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देववाणी में पारंगत होंगे बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:36 PM IST
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मैनपुरी। भारत का इतिहास रही देववाणी आज अपने देश में ही पराई हो चली है। न तो शिक्षकों को इसका ज्ञान है और न ही बच्चों को। शासन ने देववाणी कही जाने वाली संस्कृत भाषा से बच्चों को वाकिफ कराने के लिए परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को इसमें पारंगत करने के आदेश दिए हैं। आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है।
जिले में 2186 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें संस्कृत की शिक्षा तो अब समाप्त ही हो चुकी है। एक बार फिर से संस्कृत भाषा में जान फूंकने के लिए शासन ने एक पहल की है। इसके लिए जिले के 100 शिक्षकों को संस्कृत का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन ने इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर दिया है। शिक्षकों को संस्कृत के पारंगत प्रशिक्षकों द्वारा पांच-पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें शिक्षकों को संस्कृत की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।
इसके बाद ये शिक्षक आकर विद्यालयों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों का चयन कर सूची तैयार कर ली है। जल्द ही ये प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि शासन की पहल बेहतर है, इससे संस्कृत का बढ़ावा को मिल सकेगा।
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जिले में 2186 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें संस्कृत की शिक्षा तो अब समाप्त ही हो चुकी है। एक बार फिर से संस्कृत भाषा में जान फूंकने के लिए शासन ने एक पहल की है। इसके लिए जिले के 100 शिक्षकों को संस्कृत का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन ने इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर दिया है। शिक्षकों को संस्कृत के पारंगत प्रशिक्षकों द्वारा पांच-पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें शिक्षकों को संस्कृत की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।
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इसके बाद ये शिक्षक आकर विद्यालयों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों का चयन कर सूची तैयार कर ली है। जल्द ही ये प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि शासन की पहल बेहतर है, इससे संस्कृत का बढ़ावा को मिल सकेगा।
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