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सड़कों के किनारे बना दिए डलाबघर
Updated Mon, 04 Jun 2018 11:50 PM IST
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कूड़ा
- फोटो : file photo
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एटा। कूड़ा, गंदगी और बदबू। ये तीनों शहर की पहचान बन चुके हैं। जिम्मेदार बेपरवाह हैं, लेकिन शहर पर बदसूरती से बदनाम होता जा रहा है। शहर में कूड़ा निस्तारण का कोई बंदोबस्त नहीं होने से बीमारियां तो बढ़ ही रही हैं, लेकिन बाहरी जिलों में भी एटा की पहचान को बट्टा लग रहा है। आलम यह हो चला है कि जीटी रोड बना शहर का एकमात्र डलाबघर अतिथियों के मन पर अच्छी छाप नहीं छोड़ रहा है। इसके चलते शहर बदसूरत शहरों की फेहरिस्त में शामिल हंो रहा है। पढ़िए रिपोर्ट.....
कूड़े का अंबार देख होती है बेचैनी
शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले जीटी रोड के जरिये अलीगढ़ और कासगंज से आते समय कूड़े के ढेर से अतिथि का सबसे पहले सामना होता है। वहीं जीटी रोड पर गौशाला और सैनिक पड़ाव में सड़क किनारे कूड़ा डाला जाता है। पालिका इन जगहों पर पूरे शहर के कूड़े को इकट्ठा करती है। आलम यह है कि पालिका के इन डलावघर पर कोई इंतजाम नहीं होने से कूड़े का अंबार देख अतिथियों के मन में घृणा भरी बेचैनी होती है। पालिका के डलावघर पर रोज सैकड़ों टन कूड़ा डाला जाता है। मगर पालिका के कर्मचारी कूड़े को सड़क के किनारे ही डाल देते हैं। आलम यह है कि दोपहर के वक्त हवा चलने पर कूड़ा उड़ता हुआ शहर में ही आ जाता है।
अधर में लटका कूड़ा निस्तारण प्लांट
शहर में कूड़े का निस्तारण करने के लिए प्रशासन ने पिछले साल कूड़ा निस्तारण प्लांट का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए कासगंज रोड पर 29 हेक्टेयर भूमि का चयन करके शासन को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से प्लांट का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
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कहते हैं लोग
शहर के जीटी रोड पर बना डलाबघर सच में गलत है। शहर में घुसते ही गंदगी देख मन विचलित हो जाता है।
कौशलेंद्र कुमार
पालिका और प्रशासन को कूड़ा डालने के लिए शहर से दूर कहीं व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि शहर की सुंदर छवि अतिथि लेकर जाए।
गणेश वार्ष्णेय
शहर के जीटी रोड पर लगने वाला कूड़े का अंबार एक बदनुमा दाग बनता जा रहा है। इससे शहर की छवि बिगड़ रही है।
बृजेश कुमार
पालिका को डलावघरों को लेकर इंतजाम करने चाहिए। पूरे शहर में गंदगी और कूड़े का आलम बीमारियां बढ़ा रहा है।
मनोज कुमार
कहते हैं आंकड़े
200 टन कूड़ा डाला है प्रतिदिन
03 स्थानों पर सड़क किनारे बने डलाबघर
2017 में तैयार हुआ था कूड़ा निस्तारण का प्रस्ताव
29 हेक्टेयर भूमि का किया गया था चयन
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कूड़े का अंबार देख होती है बेचैनी
शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले जीटी रोड के जरिये अलीगढ़ और कासगंज से आते समय कूड़े के ढेर से अतिथि का सबसे पहले सामना होता है। वहीं जीटी रोड पर गौशाला और सैनिक पड़ाव में सड़क किनारे कूड़ा डाला जाता है। पालिका इन जगहों पर पूरे शहर के कूड़े को इकट्ठा करती है। आलम यह है कि पालिका के इन डलावघर पर कोई इंतजाम नहीं होने से कूड़े का अंबार देख अतिथियों के मन में घृणा भरी बेचैनी होती है। पालिका के डलावघर पर रोज सैकड़ों टन कूड़ा डाला जाता है। मगर पालिका के कर्मचारी कूड़े को सड़क के किनारे ही डाल देते हैं। आलम यह है कि दोपहर के वक्त हवा चलने पर कूड़ा उड़ता हुआ शहर में ही आ जाता है।
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अधर में लटका कूड़ा निस्तारण प्लांट
शहर में कूड़े का निस्तारण करने के लिए प्रशासन ने पिछले साल कूड़ा निस्तारण प्लांट का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए कासगंज रोड पर 29 हेक्टेयर भूमि का चयन करके शासन को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से प्लांट का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
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कहते हैं लोग
शहर के जीटी रोड पर बना डलाबघर सच में गलत है। शहर में घुसते ही गंदगी देख मन विचलित हो जाता है।
कौशलेंद्र कुमार
पालिका और प्रशासन को कूड़ा डालने के लिए शहर से दूर कहीं व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि शहर की सुंदर छवि अतिथि लेकर जाए।
गणेश वार्ष्णेय
शहर के जीटी रोड पर लगने वाला कूड़े का अंबार एक बदनुमा दाग बनता जा रहा है। इससे शहर की छवि बिगड़ रही है।
बृजेश कुमार
पालिका को डलावघरों को लेकर इंतजाम करने चाहिए। पूरे शहर में गंदगी और कूड़े का आलम बीमारियां बढ़ा रहा है।
मनोज कुमार
कहते हैं आंकड़े
200 टन कूड़ा डाला है प्रतिदिन
03 स्थानों पर सड़क किनारे बने डलाबघर
2017 में तैयार हुआ था कूड़ा निस्तारण का प्रस्ताव
29 हेक्टेयर भूमि का किया गया था चयन