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टीबी की जांच से पीछे हट रहे मुस्लिम समाज के लोग
Updated Fri, 05 Jan 2018 07:35 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। केंद्र सरकार की पहल पर टीबी के रोगियों की खोज के लिए शुरू किए गए अभियान में लोगों की झिझक आडे़ आ रही है। इसमें खासकर मुस्लिम और मलिन बस्तियों के निवासी टीबी की जांच से पीछे हट रहे हैं। इसमें मथुरा महानगर क्षेत्र में दरेसी, मटियागेट, बद्रीनगर, भरतपुरगेट, लक्ष्मीनगर, भरतपुरगेट शामिल हैं।
टीबी की दृष्टि से मथुरा प्रदेश के उन 25 जनपदों में शामिल है, जिन्हें अतिसंवेदनशील माना गया है। यहां केंद्र सरकार की पहल पर विशेष अभियान के तहत घर-घर पहुंचकर टीबी के रोगियों की खोज की जा रही है, जिससे इस बीमारी पर नियंत्रण किया जा सके। इस अभियान में 115 टीमों के 345 सदस्यों चिंहित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से बीमारी के लक्षण जान रहे हैं।
अभियान के आंकड़ों पर गौर करें तो मुस्लिम बाहुल्य बद्रीनगर में 31 प्रतिशत लोग ही जांच को सैंपल के लिए तैयार हुए हैं, जो अभियान में सबसे कम है। इसके अलावा दरेसी में 57 प्रतिशत, मटियागेट में 63 प्रतिशत, लक्ष्मीनगर में 65 प्रतिशत लोग काउंसलिंग के बाद जांच को सैंपल देने के लिए तैयार हुए हैं। जयसिंहपुरा क्षेत्र में भी यही स्थिति है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रवींद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि लोगों से बातचीत के बाद बीमारी की संभावना को देखते हुए सैंपल एकत्रित किए जाते हैं, लेकिन कुछ क्षेत्र में लोग टीबी के लक्षणों के बाद सैंपल नहीं दे रहे हैं।
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टीकाकरण में भी आ रही दिक्कत
विभिन्न बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए चल रहे इंद्रधनुष अभियान में भी मुस्लिम आबादी क्षेत्र में ही टीकाकरण में दुश्वारियां आ रही हैं। कोसीकलां सहित महानगर के कई मुस्लिम परिवार टीकाकरण कराने से पीछे हट रहे हैं।
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टीबी की दृष्टि से मथुरा प्रदेश के उन 25 जनपदों में शामिल है, जिन्हें अतिसंवेदनशील माना गया है। यहां केंद्र सरकार की पहल पर विशेष अभियान के तहत घर-घर पहुंचकर टीबी के रोगियों की खोज की जा रही है, जिससे इस बीमारी पर नियंत्रण किया जा सके। इस अभियान में 115 टीमों के 345 सदस्यों चिंहित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से बीमारी के लक्षण जान रहे हैं।
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अभियान के आंकड़ों पर गौर करें तो मुस्लिम बाहुल्य बद्रीनगर में 31 प्रतिशत लोग ही जांच को सैंपल के लिए तैयार हुए हैं, जो अभियान में सबसे कम है। इसके अलावा दरेसी में 57 प्रतिशत, मटियागेट में 63 प्रतिशत, लक्ष्मीनगर में 65 प्रतिशत लोग काउंसलिंग के बाद जांच को सैंपल देने के लिए तैयार हुए हैं। जयसिंहपुरा क्षेत्र में भी यही स्थिति है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रवींद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि लोगों से बातचीत के बाद बीमारी की संभावना को देखते हुए सैंपल एकत्रित किए जाते हैं, लेकिन कुछ क्षेत्र में लोग टीबी के लक्षणों के बाद सैंपल नहीं दे रहे हैं।
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टीकाकरण में भी आ रही दिक्कत
विभिन्न बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए चल रहे इंद्रधनुष अभियान में भी मुस्लिम आबादी क्षेत्र में ही टीकाकरण में दुश्वारियां आ रही हैं। कोसीकलां सहित महानगर के कई मुस्लिम परिवार टीकाकरण कराने से पीछे हट रहे हैं।