फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   नियमों को ताक पर रख काम कर रहे रेलवे के इंजीनियर

नियमों को ताक पर रख काम कर रहे रेलवे के इंजीनियर

Wed, 01 Aug 2018 12:12 AM IST
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:12 AM IST
विज्ञापन
नियमों को ताक पर रख काम कर रहे रेलवे के इंजीनियर
डैमो
मथुरा। रेलवे में हो रहे निर्माण कार्यों में मानकों का कतई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। डेढ़ करोड़ की लागत से राधाकुंड में बना स्टेशन एक महीने भी नहीं चला। अब इंजीनियर एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। इस समय रेलवे के मथुरा सेक्शन में 700 करोड़ के काम हो रहे हैं लेकिन हर जगह से शिकायतें गूंज रही हैं।
विज्ञापन


कई इंजीनियर तो ऐसे हैं जो जिन्होंने अपने रिश्तेदारों को ठेके दिला रखे हैं। अधिकतर कार्यस्थलों पर प्रोजेक्ट बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। सुरक्षा के इंतजाम भी पूरे नहीं हैं। रेलवे द्वारा मथुरा से पलवल तक करीब सात सौ करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। सबसे बड़ी लागत का काम मथुरा से पलवल के बीच डाली जा रही थर्ड लाइन का है।
विज्ञापन


इसकी अनुमानित लागत करीब साढ़े छह सौ करोड़ रुपये बताई जाती है। इसके अलावा जंक्शन यार्ड में आधुनिक आरआरआई केबिन का भवन बनाया जा रहा है। यहां कहीं भी कोई प्रोजेक्ट बोर्ड नही लगाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रोजेक्ट बोर्ड पर काम कर रही संस्था का नाम, निर्माण करा रहे ठेकेदार का नाम, निर्माण की अनुमानित लागत, काम कब तक पूरा होगा और बनाए जा रहे भवन का मानचित्र आदि होता है। लेकिन अधिकतर निर्माण स्थलों से प्रोजेक्ट बोर्ड नदारद हैं। साथ ही सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इसी के चलते मई माह में निर्माण कार्य में लगा ट्रैक्टर प्लेटफार्म संख्या दो के ट्रैक पर गिर गया था।

लगा रहे आरोप प्रत्यारोप
मथुरा। विभाग में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। रेलवे निर्माण शाखा ने जल भराव के लिए सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग के सिर इसका ठीकरा फोड़ा है। निर्माण से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि एस एंड टी विभाग द्वारा केबिल बॉक्स के लिए बनाए गए चैम्बर की वजह से पानी भरा और स्टेशन का फर्श आदि बैठ गया। वहीं, एस एंड टी विभाग का कहना है कि निर्माण विभाग ने जल भराव की संभावनाओं को तलाशे बिना ही काम पूरा कर दिया। स्टेशन की बाउंड्रीवाल भी पूरी नहीं बनाई।


‘निर्माण स्थल पर प्रोजेक्ट बोर्ड नहीं लगे हैं, इसे दिखवाया जाएगा। राधाकुंड स्टेशन को लेकर गठित जांच टीम रिपोर्ट बना रही है। उसके बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।’
संचित त्यागी, डीसीएम/पीआरओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed