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केजीएमयू के नाम से जारी कर दीं फर्जी सत्यापन रिपोर्ट
Updated Fri, 03 Aug 2018 10:51 PM IST
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- फोटो : SELF
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मथुरा। शिक्षक भर्ती घोटाले में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस घोटाले से जुड़े रैकेट ने लखनऊ स्थित देश की प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नाम से दिव्यांग शिक्षकों की फर्जी सत्यापन रिपोर्ट जारी कर दी। जांच में पता चला है कि यूनिवर्सिटी से कोई रिपोर्ट जारी की ही नहीं गई है।
दरअसल विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां हुईं। इसमें शिकायत हुई कि जो दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाए गए हैं वह भी जाली हैं। शिकायत के बाद प्रदेश स्तर पर नियुक्त हुए दिव्यांग शिक्षकों की जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ में मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। इसमें दिव्यांग शिक्षकों को बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर दिव्यांगता की जांच करानी थी। लेकिन शिक्षक भर्ती से जुड़े रैकेट ने अनेक दिव्यांग शिक्षकों का बगैर बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए फर्जी सत्यापन करा दिया। इसकी रिपोर्ट संबंधित डायट को भी भेज दी गईं।
मथुरा में यह खेल अडूकी प्राथमिक विद्यालय प्रथम में तैनात उपेंद्र सिंघल के फर्जी सत्यापन से पकड़ में आ गया। दरअसल फर्जी सत्यापन और केजीएमआई का दिव्यांगता संबंधी जांच न कराए वाले शिक्षकों की लिस्ट एक साथ डायट मथुरा में पहुंची थी। एक पत्र उपेंद्र सिंघल की दिव्यांगता को सत्यापित कर रहा था तो दूसरा उसके बोर्ड के समक्ष उपस्थित न होने की जानकारी दे रहा था। डायट के स्तर से जब पत्र वाहक भेजकर इन दोनों पत्रों की जांच कराई गई तो सत्यापन फर्जी पाया गया। दिव्यांगता पर जिन चिकित्सकों के हस्ताक्षर दर्ज थे, उन्होंने इसे जारी ही नहीं किया था।
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उनकी रिपोर्ट के बाद शिक्षा निदेशक बेसिक ने केजीएमयू से उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की है, जिससे पता चल सके कि फर्जी सत्यापन कैसे हुआ।
- डॉ. मुकेश अग्रवाल, डायट प्राचार्य
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दरअसल विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां हुईं। इसमें शिकायत हुई कि जो दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाए गए हैं वह भी जाली हैं। शिकायत के बाद प्रदेश स्तर पर नियुक्त हुए दिव्यांग शिक्षकों की जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ में मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। इसमें दिव्यांग शिक्षकों को बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर दिव्यांगता की जांच करानी थी। लेकिन शिक्षक भर्ती से जुड़े रैकेट ने अनेक दिव्यांग शिक्षकों का बगैर बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए फर्जी सत्यापन करा दिया। इसकी रिपोर्ट संबंधित डायट को भी भेज दी गईं।
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मथुरा में यह खेल अडूकी प्राथमिक विद्यालय प्रथम में तैनात उपेंद्र सिंघल के फर्जी सत्यापन से पकड़ में आ गया। दरअसल फर्जी सत्यापन और केजीएमआई का दिव्यांगता संबंधी जांच न कराए वाले शिक्षकों की लिस्ट एक साथ डायट मथुरा में पहुंची थी। एक पत्र उपेंद्र सिंघल की दिव्यांगता को सत्यापित कर रहा था तो दूसरा उसके बोर्ड के समक्ष उपस्थित न होने की जानकारी दे रहा था। डायट के स्तर से जब पत्र वाहक भेजकर इन दोनों पत्रों की जांच कराई गई तो सत्यापन फर्जी पाया गया। दिव्यांगता पर जिन चिकित्सकों के हस्ताक्षर दर्ज थे, उन्होंने इसे जारी ही नहीं किया था।
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उनकी रिपोर्ट के बाद शिक्षा निदेशक बेसिक ने केजीएमयू से उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की है, जिससे पता चल सके कि फर्जी सत्यापन कैसे हुआ।
- डॉ. मुकेश अग्रवाल, डायट प्राचार्य