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बदहाल अस्पताल, दवाओं का टोटा, इमरजेंसी तो बस नाम की
Updated Tue, 03 Jul 2018 11:59 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। यह कैसी स्वास्थ्य सेवाएं हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी तो जुगाड़ से चल रही है। अगर कोई गंभीर हालत में पहुंच गया तो तत्काल रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में एंबुलेंस मिल जाए तो गनीमत है। अगर एंबुलेंस मिल भी गई तो आक्सीजन का सिलेंडर नहीं होगा। मरीज की देखभाल को स्टाफ नहीं होगा। इसे तो छोड़िए अस्पताल में इस समय जरूरी दवाओं का भी टोटा चला आ रहा है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा सिर्फ नाम की है। किसी दुर्घटना में घायलों की संख्या 5 से 10 हो जाए तो यहां सभी व्यवस्थाएं बिखर जाती हैं। यहां न तो स्ट्रेचर मिलेगा न उसे खींचने वाला। परिजनों को ही उन्हें ले जाना होगा। इसमें भी घायलों के साथ परिजन नहीं पहुंचे तो चिकित्सक तक पहुंचने में ही लंबा वक्त लग जाता है। दो दिन पहले की ही बात है दिल्ली के घायलों को उपचार के लिए परिजन ही स्ट्रेचर और खुद उठाकर लेकर आए।
दो बजे के बाद तो सिर्फ एक चिकित्सक की तैनाती रहती है, जो रेफर तत्परता के साथ करते हैं। कई बड़ी घटनाओं पर इमरजेंसी के लिए चिकित्सक घंटों बाद यहां पहुंचे। अधिकांश चिकित्सक आगरा से आते हैं। सभी दवाएं आज भी मौजूद नहीं हैं। पिछले दिनों जिला अस्पताल की ब्लड बैंक के बावजूद मरीज की खून के अभाव में मौत हो गई।
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एंबुलेंस सेवाओं का भी बुरा हाल है। 108 सेवा हो या फिर 102 बमुश्किल से ही उपलब्ध होती हैं। गर्भवती और प्रसूता को घंटों इंतजार करना होता है। इसमें भी अधिकांश एंबुलेंस सिर्फ वाहन का काम करती है। चिकित्सकीय सेवाओं का पूरी तरह से इनमें अभाव है। लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दो हैं, लेकिन एक के लिए चालक नहीं है। मंगलवार को महिला अस्पताल से अनेक प्रसूता 102 सेवा पर फोन करने के बाद अपने वाहन से घर चले गए।
एक नजर में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं
- जिला स्तरीय अस्पताल 03
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 12
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 26
- एंबुलेंस सेवा
108-18
102-28
लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस -02, संचालित 01
कबाड़ घोषित - 04
- चिकित्सकों की संख्या -102
- चिकित्सकों के पद -176
ये हैं जिले के आला चिकित्साधिकारी
सीएमओ-शेरसिंह- 8005192681
जिला अस्पताल, सीएमएस -डॉ. वीके गुप्ता-9411489051
महिला अस्पताल, सीएमएस-डॉ. बीलाल-8005192708
सौ सैय्या वृंदावन-सीएमएस- डॉ. केके गुप्ता
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा सिर्फ नाम की है। किसी दुर्घटना में घायलों की संख्या 5 से 10 हो जाए तो यहां सभी व्यवस्थाएं बिखर जाती हैं। यहां न तो स्ट्रेचर मिलेगा न उसे खींचने वाला। परिजनों को ही उन्हें ले जाना होगा। इसमें भी घायलों के साथ परिजन नहीं पहुंचे तो चिकित्सक तक पहुंचने में ही लंबा वक्त लग जाता है। दो दिन पहले की ही बात है दिल्ली के घायलों को उपचार के लिए परिजन ही स्ट्रेचर और खुद उठाकर लेकर आए।
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दो बजे के बाद तो सिर्फ एक चिकित्सक की तैनाती रहती है, जो रेफर तत्परता के साथ करते हैं। कई बड़ी घटनाओं पर इमरजेंसी के लिए चिकित्सक घंटों बाद यहां पहुंचे। अधिकांश चिकित्सक आगरा से आते हैं। सभी दवाएं आज भी मौजूद नहीं हैं। पिछले दिनों जिला अस्पताल की ब्लड बैंक के बावजूद मरीज की खून के अभाव में मौत हो गई।
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एंबुलेंस सेवाओं का भी बुरा हाल है। 108 सेवा हो या फिर 102 बमुश्किल से ही उपलब्ध होती हैं। गर्भवती और प्रसूता को घंटों इंतजार करना होता है। इसमें भी अधिकांश एंबुलेंस सिर्फ वाहन का काम करती है। चिकित्सकीय सेवाओं का पूरी तरह से इनमें अभाव है। लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दो हैं, लेकिन एक के लिए चालक नहीं है। मंगलवार को महिला अस्पताल से अनेक प्रसूता 102 सेवा पर फोन करने के बाद अपने वाहन से घर चले गए।
एक नजर में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं
- जिला स्तरीय अस्पताल 03
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 12
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 26
- एंबुलेंस सेवा
108-18
102-28
लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस -02, संचालित 01
कबाड़ घोषित - 04
- चिकित्सकों की संख्या -102
- चिकित्सकों के पद -176
ये हैं जिले के आला चिकित्साधिकारी
सीएमओ-शेरसिंह- 8005192681
जिला अस्पताल, सीएमएस -डॉ. वीके गुप्ता-9411489051
महिला अस्पताल, सीएमएस-डॉ. बीलाल-8005192708
सौ सैय्या वृंदावन-सीएमएस- डॉ. केके गुप्ता