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वसूली लक्ष्य से कोसों दूर विभाग
Updated Wed, 04 Apr 2018 11:07 PM IST
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एटा। निजीकरण के विरोध से विद्युत निगम बेहाल है। नए काम तो दूर विभाग अपनी उधारी भी नहीं पटा पा रहा। जिले के तीनों खंड के साढ़े 41 करोड़ के लक्ष्य में मात्र नौ करोड़ की वसूली से अधिकारी परेशान हैं। अधिकारी कर्मचारी विद्युत चोरों एवं बकायेदारों के विरुद्ध भी प्रभावी अभियान नहीं चला रहे।
प्रदेश के पांच शहरों के विद्युत निजीकरण के विरोध का असर विद्युत व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। अवकाश के दिनों में खुलने वाले विद्युत कार्यालय अब नियमानुसार ही खुल रहे हैं। विरोध पर उतारू कर्मी इन दिनों नौकरी बचाने के लिए ही काम कर रहे हैं। कार्य बहिष्कार एवं अवकाश के चलते 27 मार्च से लेकर एक अप्रैल तक पूर्ण रूप से बंद रहे। ऐसे में इन पांच दिनों में एक भी पैसे का राजस्व को नहीं मिला। जबकि पैसा जमा करने पहुंचे उपभोक्ताओं को बैंरग लौटना पड़ा। लोगों का कहना है कि दशक में लगातार पांच दिनों के लिए राजस्व पटल कभी बंद नहीं रहे।
अधिकारी स्वीकारते हैं कि स्टाफ की उदासीनता का सीधा असर राजस्व वसूली पर पड़ रहा है। मार्च माह में शहरी खंड के 9.47 करोड़ के लक्ष्य के विपरीत मात्र चार करोड़ की ही वसूली हो सकी है। ग्रामीण खंड का हाल तो इससे भी बुरा है। 32 करोड़ के लक्ष्य में मात्र पांच करोड़ का राजस्व ही मिला है।
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गलत समय पर लिया निर्णय
राजस्व वसूली एवं अन्य कार्यों की धीमी गति से परेशान अधिकारी भी सरकार के निर्णय पर अंगुली उठा रहे हैं। इनका कहना है कि यह निर्णय नए वित्तीय वर्ष में लेना चाहिए था। ताकि राजस्व वसूली प्रभावित नहीं होती।
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प्रदेश के पांच शहरों के विद्युत निजीकरण के विरोध का असर विद्युत व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। अवकाश के दिनों में खुलने वाले विद्युत कार्यालय अब नियमानुसार ही खुल रहे हैं। विरोध पर उतारू कर्मी इन दिनों नौकरी बचाने के लिए ही काम कर रहे हैं। कार्य बहिष्कार एवं अवकाश के चलते 27 मार्च से लेकर एक अप्रैल तक पूर्ण रूप से बंद रहे। ऐसे में इन पांच दिनों में एक भी पैसे का राजस्व को नहीं मिला। जबकि पैसा जमा करने पहुंचे उपभोक्ताओं को बैंरग लौटना पड़ा। लोगों का कहना है कि दशक में लगातार पांच दिनों के लिए राजस्व पटल कभी बंद नहीं रहे।
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अधिकारी स्वीकारते हैं कि स्टाफ की उदासीनता का सीधा असर राजस्व वसूली पर पड़ रहा है। मार्च माह में शहरी खंड के 9.47 करोड़ के लक्ष्य के विपरीत मात्र चार करोड़ की ही वसूली हो सकी है। ग्रामीण खंड का हाल तो इससे भी बुरा है। 32 करोड़ के लक्ष्य में मात्र पांच करोड़ का राजस्व ही मिला है।
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गलत समय पर लिया निर्णय
राजस्व वसूली एवं अन्य कार्यों की धीमी गति से परेशान अधिकारी भी सरकार के निर्णय पर अंगुली उठा रहे हैं। इनका कहना है कि यह निर्णय नए वित्तीय वर्ष में लेना चाहिए था। ताकि राजस्व वसूली प्रभावित नहीं होती।