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पूर्व बीएसए पर 25 हजार का जुर्माना
Updated Sun, 08 Apr 2018 06:52 PM IST
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मैनपुरी (किशनी)। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत समय से सूचना उपलब्ध न कराने पर पूर्व बीएसए पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के रजिस्ट्रार ने जिलाधिकारी को एक पत्र भेजकर पूर्व बीएसए के वेतन से तीन किस्तों में जुर्माना राशि काटने का कहा है। वर्तमान में उनकी तैनाती एनसीआरटी लखनऊ में विधि अधिकारी के रूप में है।
वर्ष 2015 में जनपद के गांव कुन्हूपुर निवासी सतीश कुमार ने तत्कालीन बीएसए प्रदीप कुमार से जन सूचना अधिकारी अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी। बीएसए द्वारा समय से सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इस मामले में सतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में रिट दायर की। 15 नवंबर 2016 को तत्कालीन सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने पूर्व बीएसए प्रदीप कुमार को समय से सूचना न देने का दोषी मानते हुए 25 हजार का जुर्माना तय करते हुए पूर्व बीएसए से अपना पक्ष रखने को कहा है।
पूर्व बीएसए की तरफ से एबीआरसी रावेंद्र कुमार शर्मा ने आयोग को बताया कि संबंधित को सारी सूचनाएं उपलब्ध करा दी गई हैं, लेकिन इस संबंध में वे आयोग को जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा पाए। आयोग ने पूर्व बीएसए को समय से सूचना न पहुंचाने का दोषी मानते हुए तथा विभाग द्वारा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध न कराने पर 25 हजार का जुर्माना तय किया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश सूचना आयोग की तरफ से जिलाधिकारी के नाम एक पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि बीएसए प्रदीप कुमार से इस धनराशि की वसूली तीन किस्तों में की जाए। इस संबंध में जिला कोषाधिकारी को भी एक पत्र भेजा गया है।
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वर्ष 2015 में जनपद के गांव कुन्हूपुर निवासी सतीश कुमार ने तत्कालीन बीएसए प्रदीप कुमार से जन सूचना अधिकारी अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी। बीएसए द्वारा समय से सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इस मामले में सतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में रिट दायर की। 15 नवंबर 2016 को तत्कालीन सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने पूर्व बीएसए प्रदीप कुमार को समय से सूचना न देने का दोषी मानते हुए 25 हजार का जुर्माना तय करते हुए पूर्व बीएसए से अपना पक्ष रखने को कहा है।
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पूर्व बीएसए की तरफ से एबीआरसी रावेंद्र कुमार शर्मा ने आयोग को बताया कि संबंधित को सारी सूचनाएं उपलब्ध करा दी गई हैं, लेकिन इस संबंध में वे आयोग को जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा पाए। आयोग ने पूर्व बीएसए को समय से सूचना न पहुंचाने का दोषी मानते हुए तथा विभाग द्वारा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध न कराने पर 25 हजार का जुर्माना तय किया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश सूचना आयोग की तरफ से जिलाधिकारी के नाम एक पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि बीएसए प्रदीप कुमार से इस धनराशि की वसूली तीन किस्तों में की जाए। इस संबंध में जिला कोषाधिकारी को भी एक पत्र भेजा गया है।
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