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वादों के पिटारे से नहीं निकला मिरहची का विकास
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मिरहची। दावे बहुत हुए और वादों की भी झड़ी लगी रही लेकिन मिला तो बस कोरा आश्वासन। सियासतदां की वादाखिलाफी से जनाब अब तो आस भी टूट चुकी है। जी हां कुछ यही दर्द है मिरहची क्षेत्र के लोगों की जुबां पर। चुनावी चर्चा में मशगूल लोग मुद्दों को टटोलकर अपने दर्द के लिए मरहम ढूंढ रहे हैं। अतरंजीखेड़ा हो या सांसद आदर्श गांव सूरतपुर माफी हर जगह बस बदहाली की तस्वीर है। न तो योजनाएं परवान चढ़ीं और न ही हुक्मरानों ने सुध ली। चुनावी चर्चा के दौरान लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी रायशुमारी की। पढ़िए मिरहची से पुष्पेंद्र यादव की खास रिपोर्ट...
बजट मिलने के बाद विकास दरकिनार
क्षेत्र का गांव अतरंजीखेड़ा भारत में बौद्ध विहार बैरंजा के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान बुद्ध ने वर्षावास किया था। प्रदेश सरकार ने इस बौद्ध स्थल को बौद्ध सर्किट में शामिल कर एक गेस्ट हाउस के लिए एक करोड़ का बजट पास किया था, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। इसके बाद पर्यटन स्थल का दर्जा मिला और बजट भी मिला, लेकिन कार्य अधूरा है। इस बार उसे चुनेंगे जो हमारे क्षेत्र के तीर्थ स्थल का विकास कराएगा। इस मौके पर चंद्रशेखर, रामबाबू, विकास, सुखलाल, सुरेश चंद्र, आकाश मौजूद रहे।
सूरत तक न देखने आए सरकार
गांव सूरतपुर माफी को सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया, लेकिन गांव की सूरत तक नहीं बदली। गांव में नाली, खड़ंजा, शौचालय तक नहीं बने। वहीं गांव को अचलपुर मरथरा से जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। इस बार उसे चुनेंगे जो गांव में रुके विकास के पहिए को गति देगा। इस मौके पर महताब सिंह, पोखपाल, कुंवरपाल, नाथूराम, वीरेंद्र, घनश्याम, रनवीर, पूरन मौजूद रहे।
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बजट मिलने के बाद विकास दरकिनार
क्षेत्र का गांव अतरंजीखेड़ा भारत में बौद्ध विहार बैरंजा के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान बुद्ध ने वर्षावास किया था। प्रदेश सरकार ने इस बौद्ध स्थल को बौद्ध सर्किट में शामिल कर एक गेस्ट हाउस के लिए एक करोड़ का बजट पास किया था, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। इसके बाद पर्यटन स्थल का दर्जा मिला और बजट भी मिला, लेकिन कार्य अधूरा है। इस बार उसे चुनेंगे जो हमारे क्षेत्र के तीर्थ स्थल का विकास कराएगा। इस मौके पर चंद्रशेखर, रामबाबू, विकास, सुखलाल, सुरेश चंद्र, आकाश मौजूद रहे।
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सूरत तक न देखने आए सरकार
गांव सूरतपुर माफी को सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया, लेकिन गांव की सूरत तक नहीं बदली। गांव में नाली, खड़ंजा, शौचालय तक नहीं बने। वहीं गांव को अचलपुर मरथरा से जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। इस बार उसे चुनेंगे जो गांव में रुके विकास के पहिए को गति देगा। इस मौके पर महताब सिंह, पोखपाल, कुंवरपाल, नाथूराम, वीरेंद्र, घनश्याम, रनवीर, पूरन मौजूद रहे।
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