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आय जइयो श्याम बरसाने गांव तोहे होरी कौ मजा चखाय दूंगी
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बरसाना (मथुरा)। लठामार होली में नंदगांव के हुरियारों पर प्रेमभरी लाठियां बरसाने के लिए बरसाना की हुरियारिनों ने पूरी तैयारी कर ली है। एक ओर जहां लाठियों को तेल पिलाकर चमकाया जा रहा है, वहीं होली खेलने वाली महिलाओं ने अपनी विशेष डाइट लेनी शुरू कर दी है, जिससे हुरियारों को लाठियों की मार लगा कर मजा चखा सकें।
होली खेलने वाली हुरियारिनों में ब्राह्मण समाज की महिलाएं शामिल होती हैं, जो किशोरी जी की सहचरी के रूप में नन्द लाला व उनके ग्वाल-बालों के साथ होली खेल कर प्राचीन परंपरा का निर्वहन करती हैं। होली खेलने में हुरियारिनों के सामने उम्र, अवस्था या अन्य कोई कारण कभी आड़े नहीं आतीं है। इन हुरियारिनों में होली के समय असाधारण व अलौकिक तेज आ जाता है। देखते-देखते ये हुरियारिनें अपने हाथों में चमचमाती लाठियां लेकर हुरियारों पर बरस पड़ती है।
संतोष शर्मा ने बताया कि उसकी सातवीं होली है। जिस वक्त हम लाठियां लेकर हुरियारों पर बरसते हैं पता नहीं हम में इतनी शक्ति कहां से आ जाती है? मीरा शर्मा की 18वीं होली है। हमने कभी भविष्य में सोचा भी नहीं था कि एक दिन टीवी पर दिखने वाली लठामार होली में हम स्वयं भी भाग लेकर इसका आनंद उठा सकते हैं। हम अपने आप को सौभाग्यशाली मानते है कि इस पवित्र धाम में हमारी शादी हुई, जहां बसने के लिए लोग तरसते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सौभाग्य तो हमें जब मिला की हम लठामार होली की सहभागी बनी।
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साधना शर्मा ने बताया कि मैं दूसरी होली खेल रही हूं, होली महज एक खेल नहीं है, इसमें दिव्य भाव है। नन्दगाव के हुरियारों पर लाठी बरसाने के लिए अपनी लाठियों का तेल पिला कर उन्हें और मजबूत किया जा रहा है। किशोरी शर्मा ने बताया कि हमने बरसाना की लठामार होली देखी तो खूब थी, लेकिन कभी खेली नहीं। इस बार मैं पांचवीं होली खेल रही हूं। ससुरालीजनों से मुझे किशोरी जू के नाम जैसा ही प्यार मिला है। इस दिन हम विशेष पोशाक व सोलह श्रंगार कर कान्हा के सखा रूपी हुरियारों पर अपनी प्रेमभरी लाठियां बरसाएंगी। भावना शर्मा ने बताया कि बरसाना की लठामार होली नंद लाला व लाड़ली जी के दिव्य प्रेम की लीला है। यह लीला अलौकिक है जिसके दर्शन करने के लिए सूर्य, चंद्रमा भी कुछ क्षण अपनी गति रोक देते हैं।
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होली खेलने वाली हुरियारिनों में ब्राह्मण समाज की महिलाएं शामिल होती हैं, जो किशोरी जी की सहचरी के रूप में नन्द लाला व उनके ग्वाल-बालों के साथ होली खेल कर प्राचीन परंपरा का निर्वहन करती हैं। होली खेलने में हुरियारिनों के सामने उम्र, अवस्था या अन्य कोई कारण कभी आड़े नहीं आतीं है। इन हुरियारिनों में होली के समय असाधारण व अलौकिक तेज आ जाता है। देखते-देखते ये हुरियारिनें अपने हाथों में चमचमाती लाठियां लेकर हुरियारों पर बरस पड़ती है।
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संतोष शर्मा ने बताया कि उसकी सातवीं होली है। जिस वक्त हम लाठियां लेकर हुरियारों पर बरसते हैं पता नहीं हम में इतनी शक्ति कहां से आ जाती है? मीरा शर्मा की 18वीं होली है। हमने कभी भविष्य में सोचा भी नहीं था कि एक दिन टीवी पर दिखने वाली लठामार होली में हम स्वयं भी भाग लेकर इसका आनंद उठा सकते हैं। हम अपने आप को सौभाग्यशाली मानते है कि इस पवित्र धाम में हमारी शादी हुई, जहां बसने के लिए लोग तरसते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सौभाग्य तो हमें जब मिला की हम लठामार होली की सहभागी बनी।
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साधना शर्मा ने बताया कि मैं दूसरी होली खेल रही हूं, होली महज एक खेल नहीं है, इसमें दिव्य भाव है। नन्दगाव के हुरियारों पर लाठी बरसाने के लिए अपनी लाठियों का तेल पिला कर उन्हें और मजबूत किया जा रहा है। किशोरी शर्मा ने बताया कि हमने बरसाना की लठामार होली देखी तो खूब थी, लेकिन कभी खेली नहीं। इस बार मैं पांचवीं होली खेल रही हूं। ससुरालीजनों से मुझे किशोरी जू के नाम जैसा ही प्यार मिला है। इस दिन हम विशेष पोशाक व सोलह श्रंगार कर कान्हा के सखा रूपी हुरियारों पर अपनी प्रेमभरी लाठियां बरसाएंगी। भावना शर्मा ने बताया कि बरसाना की लठामार होली नंद लाला व लाड़ली जी के दिव्य प्रेम की लीला है। यह लीला अलौकिक है जिसके दर्शन करने के लिए सूर्य, चंद्रमा भी कुछ क्षण अपनी गति रोक देते हैं।