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फर्जी विकलांगता दिखाकर बन बैठे हैं कई शिक्षक
Updated Sun, 24 Jun 2018 11:44 PM IST
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फिरोजाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में बंपर भर्तियों का फायदा शातिर दिमाग लोगों ने उठाया है। फर्जी दस्तावेजों के दम पर आज भी शिक्षक पद की नौकरी कर रहे हैं। इन शातिर दिमाग शिक्षकों के तार बीएसए दफ्तर से लेकर डायट तक जुड़े हुए हैं। बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे हैं जो स्वस्थ होते हुए विकलांगों का हक छीने हुए हैं। मिलीभगत के कारण आज भी इन शिक्षकों की नौकरी धड़ल्ले से चल रही है।
यदि फिरोजाबाद जिले में भी गंभीरता से जांच की जाए तो कई तरीके का फर्जीवाड़ा निकलेगा। विकलांग कोटे में मैरिट न्यूनतम रहती है। ऐसे में शिक्षक कम सुनने या आंख से कम दिखने का प्रमाण पत्र जारी कराकर स्वस्थ रहते हुए विकलांग बन गए हैं। यह विकलांगता हर किसी को नजर नहीं आती है। कम मैरिट होने पर आसानी से नौकरी हासिल कर लेते हैं। औरैया और मैनपुरी जिले से कई विकलांग प्रमाण पत्र जारी हुए हैं।
विकलांगों का हक छीनकर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने वाले इन शिक्षकों के आगे शासन भी फेल है। 2007 से पूर्व नियुक्त विकलांग शिक्षकों को कई बार शिक्षकों ने लखनऊ जांच के लिए बुलाया है, लेकिन उस समय यह शिक्षक महीने से ज्यादा समय के लिए लापता हो जाते हैं ताकि जांच कराने में फर्जीवाड़े की पोल न खुल जाए। जांच खत्म होने के बाद पुन: वापस आ जाते हैं। वर्ष 2007 के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती हुई हैं। उसमें फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हासिल करने वाले दर्जनों शातिर शिक्षक बन गए हैं।
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यदि फिरोजाबाद जिले में भी गंभीरता से जांच की जाए तो कई तरीके का फर्जीवाड़ा निकलेगा। विकलांग कोटे में मैरिट न्यूनतम रहती है। ऐसे में शिक्षक कम सुनने या आंख से कम दिखने का प्रमाण पत्र जारी कराकर स्वस्थ रहते हुए विकलांग बन गए हैं। यह विकलांगता हर किसी को नजर नहीं आती है। कम मैरिट होने पर आसानी से नौकरी हासिल कर लेते हैं। औरैया और मैनपुरी जिले से कई विकलांग प्रमाण पत्र जारी हुए हैं।
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विकलांगों का हक छीनकर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने वाले इन शिक्षकों के आगे शासन भी फेल है। 2007 से पूर्व नियुक्त विकलांग शिक्षकों को कई बार शिक्षकों ने लखनऊ जांच के लिए बुलाया है, लेकिन उस समय यह शिक्षक महीने से ज्यादा समय के लिए लापता हो जाते हैं ताकि जांच कराने में फर्जीवाड़े की पोल न खुल जाए। जांच खत्म होने के बाद पुन: वापस आ जाते हैं। वर्ष 2007 के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती हुई हैं। उसमें फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हासिल करने वाले दर्जनों शातिर शिक्षक बन गए हैं।
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