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जो राधा कुंड नहाई, पुत्र रतन जन पाई
Updated Sun, 28 Oct 2018 08:38 PM IST
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राधाकुंड
- फोटो : self
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राधाकुंड (मथुरा)। जो राधाकुंड नहाई, पुत्र रतन जन पाई। इसी कामना को लेकर एक बार फिर पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए राधाकुंड में आस्था की डुबकी लगेगी। 31 अक्तूबर को दिनभर व्रत रहकर एक नवंबर को रात्रि 12 बजते ही महिलाओं द्वारा कुंड में स्नान किया जाएगा।
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से करीब 26 किमी दूर स्थित है राधाकुंड। मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी को वह दंपती जिन्हें पुत्र प्राप्ति नहीं हुई है, वह निर्जला व्रत रखकर यदि पुष्प नक्षत्र में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर इस कुंड में स्नान करें तो निश्चित ही उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि स्नान के दौरान सुहागिन महिलाएं केश खोलकर राधा का नाम जपते हुए उनका आशीर्वाद लेती हैं जिससे उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार पुष्प नक्षत्र में राधा और कृष्ण रात्रि 12 बजे तक अष्ट सखियों के साथ महारास किया करते थे। इसके बाद पुष्प नक्षत्र शुरू होते ही वह स्नान कर भक्ति करने वालों को आशीर्वाद देते थे।
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मध्य में स्थित है कंगन कुंड
राधाकुंड के मध्य में कंगन कुंड स्थापित है जिसे स्वयं राधा जी ने अपने कंगन से खोदा था। वहीं अपनी बांसुरी से श्रीकृष्ण ने इस स्थान पर एक कुंड खोदा जो वर्तमान में श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है।
राधाजी ने श्रीकृष्ण से मांगा था वरदान
महारास से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण के कहने पर राधाजी ने वरदान मांगा कि अहोई अष्टमी की रात्रि में जो भी नि:संतान दंपती इस कुंड में स्नान करेगा उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। इसका उल्लेख ब्रह्मपुराण और गर्ग संहिता के गिरिराज खंड में भी देखने को मिलता है।
अहोई अष्टमी पर 31 अक्तूबर की सुबह से महिलाएं व्रत रखेंगी। जैसे ही एक नवंबर को रात्रि 12 बजेंगे, स्नान शुरू हो जाएगा। इस बार अष्टमी मेला दो दिन मनाया जाएगा।
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भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से करीब 26 किमी दूर स्थित है राधाकुंड। मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी को वह दंपती जिन्हें पुत्र प्राप्ति नहीं हुई है, वह निर्जला व्रत रखकर यदि पुष्प नक्षत्र में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर इस कुंड में स्नान करें तो निश्चित ही उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है।
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मान्यता है कि स्नान के दौरान सुहागिन महिलाएं केश खोलकर राधा का नाम जपते हुए उनका आशीर्वाद लेती हैं जिससे उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार पुष्प नक्षत्र में राधा और कृष्ण रात्रि 12 बजे तक अष्ट सखियों के साथ महारास किया करते थे। इसके बाद पुष्प नक्षत्र शुरू होते ही वह स्नान कर भक्ति करने वालों को आशीर्वाद देते थे।
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मध्य में स्थित है कंगन कुंड
राधाकुंड के मध्य में कंगन कुंड स्थापित है जिसे स्वयं राधा जी ने अपने कंगन से खोदा था। वहीं अपनी बांसुरी से श्रीकृष्ण ने इस स्थान पर एक कुंड खोदा जो वर्तमान में श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है।
राधाजी ने श्रीकृष्ण से मांगा था वरदान
महारास से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण के कहने पर राधाजी ने वरदान मांगा कि अहोई अष्टमी की रात्रि में जो भी नि:संतान दंपती इस कुंड में स्नान करेगा उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। इसका उल्लेख ब्रह्मपुराण और गर्ग संहिता के गिरिराज खंड में भी देखने को मिलता है।
अहोई अष्टमी पर 31 अक्तूबर की सुबह से महिलाएं व्रत रखेंगी। जैसे ही एक नवंबर को रात्रि 12 बजेंगे, स्नान शुरू हो जाएगा। इस बार अष्टमी मेला दो दिन मनाया जाएगा।