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कहीं मां की कोख का बवाल बनी जिंदगी...
Updated Sun, 15 Oct 2017 11:39 PM IST
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करहल (मैनपुरी)। नगर के मोहल्ला तपा की नगरिया में शनिवार देर रात तक काव्य संध्या में रसधार बहती रही। कवि प्रेम चंद्र शाक्य प्रेम के आवास पर उत्तराखंड के अल्मोड़ा के कवि ओम शरण आर्य ‘चंचल’ के सम्मान में काव्य संध्या के आयोजन हुआ था।
राष्ट्रपति पदक पुरस्कार यश भारती सम्मानित डाक्टर दीन मोहम्मद दीन ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कवि सम्मेलन में कवि नन्हें खां ने वंदना के साथ छंद पढ़ा, रखने न कभी हम देंगे तुम्हें कश्मीर धरा पर पैर। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डाक्टर पदम सिंह पदम ने ‘बहुत भावुक हूं, मगर पारा नहीं हूं।
आपदाओं से कभी हारा नहीं हूं’ रचना सुनाई। मुख्य अतिथि ओम शरण आर्य चंचल ने अपनी इस रचना -एकता मिलती विविधता में जहां हर एक दिन, जान से प्यारा हमें यह देश हिंदुस्तान है, से राष्ट्रीयता का जज्बा जगाया। डाक्टर दीन मोहम्मद दीन ने देश की मौजूदा हालत का ये चित्रण किया, देखे दशा कौन इस देश की, अंधे हुए कान बहरे हुए।
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प्रोेफेसर राजेंद्र सिंह यादव ने जहां ये चुटीली रचना पेश की, पुजारी राजनीति के व्यापारी हो गए अब, वहीं इटावा से पधारे कवि महराम सिंह ने अपनी इन काव्य पंक्तियों को पढ़ा, बांटता है बारूद रात को जो छुप छुप, शांति के कबूतर वो ही उड़वा रहा।
वरिष्ठ कवि रामदत्त पारस ने ‘अब तुम आये तो क्या आये’, संयोजक प्रेम चंद्र शाक्य ने ‘दीप तुझे तो जलना होगा जब तक तेल और बाती है’, संचालनकर्ता कवि सतीश समर्थ, राजवीर सिंह राज, राकेश सरल, ताहिर चंाद, संजू सूर्यम, रघुवर दयाल ने भी काव्य पाठ किया।
राष्ट्रपति पदक प्राप्त प्रधानाचार्य डाक्टर राम नरायन बाथम ने बालिका शिक्षा, पर्यावरण, स्वच्छता पर अपने विचार व्यक्त किए।
काव्य संध्या में मुख्य अतिथि कवि चंचल के साथ ही आधुनिक रसखान के रूप में विख्यात कवि दीन मोहम्मद दीन, डा. पदम, डा. बाथम, रामदत्त पारस, सहित अन्य कवियों को भी अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह आदि देकर सम्मानित किया गया। श्रोताआें में कमांडेंट दिलशेर कुरील, अभिषेक तिवारी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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राष्ट्रपति पदक पुरस्कार यश भारती सम्मानित डाक्टर दीन मोहम्मद दीन ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कवि सम्मेलन में कवि नन्हें खां ने वंदना के साथ छंद पढ़ा, रखने न कभी हम देंगे तुम्हें कश्मीर धरा पर पैर। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डाक्टर पदम सिंह पदम ने ‘बहुत भावुक हूं, मगर पारा नहीं हूं।
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आपदाओं से कभी हारा नहीं हूं’ रचना सुनाई। मुख्य अतिथि ओम शरण आर्य चंचल ने अपनी इस रचना -एकता मिलती विविधता में जहां हर एक दिन, जान से प्यारा हमें यह देश हिंदुस्तान है, से राष्ट्रीयता का जज्बा जगाया। डाक्टर दीन मोहम्मद दीन ने देश की मौजूदा हालत का ये चित्रण किया, देखे दशा कौन इस देश की, अंधे हुए कान बहरे हुए।
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प्रोेफेसर राजेंद्र सिंह यादव ने जहां ये चुटीली रचना पेश की, पुजारी राजनीति के व्यापारी हो गए अब, वहीं इटावा से पधारे कवि महराम सिंह ने अपनी इन काव्य पंक्तियों को पढ़ा, बांटता है बारूद रात को जो छुप छुप, शांति के कबूतर वो ही उड़वा रहा।
वरिष्ठ कवि रामदत्त पारस ने ‘अब तुम आये तो क्या आये’, संयोजक प्रेम चंद्र शाक्य ने ‘दीप तुझे तो जलना होगा जब तक तेल और बाती है’, संचालनकर्ता कवि सतीश समर्थ, राजवीर सिंह राज, राकेश सरल, ताहिर चंाद, संजू सूर्यम, रघुवर दयाल ने भी काव्य पाठ किया।
राष्ट्रपति पदक प्राप्त प्रधानाचार्य डाक्टर राम नरायन बाथम ने बालिका शिक्षा, पर्यावरण, स्वच्छता पर अपने विचार व्यक्त किए।
काव्य संध्या में मुख्य अतिथि कवि चंचल के साथ ही आधुनिक रसखान के रूप में विख्यात कवि दीन मोहम्मद दीन, डा. पदम, डा. बाथम, रामदत्त पारस, सहित अन्य कवियों को भी अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह आदि देकर सम्मानित किया गया। श्रोताआें में कमांडेंट दिलशेर कुरील, अभिषेक तिवारी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।