीं डाक विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में बापू से कोई प्रेरित नहीं है।
विज्ञापन
बता दे कि डाक विभाग ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (बापू) की याद में एक जुलाई को अखिल भारतीय पत्र लेखन प्रतियोगिता ढाई आखर का शुभारंभ किया था। यह प्रतियोगिता 31 अगस्त तक चलाई जाएगी। हैरानी की बात यह है कि पिछले 21 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन बीस लाख की आबादी वाले जिले में एक शख्स ने भी बापू के नाम एक पत्र नहीं भेजा है।
विज्ञापन
प्रचार-प्रचार तक नहीं किया
डाक विभाग की लापरवाही से प्रतियोगिता का प्रचार तो दूर आदेश का पत्र जिले के सभी डाकघरों तक नहीं पहुंचाया गया। विभागीय अधिकारियों ने स्कूलों और कॉलेजों में प्रतियोगिता का प्रसार नहीं किया है। जबकि पत्र में ‘ढाई आखर’ का प्रचार स्कूलों और कॉलेजों में के आदेश दिए गए थे। पत्र नहीं मिलने के कारण शिक्षा विभाग के अफसरों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है। एसपीओ एसआर दुबे ने कहा प्रतियोगिता के लिए 31 अगस्त तक कोई भी शख्स पत्र भेज सकता है।
बाबू के नाम चिट्ठी लिख लेटर बॉक्स में डालें
राष्ट्रपिता के नाम हिंदी या अंग्रेजी किसी भाषा में पत्र लिख कर लेटर बॉक्स में कोई शख्स डाल सकता है। पत्र 500 से 1000 शब्दों के बीच लिखना है। पत्र में सिर्फ यह बताना है कि बापू उन्हें क्यों प्रेरित करते हैं।
ढाई आखर प्रतियोगिता का उद्देश्य
डाक विभाग द्वारा प्रतियोगिता आयोजन का मुख्य उद्देश्य बापू की सत्य, अहिंसा, शांति की नीति को विरासत के रुप में मौजूदा पीढ़ी के माध्यम से अगली तक पहुंचाना है। इसके चलते देशभर के सभी डाकघरों से पत्र मंगवाए गए हैं।