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डीएम सहित अपर नगर आयुक्त की एनजीटी में पेशी हुई
Updated Mon, 23 Apr 2018 08:10 PM IST
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एनजीटी
- फोटो : डैमो
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मथुरा। यमुना में शहर का गंदा पानी जाने के मामले में डीएम सर्वज्ञराम मिश्र, अपर नगर आयुक्त सुशीला अग्रवाल सहित कई अधिकारी सोमवार को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में पेश हुए। डीएम की ओर से इस मामले में रिपोर्ट तीन दिन पहले ही दाखिल की जा चुकी थी। एनजीटी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए अब याचिकाकर्ताओं को 21 मई तक की मोहलत दे दी है।
मथुरा-वृंदावन शहरी क्षेत्र का गंदा पानी सीधे यमुना में जाने के मामले में सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई थी। इस मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने डीएम, नगर आयुक्त, महाप्रबंधक जलकल और अधिशासी अधिकारी जल निगम को तलब कर लिया था।
कोर्ट के आदेश पर डीएम सर्वज्ञराम की ओर से जवाब सुनवाई की तिथि से तीन दिन पहले ही दाखिल किया जा चुका था। सोमवार को कोर्ट ने याची उमेश भारद्वाज और राजीव सिंह से उपरोक्त अधिकारियों की मौजूदगी में पूछा कि उपरोक्त प्रशासनिक रिपोर्ट पर कुछ कहना है। इसके लिए याची ने कोर्ट से वक्त मांगा। इस पर एनजीटी ने 21 मई तक प्रशासनिक पक्ष पर आपत्ति दर्ज कराने की मोहलत याचिकाकर्ताओं को दी गई है।
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गौरतलब रहे प्रशासन की एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक शहर में 48.5 एमएलडी पानी उत्सर्जित होता है। इसके विपरीत 25.5 एमएलडी पानी को ही मौजूदा संसाधनों से शोधित किया जा रहा है। इस स्थिति में बाकी पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। इसके लिए 204 करोड़ रुपये की नई योजना शासन को प्रस्तावित की गई है। इसके बाद यमुना में नालों का पानी नहीं जाएगा।
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मथुरा-वृंदावन शहरी क्षेत्र का गंदा पानी सीधे यमुना में जाने के मामले में सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई थी। इस मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने डीएम, नगर आयुक्त, महाप्रबंधक जलकल और अधिशासी अधिकारी जल निगम को तलब कर लिया था।
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कोर्ट के आदेश पर डीएम सर्वज्ञराम की ओर से जवाब सुनवाई की तिथि से तीन दिन पहले ही दाखिल किया जा चुका था। सोमवार को कोर्ट ने याची उमेश भारद्वाज और राजीव सिंह से उपरोक्त अधिकारियों की मौजूदगी में पूछा कि उपरोक्त प्रशासनिक रिपोर्ट पर कुछ कहना है। इसके लिए याची ने कोर्ट से वक्त मांगा। इस पर एनजीटी ने 21 मई तक प्रशासनिक पक्ष पर आपत्ति दर्ज कराने की मोहलत याचिकाकर्ताओं को दी गई है।
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गौरतलब रहे प्रशासन की एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक शहर में 48.5 एमएलडी पानी उत्सर्जित होता है। इसके विपरीत 25.5 एमएलडी पानी को ही मौजूदा संसाधनों से शोधित किया जा रहा है। इस स्थिति में बाकी पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। इसके लिए 204 करोड़ रुपये की नई योजना शासन को प्रस्तावित की गई है। इसके बाद यमुना में नालों का पानी नहीं जाएगा।