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इबादत के आगे हार जाती है भूख-प्यास
Updated Wed, 14 Jun 2017 11:31 PM IST
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इबादत के आगे हार जाती है भूख-प्यास
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी। इबादत के पाक रमजान के महीने में मस्जिदों की रौनक देखते ही बन रही है। मुस्लिम धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस माह में एक नेकी के बदले 70 गुना तक सवाब मिलता है। 12 वर्ष से अधिक उम्र वाले बच्चों के लिए भी रमजान के माह में रोजा रखना जरूरी बताया गया है। पहली बार रोजा रखने वाले छोटे-छोटे बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला।
सुबह तीन बजे से ही मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों से सहरी की आवाज बुलंद की जा रही है। उसके बाद नमाज शुरू होती है। रोजे रखने वाले कुरआन पाक की तिलावत की करते हैं और गरीबों की मदद कर रहे हैं। वहीं पहली बार रोजा रखने वाले छोटे-छोटे बच्चों में काफी उत्साह है। मां-बाप के मना करने पर भी वह इतनी तेज धूप और गर्मी में भी रोजा रखने से पीछे नहीं हटते। 12 वर्षीय परवीन राईन का कहना था कि गर्मियों के चलते स्कूल की छुट्टी चल रहीं है। उसे रोजा रखने में कोई परेशानी नहीं हुई है। नमाज और कुरान पढ़ने में रोजा पता ही नहीं चला है। अब मैं हर वर्ष रोजे रखूंगी।
13 वर्ष की रिशाद का कहना है कि वह अब आगे से हर बार रोजा रखेंगे। रोजा रखना अल्लाह की सच्ची इबादत है। ऐसे ही अन्य बच्चों का भी कहना था। वहीं पहली बार रोजा रखने पर मां-बाप उनकी खुशी के लिए रोजा इफ्तार भी करा रहे हैं। जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शमी अहमद ने बताया कि शहर के तमाम बच्चे रमजान का रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहे हैं। बच्चों की हौसला अफजाई उनके परिवारीजन कर रहे हैं।
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सुबह तीन बजे से ही मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों से सहरी की आवाज बुलंद की जा रही है। उसके बाद नमाज शुरू होती है। रोजे रखने वाले कुरआन पाक की तिलावत की करते हैं और गरीबों की मदद कर रहे हैं। वहीं पहली बार रोजा रखने वाले छोटे-छोटे बच्चों में काफी उत्साह है। मां-बाप के मना करने पर भी वह इतनी तेज धूप और गर्मी में भी रोजा रखने से पीछे नहीं हटते। 12 वर्षीय परवीन राईन का कहना था कि गर्मियों के चलते स्कूल की छुट्टी चल रहीं है। उसे रोजा रखने में कोई परेशानी नहीं हुई है। नमाज और कुरान पढ़ने में रोजा पता ही नहीं चला है। अब मैं हर वर्ष रोजे रखूंगी।
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13 वर्ष की रिशाद का कहना है कि वह अब आगे से हर बार रोजा रखेंगे। रोजा रखना अल्लाह की सच्ची इबादत है। ऐसे ही अन्य बच्चों का भी कहना था। वहीं पहली बार रोजा रखने पर मां-बाप उनकी खुशी के लिए रोजा इफ्तार भी करा रहे हैं। जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शमी अहमद ने बताया कि शहर के तमाम बच्चे रमजान का रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहे हैं। बच्चों की हौसला अफजाई उनके परिवारीजन कर रहे हैं।
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