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बंदरों से बचकर रहिए, अस्पताल में इंजेक्शन नहीं है
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बंदर
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मथुरा। इन दिनों बंदरों से जरा दूर ही रहिए। अगर उसने काट लिया तो इंजेक्शन लग नहीं पाएगा। जिला अस्पताल में तो इंजेक्शन नहीं होने का बोर्ड भी लगा दिया गया है। कुत्ता और बंदर के हमले से घायल लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं मगर निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। या फिर मजबूर लोग प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन कुत्ते-बंदर काटे जाने के 100 से 150 मरीज पहुंच रहें हैं लेकिन इंजेक्शन न होने के कारण वह लौट जाते हैं। बृहस्पतिवार को इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे भहाई गांव निवासी भाव सिंह व लक्ष्मी नगर निवासी चिम्मन लाल को भी लौटना पड़ा।
ऐसा ही हाल वृंदावन स्थित संयुक्त चिकित्सालय का है, यहां आए गौतम पाड़ा निवासी विपिन गौतम के भी इंजेक्शन नहीं लग सका। फिलहाल 2000 व 1200 के ऑर्डर भी लंबित हैं।
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पिछले दो माह से इंजेक्शन नहीं है। अब तो कंपनी का कोई भुगतान भी बाकी नहीं है, लेकिन फिर भी आपूर्ति नहीं मिल सकी है। कई बार रिमांइडर भी भेजा गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
राजीव गोयल, चीफ फार्मासिस्ट
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन कुत्ते-बंदर काटे जाने के 100 से 150 मरीज पहुंच रहें हैं लेकिन इंजेक्शन न होने के कारण वह लौट जाते हैं। बृहस्पतिवार को इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे भहाई गांव निवासी भाव सिंह व लक्ष्मी नगर निवासी चिम्मन लाल को भी लौटना पड़ा।
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ऐसा ही हाल वृंदावन स्थित संयुक्त चिकित्सालय का है, यहां आए गौतम पाड़ा निवासी विपिन गौतम के भी इंजेक्शन नहीं लग सका। फिलहाल 2000 व 1200 के ऑर्डर भी लंबित हैं।
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पिछले दो माह से इंजेक्शन नहीं है। अब तो कंपनी का कोई भुगतान भी बाकी नहीं है, लेकिन फिर भी आपूर्ति नहीं मिल सकी है। कई बार रिमांइडर भी भेजा गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
राजीव गोयल, चीफ फार्मासिस्ट