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नृत्य और भाव के संगम से सजा ‘भावांजलि महोत्सव’
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मंच पर नृत्य करती कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा। नृत्य और भावों के संगम से सजे ‘भावांजलि महोत्सव’ में सोमवार को कथक नृत्य के पुरोधा रहे पंडित दुर्गा लाल को कलाकारों ने भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। मौका था पंडित दुर्गा लाल की स्मृति में सामविद सोसाइटी मुंबई और कलावृक्ष कथक केंद्र मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘भावांजलि महोत्सव’ का। जीएलए विश्वविद्यालय में हुए इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री चित्रकार कृष्णा कन्हाई व कथक नृत्य की गुरु उमा डोगरा और यश भारती से सम्मानित गीतांजलि शर्मा ने दीप जलाकर किया।
इस मौके पर पंडित दुर्गा लाल की शार्गिद रहीं कथक नृत्यांगना गुरु उमा डोगरा ने पंडित जी के प्रेरक जीवन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पंडित दुर्गा लाल कथक नृत्य जगत में एक बहुत बड़ी शख्सियत थे। उनके नृत्य में ऐसी चमक और तेजी थी कि उन्होंने कम उम्र में ही बड़ी ख्याति पा ली थी। महज 36 साल की उम्र में उन्हें संगीत नाटक अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
उधर, महोत्सव में पहली प्रस्तुति मुंबई से आईं भरतनाट्यम नृत्यांगना स्निग्धा मेनन ने दी। स्निग्धा ने श्रीगणेश की स्तुति के बाद पंडित जयदेव द्वारा रचित अष्टपदी पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद नृत्यांगना गीतांजलि शर्मा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने पंचाक्षर शिव स्त्रोत और तीन ताल में बंदिश के बाद अपनी गुरु उमा डोगरा द्वारा धमार ताल में रचित रचना पर सुंदर प्रस्तुति दी।
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महोत्सव के अंत में ओडिसी नृत्य की मशहूर गुरु शुभद्रा वराडकर ने रामायण के प्रसंग जटायु मोक्ष का मंचन किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति मनमोहक रही। कार्यक्रम में चंदन पांडेय, मोहित शर्मा, रश्मि शर्मा, निहारिका सिंह, कुसुम कन्हाई, अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी, माधव आचार्य, दीपिका दीक्षित, कुणाल दीक्षित आदि उपस्थित रहे।
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इस मौके पर पंडित दुर्गा लाल की शार्गिद रहीं कथक नृत्यांगना गुरु उमा डोगरा ने पंडित जी के प्रेरक जीवन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पंडित दुर्गा लाल कथक नृत्य जगत में एक बहुत बड़ी शख्सियत थे। उनके नृत्य में ऐसी चमक और तेजी थी कि उन्होंने कम उम्र में ही बड़ी ख्याति पा ली थी। महज 36 साल की उम्र में उन्हें संगीत नाटक अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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उधर, महोत्सव में पहली प्रस्तुति मुंबई से आईं भरतनाट्यम नृत्यांगना स्निग्धा मेनन ने दी। स्निग्धा ने श्रीगणेश की स्तुति के बाद पंडित जयदेव द्वारा रचित अष्टपदी पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद नृत्यांगना गीतांजलि शर्मा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने पंचाक्षर शिव स्त्रोत और तीन ताल में बंदिश के बाद अपनी गुरु उमा डोगरा द्वारा धमार ताल में रचित रचना पर सुंदर प्रस्तुति दी।
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महोत्सव के अंत में ओडिसी नृत्य की मशहूर गुरु शुभद्रा वराडकर ने रामायण के प्रसंग जटायु मोक्ष का मंचन किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति मनमोहक रही। कार्यक्रम में चंदन पांडेय, मोहित शर्मा, रश्मि शर्मा, निहारिका सिंह, कुसुम कन्हाई, अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी, माधव आचार्य, दीपिका दीक्षित, कुणाल दीक्षित आदि उपस्थित रहे।