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जनपद में भी चल रहा फर्जी टिकटों का खेल
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:52 PM IST
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एटा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की रोडवेज बसों में फर्जी टिकट का खेल एटा में भी चल रहा है। कई बार रोडवेज बसों में फर्जी टिकट बांटने के मामले सामने आ चुके हैं। विगत दिनों एटा-अलीगंज मार्ग पर 13 यात्रियों को फर्जी टिकट बांटे गए थे, लेकिन मामले में अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। मंगलवार को अलीगढ़ और मथुरा में एसटीएफ की छापेमारी के बाद जिले के निगम अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
जिले में भी रोडवेज को चूना लगाने के लिए फर्जी टिकट का बड़ा खेल चल रहा है। पिछले दिनों एटा-अलीगंज मार्ग पर फर्जी टिकट का मामला सामने आ चुका है। परिचालक ने यात्रियों को टिकट नहीं दिया। यात्री ने विरोध किया तो उनको डुप्लीकेट टिकट पकड़ा दी गई। इस टिकट पर न तो डिपो का नाम था और न ही यात्रा करने वाले स्थान की दूरी का जिक्र था।
इसके साथ ही टिकट पर किराये की रकम भी हाथ से अंकित की गई थी। साथ ही जैथरा में 13 यात्रियों को फर्जी टिकट थमाने का मामला सामने आया था। इसके बाद अधिकारियों ने मामले में जांच की औपचारिकता पूरी की लेकिन कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। अब मथुरा-अलीगढ़ में हुई एसटीएफ की कार्रवाई से अधिकारियों के होश फाख्ता हैं।
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पुराने मामलों पर भी डाला पर्दा
परिवहन निगम में आए दिन नए-नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अफसर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। रोडवेज परिचालकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर चेकिंग टीमों की सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के मामले में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
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जिले में भी रोडवेज को चूना लगाने के लिए फर्जी टिकट का बड़ा खेल चल रहा है। पिछले दिनों एटा-अलीगंज मार्ग पर फर्जी टिकट का मामला सामने आ चुका है। परिचालक ने यात्रियों को टिकट नहीं दिया। यात्री ने विरोध किया तो उनको डुप्लीकेट टिकट पकड़ा दी गई। इस टिकट पर न तो डिपो का नाम था और न ही यात्रा करने वाले स्थान की दूरी का जिक्र था।
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इसके साथ ही टिकट पर किराये की रकम भी हाथ से अंकित की गई थी। साथ ही जैथरा में 13 यात्रियों को फर्जी टिकट थमाने का मामला सामने आया था। इसके बाद अधिकारियों ने मामले में जांच की औपचारिकता पूरी की लेकिन कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। अब मथुरा-अलीगढ़ में हुई एसटीएफ की कार्रवाई से अधिकारियों के होश फाख्ता हैं।
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पुराने मामलों पर भी डाला पर्दा
परिवहन निगम में आए दिन नए-नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अफसर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। रोडवेज परिचालकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर चेकिंग टीमों की सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के मामले में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।