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ई-वे बिल: जीरा और सौंफ की हेराफेरी से ऐसे हो रही लाखों के टैक्स की चोरी
Updated Tue, 19 Dec 2017 11:13 PM IST
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आगरा। कागज में जीरा, लेकिन ला रहे हैं सौंफ। ई-वे बिल के नियमों को धता बताते हुए व्यापारियों ने इसका भी उपाय खोज लिया है। महंगे माल की जगह ई-वे बिल में सस्ते माल की घोषणा कर रहे हैं।
रेडीमेड कपड़ों, जूतों में भारी अवमूल्यन दिखाकर जीएसटी की चोरी की जा रही है। वाणिज्य कर कमिश्नर ने ऐसे मामलों की जांच एसआईबी के हवाले करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के बाहर से 50 हजार रुपये से ज्यादा मूल्य का सामान मंगाने के लिए ऑनलाइन ई-वे बिल की व्यवस्था प्रदेश में लागू की गई थी, लेकिन व्यापारियों ने इसे निष्प्रभावी कर दिया है।
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एक ही ट्रक में 50 हजार रुपये से कम मूल्य के एक से ज्यादा बिल लगाकर माल पर टैक्स की चोरी की जा रही है। अलग-अलग नामों से बिल बनाकर उनकी कीमत 50 हजार से कम दर्शाई जा रही है, जबकि माल की कीमत लाखों में है।
इसी तरह रेडीमेड गारमेंट, जूतों आदि के परिवहन पर उसकी कीमत 50 हजार से कम दिखाई जा रही है। वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने ऐसे मामलों में हिदायत दी है कि अगर किसी वाहन में 50 हजार रुपये से कम के तीन से ज्यादा बिल परिवहन में प्रयोग हो रहे हैं तो माल और वाहन का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
जिन व्यापारियों द्वारा माल का परिवहन 50 हजार से कम के बिल के जरिए किया जा रहा है, उनके बिल संकलित कर ऐसे व्यापारियों की जांच कराई जाएगी। विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) के जरिए ऐसे व्यापारियों की जांच होगी और इसकी रिपोर्ट पांच तारीख को लखनऊ भेजी जाएगी।
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रेडीमेड कपड़ों, जूतों में भारी अवमूल्यन दिखाकर जीएसटी की चोरी की जा रही है। वाणिज्य कर कमिश्नर ने ऐसे मामलों की जांच एसआईबी के हवाले करने के निर्देश दिए हैं।
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प्रदेश के बाहर से 50 हजार रुपये से ज्यादा मूल्य का सामान मंगाने के लिए ऑनलाइन ई-वे बिल की व्यवस्था प्रदेश में लागू की गई थी, लेकिन व्यापारियों ने इसे निष्प्रभावी कर दिया है।
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एक ही ट्रक में 50 हजार रुपये से कम मूल्य के एक से ज्यादा बिल लगाकर माल पर टैक्स की चोरी की जा रही है। अलग-अलग नामों से बिल बनाकर उनकी कीमत 50 हजार से कम दर्शाई जा रही है, जबकि माल की कीमत लाखों में है।
इसी तरह रेडीमेड गारमेंट, जूतों आदि के परिवहन पर उसकी कीमत 50 हजार से कम दिखाई जा रही है। वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने ऐसे मामलों में हिदायत दी है कि अगर किसी वाहन में 50 हजार रुपये से कम के तीन से ज्यादा बिल परिवहन में प्रयोग हो रहे हैं तो माल और वाहन का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
जिन व्यापारियों द्वारा माल का परिवहन 50 हजार से कम के बिल के जरिए किया जा रहा है, उनके बिल संकलित कर ऐसे व्यापारियों की जांच कराई जाएगी। विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) के जरिए ऐसे व्यापारियों की जांच होगी और इसकी रिपोर्ट पांच तारीख को लखनऊ भेजी जाएगी।