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जीएसटी लागू होने के बाद बाजार अस्त-व्यस्त
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:55 PM IST
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gst
- फोटो : सोशल मीडिया
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एटा। जीएसटी लागू होने के बाद बाजार में रोजमर्रा के सामान की किल्लत बढ़ती जा रही है। इन दिनों बाजार में कपड़े धुलने का पाउडर, साबुन, चाय पत्ती, मॉर्टिन आदि अन्य ब्रांडेड सामानों की कमी है। दुकानदारों के मुताबिक आर्डर के बाद भी इन सामानों की आपूर्ति नहीं हो रही।
जीएसटी के चलते बाजार अस्त व्यस्त बना हुआ है। पांच दिन गुजरने के बाद भी सामानों की किल्लत नहीं लौट रही। बड़े सामान तो दूर रोजमर्रा के घरेलू सामान भी नहीं मिल रहे। एक सप्ताह से बाजार में ब्रांडेड साबुन, कपड़े धुलने का पाउडर, चाय पत्ती, मॉर्टिन व अन्य प्रसाधन सामग्री की किल्लत है। इंद्रपुरी निवासी रीतू जैन, रंजना गुप्ता आदि का कहना है कि मशीन के लिए वाशिंग पाउडर एवं अच्छे साबुन आदि नहीं मिल रहा।
हिंदुस्तान लीवर, पीएंडजी एवं पतंजलि आदि के सामान नदारत हैं। ईशान जैन, दिलशाद सिद्दीकी आदि का कहना है कि नई कर व्यवस्था में सामानों की आपूर्ति नहीं हो रही। कंपनी, डीलर से लेकर ट्रांसपोर्ट तक असहयोग कर रहे हैं। टैक्स न बढ़ने के बाद भी डीलर अभी तक नई बिलिंग भी नहीं कर रहे।
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कपड़ा महंगा हुआ
एटा। जीएसटी से कपडे़ के दामों में आंशिक वृद्धि हुई है। वस्त्र निर्माता कंपनियों से जीएसटी से पूर्व ही कपड़े पर तीन से आठ प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। वहीं रेडीमेड कपड़ों की नई बिलिंग अभी नहीं आई है। कारोबारी संजय भसीन के अनुसार पूर्व में रेडीमेड वस्त्रों पर जहां वैट था। पर, कपड़ों पर कर नहीं था।
किराना व्यवसायी सुधीर जैन का कहना है कि एक पखवाड़े से नया माल नहीं आ रहा। ऐसे में पुराने स्टॉक से ही काम चलाया जा रहा है।
प्रदीप जैन का कहना है कि नए माल एवं बिलिंग के अभाव में सामान के करंट भाव का भी पता नहीं चल रहा। यदि ऐसा ही रहा तो एक सप्ताह में परेशानी और बढ़ जाएगी।
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जीएसटी के चलते बाजार अस्त व्यस्त बना हुआ है। पांच दिन गुजरने के बाद भी सामानों की किल्लत नहीं लौट रही। बड़े सामान तो दूर रोजमर्रा के घरेलू सामान भी नहीं मिल रहे। एक सप्ताह से बाजार में ब्रांडेड साबुन, कपड़े धुलने का पाउडर, चाय पत्ती, मॉर्टिन व अन्य प्रसाधन सामग्री की किल्लत है। इंद्रपुरी निवासी रीतू जैन, रंजना गुप्ता आदि का कहना है कि मशीन के लिए वाशिंग पाउडर एवं अच्छे साबुन आदि नहीं मिल रहा।
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हिंदुस्तान लीवर, पीएंडजी एवं पतंजलि आदि के सामान नदारत हैं। ईशान जैन, दिलशाद सिद्दीकी आदि का कहना है कि नई कर व्यवस्था में सामानों की आपूर्ति नहीं हो रही। कंपनी, डीलर से लेकर ट्रांसपोर्ट तक असहयोग कर रहे हैं। टैक्स न बढ़ने के बाद भी डीलर अभी तक नई बिलिंग भी नहीं कर रहे।
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कपड़ा महंगा हुआ
एटा। जीएसटी से कपडे़ के दामों में आंशिक वृद्धि हुई है। वस्त्र निर्माता कंपनियों से जीएसटी से पूर्व ही कपड़े पर तीन से आठ प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। वहीं रेडीमेड कपड़ों की नई बिलिंग अभी नहीं आई है। कारोबारी संजय भसीन के अनुसार पूर्व में रेडीमेड वस्त्रों पर जहां वैट था। पर, कपड़ों पर कर नहीं था।
किराना व्यवसायी सुधीर जैन का कहना है कि एक पखवाड़े से नया माल नहीं आ रहा। ऐसे में पुराने स्टॉक से ही काम चलाया जा रहा है।
प्रदीप जैन का कहना है कि नए माल एवं बिलिंग के अभाव में सामान के करंट भाव का भी पता नहीं चल रहा। यदि ऐसा ही रहा तो एक सप्ताह में परेशानी और बढ़ जाएगी।