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मूर्तियों को नहीं मिल सकी ‘जुबां’
Updated Mon, 25 Sep 2017 07:45 PM IST
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डॉल म्यूजियम
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा। राजकीय संग्रहालय में मूर्तियों के स्वयं अपने इतिहास से पर्यटकों को रूबरू कराने की योजना के तहत इनमें ऑडियो सिस्टम लगाया जाना था। इस आकर्षक योजना को मंजूरी भी मिल गई, लेकिन लंबे समय से यह फाइलों में ही दबकर रह गई है।
मथुरा के राजकीय संग्रहालय में पांच हजार से अधिक मूर्तियों का बेशकीमती खजाना है। इनमें 20 से अधिक मूर्तियां मास्टर पीस में शुमार हैं। संग्रहालय ने एक योजना तैयार की थी जिसमें मूर्तियों को ऑडियो सिस्टम से जोड़ा जाना था। मसलन जब आप मूर्ति के सामने खड़े हों तो मूर्ति स्वयं ही बोलकर आपको अपना इतिहास, खासियत से परिचय कराती। योजना अच्छी थी इसलिए लखनऊ ने भी मंजूरी दे दी थी। योजना तो मंजूर हो गई, लेकिन उसके लिए धनराशि जारी नही की गई।
संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर डा. एसपी सिंह ने बताया कि 4.25 करोड़ रुपये से जो कार्य होने थे उसमें इस योजना के लिए कोई रकम नहीं मिली। संग्रहालय के पास भी फंड नहीं है, इसलिए योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
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मथुरा के राजकीय संग्रहालय में पांच हजार से अधिक मूर्तियों का बेशकीमती खजाना है। इनमें 20 से अधिक मूर्तियां मास्टर पीस में शुमार हैं। संग्रहालय ने एक योजना तैयार की थी जिसमें मूर्तियों को ऑडियो सिस्टम से जोड़ा जाना था। मसलन जब आप मूर्ति के सामने खड़े हों तो मूर्ति स्वयं ही बोलकर आपको अपना इतिहास, खासियत से परिचय कराती। योजना अच्छी थी इसलिए लखनऊ ने भी मंजूरी दे दी थी। योजना तो मंजूर हो गई, लेकिन उसके लिए धनराशि जारी नही की गई।
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संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर डा. एसपी सिंह ने बताया कि 4.25 करोड़ रुपये से जो कार्य होने थे उसमें इस योजना के लिए कोई रकम नहीं मिली। संग्रहालय के पास भी फंड नहीं है, इसलिए योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
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